प्रशासन व अतिक्रमणकारियों में हुई झड़प, अतिक्रमणकारियों ने निगम कर्मी के साथ की हाथापाई

Updated at : 08 Aug 2019 9:11 AM (IST)
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प्रशासन व अतिक्रमणकारियों में हुई झड़प, अतिक्रमणकारियों ने निगम कर्मी के साथ की हाथापाई

गया : केपी रोड को अतिक्रमण मुक्त बनाने की कोशिश में लगे जिला व नगर निगम प्रशासन को बुधवार को फजीहत झेलनी पड़ी. केपी रोड में अतिक्रमण हटाने पहुंचे निगम के अधिकारियों के साथ अतिक्रमणकारी भिड़ गये. इतना ही नहीं एक निगम कर्मी के साथ अतिक्रमणकारियों ने हाथापाई भी की. इस दौरान माहौल कुछ देर […]

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गया : केपी रोड को अतिक्रमण मुक्त बनाने की कोशिश में लगे जिला व नगर निगम प्रशासन को बुधवार को फजीहत झेलनी पड़ी. केपी रोड में अतिक्रमण हटाने पहुंचे निगम के अधिकारियों के साथ अतिक्रमणकारी भिड़ गये. इतना ही नहीं एक निगम कर्मी के साथ अतिक्रमणकारियों ने हाथापाई भी की. इस दौरान माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया.

साथ में मौजूद कोतवाली व दूसरे थाने की पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए अतिक्रमणकारियों को खदेड़ दिया. सूचना है कि अतिक्रमणकारियों ने पत्थरबाजी भी की है.

हालांकि केपी रोड में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ जब भी कार्रवाई होती है तो ऐसे हालात अक्सर बन जाते हैं. हद तो यह है कि पिछले कई दशक से केपी रोड को अतिक्रमण मुक्त बनाने की कोशिश की जा रही है. जिसमें फुटपाथी दुकानदारों हर बार हटाया जाता है, लेकिन वह फिर काबिज हो जाते हैं.
बुधवार को जीबी रोड से लेकर केपी रोड व कोतवाली रोड तक अतिक्रमण ड्राइव चलाया गया. इस दौरान साढ़े सात हजार रुपये जुर्माना वसूला गया. इस ड्राइव में उप नगर आयुक्त अजय कुमार, साहेब याहिया, मार्केट शाखा के सहायक रामकृष्ण पिंटू, निशांत कुमार समेत संबंधित थाना की पुलिस मौजूद थी.
केपी रोड की 80 फुट चौड़ी सड़क रह गयी 10 फुट
शहर के अंदर जितनी भी सड़कें हैं, उसमें कुछ सड़कों की चौड़ाई 60 से 80 फुट है. लेकिन अतिक्रमण के कारण इन सड़कों की चौड़ाई घट कर 10 फुट रह गयी है. केपी रोड 80 फुट चौड़ी है. लेकिन इस सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. कोतवाली से सटी यह रोड भदानी कोल्ड स्टोरेज से आगे टिकारी रोड से जुड़ती है. इस दौरान रोड के दोनों ओर सैकड़ों फुटपाथी दुकानों का कब्जा रहता है. पर्व के समय तो इस रोड से गुजरना आफत मोल लेना है.
कुछ ही दिन बाद फिर काबिज हो जाते हैं दुकानदार
केपी रोड से जब भी अतिक्रमणकारियों को खदेड़ा गया है, एक से दो दिनों तक शांत रहने के बाद अतिक्रमणकारी दोबारा काबिज हो जाते हैं. यानी प्रशासन द्वारा जितना समय व मैन पावर इस सड़क को अतिक्रमणमुक्त बनाने में लगाया जाता है वह कुछ दिनों के अंदर ही व्यर्थ चला जाता है. हालांकि अतिक्रमण हटाने के दौरान प्रशासन को हजारों रुपये की आमद हो जाती है.
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