डुमरिया का कालीदह संगम संकट में, प्रदूषण और अवैध बालू उठाव से खतरा

Published by : Suryakant Kumar Updated At : 25 May 2026 3:37 PM

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सुरहर नदी और पकवा नदी का प्रसिद्ध संगम स्थल कालीदह

Gaya Ji News(मनोज मिश्रा): डुमरिया प्रखंड के कालीदह संगम स्थल का अस्तित्व प्रदूषण और अवैध बालू उठाव के कारण खतरे में है. स्थानीय लोगों के अनुसार नदियों में गंदा पानी गिरने और बालू खनन से यह ऐतिहासिक स्थल तेजी से नष्ट हो रहा है. ग्रामीणों ने प्रशासन से संरक्षण की मांग की है.

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Gaya Ji News(मनोज मिश्रा): डुमरिया प्रखंड के मैगरा थाना क्षेत्र में स्थित सुरहर नदी और पकवा नदी का प्रसिद्ध संगम स्थल कालीदह आज अपने अस्तित्व बचाने की जंग लड़ रहा है. कभी सालों भर पानी से भरा रहने वाला यह ऐतिहासिक संगम स्थल अब धीरे-धीरे विलुप्ति के कगार पर पहुंचता जा रहा है. स्थानीय लोगों और जानकारों के अनुसार इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं. वर्षों से नदी में बाढ़ का नहीं आना तथा बालू माफियाओं द्वारा लगातार अवैध बालू उठाव किया जाना.

मैगरा में दोनों नदियों का संगम

बताया जाता है कि सुरहर नदी का उद्गम झारखंड के पलामू जिले से होता है, जबकि पक्व नदी भी पलामू क्षेत्र से निकलकर डुमरिया के मैगरा पहुंचती है. मैगरा में दोनों नदियों का संगम होता है, जिसे कालीदह के नाम से जाना जाता है. एक समय यह स्थल प्राकृतिक सौंदर्य और स्वच्छ जल के लिए प्रसिद्ध था. ग्रामीणों के अनुसार कालीदह में सालों भर पानी जमा रहता था और आसपास का वातावरण काफी मनमोहक हुआ करता था। दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा, सरस्वती पूजा के मौके पर बना प्रतिमा पूजा के बाद इसी नदी में विसर्जन किया जाता रहा है. इतना ही नही आज भी क्षेत्र में धर्मिक अनुष्ठान जैसे मौके पर जलभरी का कार्य होता है.

प्रदूषण और उपेक्षा का शिकार

इतिहास और साहित्य से जुड़े लोगों का कहना है कि राष्ट्रकवि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री भी कालीदह संगम स्थल के किनारे पीपल के पेड़ की छांव में बैठकर कविता और कहानियों की रचना किया करते थे. लेकिन आज वही स्थल प्रदूषण और उपेक्षा का शिकार बन चुका है.

ग्रामीणों का आरोप है कि मैगरा और नारायणपुर बाजार का गंदा नाली का पानी सीधे नदी में गिराया जा रहा है, जिससे नदी का जल पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध बालू उठाव पर रोक लगाने तथा नदी संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि कालीदह का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अस्तित्व बचाया जा सके.

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