पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत का गंभीर होना आवश्यक

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बोधगया: पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत को गंभीर होना होगा. विश्व के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने की जरूरत है. प्रदूषित पर्यावरण से मानव जीवन पर बहुत ही बुरा असर पड़ने वाला है. ये बातें बोधगया स्थित तेरगर मोनास्टरी में सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में 17वें करमापा उज्ञेन थिनले दोरजे ने कहीं. […]

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बोधगया: पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत को गंभीर होना होगा. विश्व के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने की जरूरत है. प्रदूषित पर्यावरण से मानव जीवन पर बहुत ही बुरा असर पड़ने वाला है. ये बातें बोधगया स्थित तेरगर मोनास्टरी में सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में 17वें करमापा उज्ञेन थिनले दोरजे ने कहीं.

करमापा ने बताया कि 2015 में धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में आयोजित पांचवें अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में पर्यावरण संरक्षण पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया था. कांफ्रेंस में पहुंचे हिमालय क्षेत्र के सभी बौद्ध मठों के प्रमुखों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मुहिम चलाने का संकल्प लिया. उन्होंने बताया कि कहा कि तिब्बत में काफी तेजी से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है. इसका दूरगामी परिणाम भारत पर भी पड़ रहा है. अगर तिब्ब्त में प्रदूषित हो रहे पर्यावरण पर भारत सचेत नहीं हुआ, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. भारत के बाद तिब्बत के प्रदूषित पर्यावरण का असर इसके अन्य पड़ोसी मुल्कों पर भी पड़ेगा. पर्यावरण को संतुलित करने में स्थानीय लोगों की भी भूमिका महत्वपूर्ण है.

चीनी महिला के हमले की घटना से किया इनकार : गत दिनों पूजा के दौरान एक चीनी महिला द्वारा पुस्तक फेंक कर हमला होने की घटना से जुड़े सवाल पर 17वें करमापा ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र का नाम लेकर कहा कि वह न्यूज पढ़ कर खुद अचंभित थे. उनकी जानकारी में ऐसी घटना नहीं हुई हैं. उन्होंने कहा कि हम पूजा-पाठ नकारात्मक शक्तियों को दूर करने के लिए करते हैं. समाज में अच्छे व बुरे दोनों प्रकार के लोग होते हैं. नकारात्मक बातों हम दूर हटाते चलते हैं. करमापा ने रावण पुतला दहन का उदाहरण देते हुए कहा कि हम सभी नकारात्मक विचारों को रावण पुतला दहन के दौरान जला देते हैं.

तिब्बत की स्थिति और बिगड़ी : तिब्बत की स्वायतता से जुड़े सवाल पर 17वें करमापा ने कहा कि तिब्बत की हालत दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है. वर्तमान में वहां की स्थिति और बिगड़ी है. हर बातों पर पाबंदी ज्यादा हो गयी है. इस बारे में भारत को गंभीरता से सोचने की जरूरत है. तिब्बत में हो रही हर गतिविधि का असर भारत पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि चीन के बदलते आर्थिक माहौल के कारण ही भारत के आर्थिक माहौल में भी बदलाव आया है.

अपने घर कोई क्यों नहीं लौटना चाहेगा : करमापा ने कहा कि हम तिब्बत में अपने मां-पिता व दोस्तों को छोड़ कर भारत में शरण लिये हैं. वहां जो विषम परिस्थिति है, उसमें तिब्बत लौटना संभव नहीं है. क्या कोई ऐसा व्यक्ति है, जो अपने घर लौटना नहीं चाहेगा भला. वह खुद भी नहीं जानते कि वह अपने घर कब लौट पायेंगे. भविष्य में क्या परिस्थितियां उत्पन्न होंगी, अभी कहा नहीं जा सकता.

कब खुलेगा विश्वस्तरीय अस्पताल बता नहीं सकते : बोधगया में विश्वस्तरीय अस्पताल खोलने की घोषणा पिछले वर्ष 17वें करमापा द्वारा की गयी थी. इस बारे में सवाल किये जाने पर करमापा ने कहा कि बोधगया में आधुनिक इलाज की सुविधा मुहैया कराने के लिए यहां वर्ल्ड क्लास अस्पताल की जरूरत है. लेकिन, भारत में विश्वस्तरीय अस्पताल खोलने की प्रक्रिया बेहद ही जटिल है. ऐसे में बोधगया में विश्वस्तरीय अस्पताल कब तक बना पायेगा, यह बता पाना मुश्किल है.

