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बिहार मानव सभ्यता के इतिहास का खजाना : CM नीतीश

Updated at : 18 Jan 2016 11:09 AM (IST)
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बिहार मानव सभ्यता के इतिहास का खजाना : CM नीतीश

बोधगया: बिहार मानव सभ्यता के इतिहास का खजाना है. यहां पूरे देश के इतिहास की झलक दिखती है. बिहार से शासित कई प्रदेश आज स्वतंत्र देश बन चुके हैं. यहां मानव सभ्यता का इतिहास दर्ज है. बिहार की तीन बातें महत्वपूर्ण हैं. यहां के युवा मेहनती व मेधावी हैं. बिहार में कृषि की अपार संभावनाएं […]

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बोधगया: बिहार मानव सभ्यता के इतिहास का खजाना है. यहां पूरे देश के इतिहास की झलक दिखती है. बिहार से शासित कई प्रदेश आज स्वतंत्र देश बन चुके हैं. यहां मानव सभ्यता का इतिहास दर्ज है. बिहार की तीन बातें महत्वपूर्ण हैं. यहां के युवा मेहनती व मेधावी हैं. बिहार में कृषि की अपार संभावनाएं हैं और इसका इतिहास गौरवशाली है.

उक्त बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहीं. वह रविवार को तीन दिवसीय बौद्ध महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा दुनिया का पहला विश्वविद्यालय था, जहां विदेश से लोग पढ़ने-पढ़ाने आते थे. अंदर जाने से पहले दरवाजे पर ही उनकी परीक्षा होती थी. अब फिर से नालंदा को अंतरराष्ट्रीय स्तर का विश्वविद्यालय बनाने का प्रयास जारी है.

सीएम ने उदंतपुरी व कुटुंबा में की गयी खुदाई का जिक्र करते हुए कहा कि देखने में एकमात्र टीला लगने वाले स्नथा की खुदाई होने पर 10 हजार वर्ष पुराना इतिहास सामने आया है. सीएम ने कहा कि यह धरती मोक्ष व ज्ञान का संगम है.

बौद्ध महोत्सव के आयोजन का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि अब यह अंतरराष्ट्रीय स्वरूप लेने लगा है. इसमें भाग लेने व देखने के लिए विभिन्न देशों से कलाकार, दर्शक व प्रतिनिधि भी आने लगे हैं. उन्होंने कहा कि बोधगया में बौद्ध धर्म माननेवाले पर्यटकों के साथ-साथ इतिहास में रूचि रखनेवाले पर्यटक भी आते हैं.

सर्द रात भी करा गयी गरमी का एहसास
कालचक्र मैदान में आयोजित बाैद्ध महोत्सव के उद्घाटन समारोह के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर शुरू हुआ. देश-विदेश से आये कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुति ने समां बांध दिया. सुरूर इस कदर छाया कि सर्द रात में भी गरमी का अहसास होने लगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी उद्घाटन के बाद कलाकारों की प्रस्तुति देखी. उनकी कला देख वे मंत्रमुग्ध हो गये. यों तो सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर देर तक चलता रहा. इसमें कई देशों कलाकारों ने प्रस्तुति दी, लेकिन श्रीलंका के कलाकारों ने खूब लुभाया. उनके कलात्मक व तड़कते-भड़कते नृत्यों पर लोग झूम उठे.

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