अद्वैत दर्शन है भारतीय चिंतन का मुख्य केंद्र बिंदु

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बोधगया: भारतीय चिंतन प्रणाली का केंद्र बिंदु अद्वैत दर्शन रहा है, जहां विश्व व उसमें पाये जाने वाले सभी जीवों को मूल तत्व से अभिन्न माना गया है. उक्त बातें मगध विश्वविद्यालय में आयोजित इंडियन फिलॉसिफिकल कांग्रेस (आइपीसी) के 90वें अधिवेशन के तीसरे दिन बालुगांव कॉलेज, बालुगांव (ओड़िसा) के डॉ कैलाश चंद्र मोहराना ने कहीं. […]

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बोधगया: भारतीय चिंतन प्रणाली का केंद्र बिंदु अद्वैत दर्शन रहा है, जहां विश्व व उसमें पाये जाने वाले सभी जीवों को मूल तत्व से अभिन्न माना गया है. उक्त बातें मगध विश्वविद्यालय में आयोजित इंडियन फिलॉसिफिकल कांग्रेस (आइपीसी) के 90वें अधिवेशन के तीसरे दिन बालुगांव कॉलेज, बालुगांव (ओड़िसा) के डॉ कैलाश चंद्र मोहराना ने कहीं.

इंडोमेंट लेक्चर के तहत अदिकावी नन्नाया यूनिवर्सिटी, राजमुंद्री (आंध्र प्रदेश) के पूर्व कुलपति प्रो जार्ज विक्टर ने मानवाधिकार एक नये आयाम की आवश्यकता विषय पर अपने मतों का उल्लेख करते हुए यह विचार व्यक्त किया कि अधिकार को हमेशा उत्तरदायित्व के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय दार्शनिक परंपरा में हमेशा से समानता के मूल्य पर बल दिया जाता रहा है.

इसी विषय पर अपना विचार प्रस्तुत करते हुए एसआरपीएस काॅलेज, जैतपुर(मुजफ्फरपुर) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजीव कुमार ने बल दिया कि श्रुति ग्रंथों में तो सभी प्रकार के सांसारिक जीवों के अधिकारों से जुड़े मूल्यों का महत्व दिया गया है. व्याख्यान के तहत यूएन कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, अदासपुर (कटक) के डॉ विजय कुमार नायक ने दिक् और काल के संबंध में पाश्चात्य दार्शनिकों यथा काष्ट, लाइबनीज व बर्कले आदि के मतों का उल्लेख किया. इससे पहले एएन कॉलेज, पटना के डॉ शैलेश कुमार सिंह ने भारतीय दर्शन में काल के स्थान के संदर्भ में अपना व्याख्यान देते हुए भारतीय चिंतन प्रणाली के विभिन्न मतों का उल्लेख किया.

उन्होंने वैश्विक दर्शन, सांख्य दर्शन, जैन दर्शन व अथर्ववेद के विचारों का उल्लेख किया व बताया कि जहां वैश्विक दर्शन में काल के यथार्थ द्रव्य के रूप में स्वीकार किया गया है, वहीं सांख्य दर्शन काल को यथार्थ स्थान नहीं प्रदान किया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि अथर्ववेद में काल को यथार्थ सत्ता के रूप में स्वीकार किया गया है.

संगोष्ठी की अध्यक्षता डॉ जीपी दास व मद्रास विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष सह आइपीसी के महासचिव डॉ पनीर सेलवम ने की. उक्त दर्शनशास्त्रियों के अलावा देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आये लगभग 80 विद्वानों ने अपनी-अपनी प्रस्तुति दी. अधिवेशन के स्थानीय सचिव एमयू के डॉ बीबी प्रसाद शर्मा ने बताया कि गुरुवार को चार दिवसीय अधिवेशन का समापन होगा.

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