नये साल में डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर शुरू

अब हर घर तक आसानी से पहुंचेगा डाक विभाग के जरिये भेजा गया पार्सल
अब हर घर तक आसानी से पहुंचेगा डाक विभाग के जरिये भेजा गया पार्सल
गया जी में डाक अधीक्षक ने किया शुभारंभ
संवाददाता, गया जी. डाक विभाग ने गया जी प्रधान डाकघर के तहत एक बड़ी पहल शुरू की है. अब शहर और गांव के हर घर को डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर यानी डीआइजीआइपीन से जोड़ दिया गया है. इसका शुभारंभ डाक विभाग के वरीय डाक अधीक्षक अंशुमान ने किया. वरीय डाक अधीक्षक ने कहा कि डाक सेवाओं को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी व तकनीक सक्षम बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. डीआइजीआइपीन आधारित डिलीवरी प्रणाली का शुभारंभ कर दिया गया है. अब डाकिया मोबाइल के लाइव लोकेशन के आधार पर किसी भी गली-मुहल्ले तक आसानी से चिट्ठी और पार्सल आसानी से पहुंचा सकेगा. इस प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक पते को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान (डीआइजीआइपीन) प्रदान की जाती है, जिससे डाक सामग्री की डिलीवरी अधिक सटीक, त्वरित व विश्वसनीय होगी. डीआइजीआइपीन प्रणाली के लागू होने से पारंपरिक पते की अस्पष्टता में कमी आयेगी और स्पीड पोस्ट, पंजीकृत डाक व पार्सल जैसी सेवाओं की डिलीवरी में उल्लेखनीय सुधार होगा. यह पहल ‘डिजिटल इंडिया’ व ‘नागरिक-केंद्रित सेवाओं’ की दिशा में डाक विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है. मौके पर प्रभारी वरीय डाकपाल गौरव रंजन, नीरज, रवींद्र कुमार वर्मा, अक्षय कुमार, अशोक कुमार, मोहम्मद इमरान खान समेत अन्य कर्मचारी शामिल रहे.
क्या कहते हैं वरीय डाक अधीक्षक
वरिष्ठ डाक अधीक्षक अंशुमान ने बताया कि अब तक कई बार अधूरे पते की वजह से डाकिया सही घर नहीं खोज पाते थे. इस कारण पत्र और पार्सल वापस लौटाने पड़ते थे. इसी समस्या को दूर करने के लिए इंडियन पोस्ट ने डीआइजीआइपीन सिस्टम तैयार किया है. उन्होंने बताया कि हर मकान को 10 अंकों का डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर दिया जायेगा. कोई भी व्यक्ति इंडियन पोस्ट ऑफिस की वेबसाइट dac.indiapost.gov.in या मोबाइल एप पर जाकर अपना पूरा पता दर्ज करेगा. इसके बाद उसे डीआइजीआइपीन मिल जायेगा. यह नंबर डालते ही डाकिया मोबाइल पर लोकेशन देखकर आसानी से घर तक पहुंच सकेगा.
डाकिया को दी गयी ट्रेनिंग
गया डिविजन के अंतर्गत आने वाले सभी डाकियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा चुका है. उन्हें बताया गया है कि कैसे मोबाइल पर लाइव लोकेशन देखकर सही पते तक पहुंचा जाये. पहले जहां करीब 30 से 35 प्रतिशत पार्सल अधूरे पते की वजह से वापस लौट जाते थे, अब डीआइजीआइपीन से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जायेगी.क्या है डीआइजीआइपीन
डीआइजीआइपीन यानी डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर 10 अंकों का कोड होता है. इसे मैपिंग तकनीक के जरिये तैयार किया जाता है और हर पते को चार मीटर के दायरे में लोकेशन से जोड़ा जाता है. इससे किसी भी जगह का सटीक डिजिटल पता मिल जाता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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