रसोइये की भूमिका में नजर आये करमापा

विश्व में शांति व सद्भाव के संदेश को लेकर वर्षों से साधना में समर्पित 17वें करमापा उज्ञेन थिनले दोरजे सोमवार को एक नये अंदाज में बोधगया स्थित अखिल भारतीय भिक्खू संघ के परिसर में नजर आये. वहां गरीबों को भोजन कराने के लिए अस्थायी रूप से बनाये गये रसोईघर में 17वें करमापा एक कुशल रसोइये के रूप में दिखे. उन्होंने गरीबों के लिए बनाये जानेवाले भोजन की रखीं खाद्य-सामग्री का जायजा लिया व चाकू लेकर टमाटरों को काटा. वहां अदरख की गंध जानने की कोशिश में उसे सुंघा और उसके बारे में चर्चा की. 17वें करमापा द्वारा अचानक रसाेईघर में घुस कर कामकाज करते देख वहां मौजूद उनके अनुयायियों की आंखों से श्रद्धा के अांसू आ गये. अनुयायियों को ऐसा लग रहा था कि इतने बड़े धर्मगुरु को गरीबों के भोजन के लिए कितनी चिंता है. उनके अनुयायी दोनों हाथ जोड़ व सिर झुका कर 17वें करमापा का अभिवादन करते रहे.

बदलेगी बसाढ़ी कस्तूरबा गांधी स्कूल की सूरत

काग्यू अंतरराष्ट्रीय मोनलम ट्रस्ट के प्रोग्राम को-ऑडिनेटर लाकपा थेरिंग ने बताया कि सुजाता विहार-टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स में 15, 16, 18, 19 व 22 फरवरी को अंगरेजी, तिब्ब्ती, औषधी व फिजियोथरेपी से रोगियों की नि:शुल्क जांच की जायेगी. इसके अतिरिक्त् 17 फरवरी को बकरौर गांव में सुजाता मंदिर के पास स्थित चरवाहा विद्यालय, 20 फरवरी को बसाढ़ी गांव स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और 21 फरवरी को पड़रिया गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जायेगा. प्रोग्राम को-ऑडिनेटर लाकपा थेरिंग ने बताया कि बसाढ़ी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का दौरा किया गया है. वहां बच्चियों के लिए शुद्ध पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है. साथ ही वहां साफ-सफाई पर भी कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है. इस बाबत काग्यू अंतरराष्ट्रीय मोनलम ट्रस्ट की ओर से उस स्कूल में बच्चियों को शुद्ध पेयजल की व्यवस्था को लेकर वाटर फ्यूरी टैंक लगाया जा रहा है. साथ ही बच्चियों की साफ-सफाई को लेकर बेहतर प्रबंध किये जायेंगे.

नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का लिया जायजा

17वें करमापा उज्ञेन थिनले दोरजे ने बोधगया स्थित सुजाता विहार-टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स में काग्यू अंतरराष्ट्रीय मोनलम ट्रस्ट द्वारा सोमवार से आयोजित मानव कल्याण नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का जायजा लिया. उन्होंने रोगियों का इलाज कर रहे मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल व दूसरे राज्यों से आये विशेषज्ञ डॉक्टरों से बातचीत की और शिविर से संबंधित जानकारी ली. वहां कामकाज कर रहे नर्सों का हौसला बढ़ाया.

विशेषज्ञ डॉक्टरों की ली जा रही मदद

प्रोग्राम को-ऑडिनेटर लाकपा थेरिंग ने बताया कि चिकित्सा शिविर में हिमाचल प्रदेश, तिब्बत सहित अन्य प्रदेशों से डॉक्टरों की टीम लायी गयी है. साथ ही मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पोस्टेड विशेषज्ञ डॉक्टरों से भी मदद ली जा रही है. यहां नि:शुल्क दवाओं के साथ भोजन की भी व्यवस्था की गयी है.

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