ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम से लैस होगा रेलखंड

Updated at : 28 Aug 2024 11:08 PM (IST)
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ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम से लैस होगा रेलखंड

अब कंट्रोल रूम को मिलती रहेगी ट्रेनों के लोकेशन की जानकारी

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अब कंट्रोल रूम को मिलती रहेगी ट्रेनों के लोकेशन की जानकारी

गया.

अब गया-डीडीयू-धनबाद के प्रधानखंटा रेलखंड को जल्द ही ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम से लैस किया जायेगा. इस संबंध में पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) सरस्वती चंद्र ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के लगभग 417 किमी लंबे पंडित दीन दयाल उपाध्याय-गया-प्रधानखंटा रेलखंड को ऑटोमेटिक ब्लॉक सिगनलिंग सिस्टम से लैस किया जाना है. इसमें से लगभग 61.86 किलोमीटर रेलखंड पर ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम की कमीशनिंग की जा चुकी है. सीपीआरओ ने बताया कि अनुग्रह नारायण रोड-पहलेजा (23 किमी) व मानपुर-गुरपा (38.86 किमी) रेलखंड पर ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली की कमीशनिंग की जा चुकी है. अब यह कार्य करना प्रारंभ कर दिया है, जबकि 23.63 किलोमीटर लंबे पंडित दीन दयाल उपाध्याय-सैयदराजा तथा 13.4 किलोमीटर लंबे पहलेजा-सासाराम रेलखंड पर ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम की कमीशनिंग सितंबर माह के अंत तक कर ली जायेगी.सिग्नल में खामी आने पर मिलेगी सूचनाविदित हो कि अभी परंपरागत सिग्नलिंग सिस्टम चल रहा है, जिसमें एक ब्लाॅक सेक्शन में ट्रेन के अगले स्टेशन पर पहुंच जाने के बाद ही पीछे वाली ट्रेन को आगे बढ़ने के लिए ग्रीन सिग्नल मिलता है. इससे खाली रेल लाइनों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता है. उन्होंने बताया कि ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम में दो स्टेशनों के मध्य लगभग प्रत्येक एक किलोमीटर की दूरी पर सिग्नल लगाये जाते हैं. सिग्नल के सहारे ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलती रहेंगी. अगर, आगे वाले सिग्नल में तकनीकी खामी आती है, तो पीछे चल रही ट्रेनों को भी सूचना मिल जायेगी. इससे जो ट्रेनें जहां रहेंगी, वहीं रुक जायेंगी.

ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगीऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम के लागू हो जाने से एक ही रूट पर लगभग एक किमी के अंतर पर एक के पीछे एक ट्रेनें चल सकेंगी. इससे रेल लाइनों पर ट्रेनों की रफ्तार के साथ ही संख्या भी बढ़ सकेगी. वहीं, कहीं भी खड़ी ट्रेन को निकलने के लिए आगे चल रही ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने का भी इंतजार नहीं करना पड़ेगा. यानी एक ब्लॉक सेक्शन में एक के पीछे दूसरी ट्रेन आसानी से चल सकेगी. साथ ही कंट्रोल रूम को ट्रेनों के सही लोकेशन की जानकारी मिलती रहेगी.

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