लापरवाही: कहीं चावल, तो कहीं पानी नहीं

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jun 2016 8:36 AM

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गया: स्कूलों में मिड-डे मिल बड़ी समस्या बनी है. कई जगह महीनों से दोपहर का खाना बंद है. ऐसा नहीं है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी इससे अनजान हैं. बावजूद इसके बिगड़ी व्यवस्था को काबू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. इसका नतीजा है कि स्थिति ज्यों की त्यों बनी है. […]

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गया: स्कूलों में मिड-डे मिल बड़ी समस्या बनी है. कई जगह महीनों से दोपहर का खाना बंद है. ऐसा नहीं है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी इससे अनजान हैं. बावजूद इसके बिगड़ी व्यवस्था को काबू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. इसका नतीजा है कि स्थिति ज्यों की त्यों बनी है. खास बात यह है कि पूरे प्रमंडल में गया में ही मध्याह्न भोजन के बंद होने का मामला सबसे अधिक है. जहानाबाद व अरवल अब तक बेहतर हैं.
आये दिन आती रहती है शिकायत
उल्लेखनीय है कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन सरकार की पहली प्राथमिकता है. इसे हर हाल में प्राइमरी व मध्य स्कूलों में प्रभावी करना है, पर यह सच नहीं है. आये दिन स्कूलों में मिड-डे मिल बंद होने की सूचना मिलती है. छात्रों को भूखे घर वापस भेज दिया जाता है. जिले में 59 ऐसे स्कूल हैं, जहां बच्चों को दोपहर का खाना नहीं दिया जा रहा है. कभी अनाज नहीं होने का कारण बता कर, तो कभी पानी नहीं होने का. ऐसे स्कूलों के शिक्षकों का साफ कहना है कि उनके बस में कुछ नहीं है, सिवाय बड़े अफसरों को सूचना देने के.
क्यों बंद हुआ दोपहर का खाना
आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि चावल का उठान समय पर और सही तरीके से नहीं होना ही मिड-डे मिल बंद होने की मूल वजह है. ठेकेदारों व अधिकारियों के बीच के गैप की वजह से अनाज स्कूलों तक नहीं पहुंच पाता है. इसके अलावा कई स्कूलों में पानी की व्यवस्था भी नहीं है, जिसकी वजह से दोपहर का भोजन नहीं बन पाता़ बच्चे दूसरे गांव से पानी लाकर पीते हैं.
समस्या दूर करने की हो रही कोशिश : यह समस्या गर्मियों की छुट्टी से पहले थी. इसे दूर करने की तेजी से कोशिश की जा रही है. सभी स्कूल खुल गये हैं. स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए चावल भेजा रहा है.
आनंद प्रकाश, मध्याह्न भाेजन डीपीएम
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