पानी में सजीव के लक्षण, सुख दु:ख में रहता है साथ : पांडेय
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :06 Aug 2016 9:12 AM
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गया: पानी सजीव है, सुख-दु:ख का साथी है. वह मनुष्य की भावनाओं के साथ प्रतिक्रिया भी करता है. सभी मौसम में पानी के क्रिस्टल की बनावट अलग-अलग होती है. क्रिस्टल पृथ्वी के किसी भी सुंदर फूल से बनावट व आकर्षण के मामले में कम नहीं है. पानी से बने क्रिस्टल की सुंदरता ही उसकी प्रतिक्रिया […]
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गया: पानी सजीव है, सुख-दु:ख का साथी है. वह मनुष्य की भावनाओं के साथ प्रतिक्रिया भी करता है. सभी मौसम में पानी के क्रिस्टल की बनावट अलग-अलग होती है. क्रिस्टल पृथ्वी के किसी भी सुंदर फूल से बनावट व आकर्षण के मामले में कम नहीं है. पानी से बने क्रिस्टल की सुंदरता ही उसकी प्रतिक्रिया व्यक्त करती है.
यही नहीं, हर देश के पानी की खूबी व सुंदरता भी अलग-अलग होती है. इन तमाम वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी गौतम बुद्ध महिला (जीबीएम) कॉलेज के जंतु विभाग द्वारा ‘मैसेज फ्रॉम वाटर’ विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद डॉ बीएन पांडेय ने दी. उन्होंने उपरोक्त जानकारी इंटरनेशनल वाटर फॉर लाइफ फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ मसारू इमोटो (जापान) के रिसर्च के हवाले से दी.
इस मौके पर जगजीवन काॅलेज के आचार्य डॉ शंकर ने कहा कि पानी में सहनशक्ति भी होती है. उसे जब गरम किया जाता है, तो उसमें सिकुड़न होती है. 40 डिग्री तक यह प्रक्रिया जारी रहती है. कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ सत्येंद्र प्रजापति ने भी पानी के महत्व पर प्रकाश डाला. डॉ नलिनी राठौर ने कहा कि हम विश्वसंख्या के 12 प्रतिशत हैं, लेकिन पानी केवल विश्व का चार प्रतिशत ही है. शिक्षकों के अलावा छात्रा स्वाति सिन्हा व स्वेता ने जल प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की. कार्यक्रम का संचालन डॉ आशा सिंह ने किया.
पानी में सम्मान की भावना
पानी में सम्मान की भावना होती है. डाॅ बीएन पांडेय ने अमेरिका व डॉ मासारू इमोटो द्वारा किये गये प्रयोग का हवाला देते हुए बताया कि सात-आठ साल पूर्व मैक्सिको में पानी में तेल का रिसाव हुआ था. लाख प्रयास के बाद भी अमेरिका से समस्या का समाधान नहीं हुआ. उसने मासारू इमोटो व उनकी टीम को बुलाया. टीम ने मौके का मुआयना किया. इसके बाद पानी से पुराने रूप में आने की प्रार्थना की. पानी ने उनकी प्रार्थना सुनी और वह पहले के रूप में प्रवाहित होने लगा. उन्होंने कहा कि ऐसा प्रमाण हमारे भारतीय धर्मग्रंथों में भी पढ़ने को मिलता है.
शांतिप्रिय होता है पानी
देश में अशांति होती है, तो पानी के अंदर भी विखंडित रूप में क्रिस्टल तैयार होता है. वह अशांति बरदाश्त नहीं करता है. ऐसा रिसर्च में पाया गया है.
पानी को डांट पसंद नहीं
डॉ बीएन पांडेय ने कहा कि पानी को मीठे शब्द पसंद हैं. उन्होंने कहा कि दो अलग-अलग ग्लास में पानी रखें. एक ग्लास के नीचे ‘यू फूल’, दूसरे ग्लास के नीचे ‘थैंक यू’ लिखा हुआ कागज का परचा रख दें. उसे 24 घंटे तक छोड़ दें. 24 घंटे बाद जब उसे क्रिस्टल फाॅर्म में देखेंगे, तो जिस ग्लास के नीचे ‘थैंक यू’ लिखा हुआ परचा था, उस ग्लास के पानी का क्रिस्टल सुंदर तैयार हुआ, पर दूसरे में ऐसा कुछ नहीं मिलेगा.
पानी को संगीत है प्यारा
पानी को म्यूजिक पसंद है. पानी जिस म्यूजिक को पसंद कर लेता है, उसका क्रिस्टल सुंदर तैयार होता है. संगीत के प्रति पानी का अपना टेस्ट है.
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