जीएसटी से ब्रिटिश शासन के जटिल कर ढांचे का अंत
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 May 2017 8:13 AM (IST)
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आयोजन. गया कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग में सेमिनार जीएसटी से ही एक देश व एक कर का सपना होगा बुलंद गया : वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) विषय पर बुधवार को गया कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग में सेमिनार का आयोजन किया गया. संबोधित करते हुए अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ अश्विनी कुमार ने कहा कि […]
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आयोजन. गया कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग में सेमिनार
जीएसटी से ही एक देश व एक कर का सपना होगा बुलंद
गया : वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) विषय पर बुधवार को गया कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग में सेमिनार का आयोजन किया गया. संबोधित करते हुए अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ अश्विनी कुमार ने कहा कि वैश्विक प्रतियोगिता, कल्याणकारी सरकार, देश का विकास व सामाजिक न्याय के साथ हो. भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में जनता की अपेक्षाएं को मूर्त रूप से देने के लिए सरकार को बड़ी मात्रा में रुपयों की आवश्यकता है. यह सही करारोपण द्वारा ही संभव है.
लेकिन, दुर्भाग्यवश ब्रिटिश शासन में भारतीय कर ढांचे को काफी जटिल बना दिया. ताकि, भारत के विकास की गति धीमी हो.इस जटिल कर प्रणाली के कारण कर लागत में जारी भ्रष्टाचार व कालाधन के कारण भारत में समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही थी. भारतीय कर के इतिहास में जीएसटी एक ऐतिहासिक सुधार है. इसमें सभी अप्रत्यक्ष करों को एक साथ किया गया और कानून को सुलभ और पारदर्शी बनाया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग वस्तु व सेवा कर के प्रावधानों में आ सकें.
उन्होंने कहा कि जीएसटी से ही एक देश व एक कर का सपना बुलंद हो सका. इससे भारत में वैश्विक विनिर्माण हब बनें और देश के अंदर अधिक से अधिक निवेशक अपना उत्पादन में योगदान दें.
उन्होंने कहा कि आज विश्व के 106 देशों में जीएसटी लागू है. यह को-ऑपरेटिव फेडरल सहयोगी संघवाद पर आधारित है. इसमें केंद्र व राज्य मिल कर विकास करेंगे और राज्यों को अधिक से अधिक आय प्राप्त होगा.
बढ़ेगा जीडीपी और महाशक्ति के रूप में उभरेगा भारत
श्री कुमार ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि उपभोग पर आधारित यह कर इ-कॉमर्स के माध्यम से ऑनलाइन मार्केट होने से बिहार जैसे जनसंख्या वाले राज्यों को अधिक राज्य प्रस्ताव प्राप्त होगा. हालांकि, देश में जीएसटी सही ढंग से लागू करने के लिए इससे संबंधित अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है. साथ ही प्रशिक्षित अधिकारी व्यापारियों व लोगों के बीच जागरूकता पैदा करें.
नयी आर्थिक नीति के बाद दिखेगा बदलाव
सेमिनार को संबोधित करते हुए राजीव रंजन कुमार ने कहा कि 1991 के नयी आर्थिक नीति के बाद जीएसटी से अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा. सेमिनार का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सूरज राउत ने कहा कि ऐसे सेमिनार के आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में छिपी हुई योग्यता को निकालना है. सेमिनार कराने से छात्रों में काफी बदलाव आयेगा. इस अवसर पर डॉ प्रियदर्शिनी, अमर कुमार, सूरजभान, गौरव कुमार, पुरुषोत्तम कुमार, शिवानी, प्रियंका, रीना व मानसी ने अपने विचार व्यक्त किया. इस सेमिनार में काफी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे.
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