गया ने जीता तीन करोड़ का पुरस्कार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Mar 2019 6:12 AM (IST)
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गया : स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कृषि और जल संसाधन, वित्तीय समावेशन, बुनियादी अवसंरचना और कौशल विकास के मामले में पिछड़े जिलों को तेजी से बदलने के लिए चयनित आकांक्षी जिलों में गया जिले ने तीन करोड़ का पुरस्कार जीता है. गया ने जनवरी महीने में स्वास्थ्य और पोषण क्षेत्र में शीर्ष स्थान हासिल किया […]
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गया : स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कृषि और जल संसाधन, वित्तीय समावेशन, बुनियादी अवसंरचना और कौशल विकास के मामले में पिछड़े जिलों को तेजी से बदलने के लिए चयनित आकांक्षी जिलों में गया जिले ने तीन करोड़ का पुरस्कार जीता है. गया ने जनवरी महीने में स्वास्थ्य और पोषण क्षेत्र में शीर्ष स्थान हासिल किया है.
दिसंबर में गया को डेल्टा की रैंक 80 वीं और व्यक्तिगत रूप से स्वास्थ्य और पोषण में 50 वीं रैंक के साथ 103 वें स्थान मिला था. लेकिन तीव्र प्रगति के कारण जनवरी में इस क्षेत्र में विभिन्न संकेतकों में सुधार हुआ है.
जैसे-संस्थागत प्रसव में इजाफा, टीबी रोगियों का पता लगाने का सफल अभियान, जीवित जन्म शिशुओं की संख्या में वृद्धि, टीकाकरण का आच्छादन में बढ़ोतरी और कई अन्य इलाज शामिल हैं. इस महीने गया ने स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में 59.2 का स्कोर बनाया. इसने गया को भारत के आकांक्षी जिलों की सूची में पांचवीं डेल्टा रैंक में डाल दिया है.
इसके फलस्वरूप गया जिला को अब नीति आयोग से तीन करोड़ रुपये के पुरस्कार मिलेंगे. जिलाधिकारी अभिषेक सिंह के मार्गदर्शन में गया ने जिस त्वरित प्रगति के साथ आकांक्षी जिले के टैग से बाहर निकलने के लिए अपना लक्ष्य निर्धारित किया है. इससे स्पष्ट है कि यह जल्द ही देश में एक विकसित जिले का स्थान हासिल करने में सफल होगा.
देश भर में 117 आकांक्षी जिले
गौरतलब है कि कई आयामों पर निर्धारित मानदंड के आधार पर भारत के आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों को आकांक्षी जिले में शामिल किया गया और कई कार्यक्रम बनाये गये हैं, ताकि इनका त्वरित विकास किया जा सके. गया जिला को भी आकांक्षी जिले में रखा गया है, क्योंकि गया जिले का अधिकांश इलाका वामपंथी उग्रवाद प्रभावित है.
इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में जमीनी चुनौतियों का हल निकालना है. आकांक्षी जिला प्रोग्राम की आधारशिला प्रमुख छह मापदंडों-स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कृषि और जल संसाधन, वित्तीय समावेशन, बुनियादी अवसंरचना और कौशल विकास के मामले में पिछड़े जिलों को तेजी से बदलने पर टिका है.
गया की तरह पूरे भारत में अन्य 117 आकांक्षी जिले हैं, जिन्हें नियमित रूप से नीति आयोग द्वारा डैशबोर्ड के माध्यम से पर्यवेक्षण किया जा रहा है. यह चैंपियंस ऑफ चेंज डैशबोर्ड है, जिसके माध्यम से प्रत्येक जिला इन उपरोक्त क्षेत्रों में अपनी मासिक प्रगति अपलोड करता है. हाल ही में प्रगति पर एक प्रकाश डालने के लिए नीति आयोग ने जे आई सी ए फण्ड (जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी) के माध्यम से पुरस्कार प्रणाली के साथ इसे और अधिक प्रतिस्पर्धी बना दिया है.
इस कार्यक्रम के तहत नीति आयोग द्वारा 974 करोड़ रुपये का परिव्यय रखा गया है. इन परिव्यय (600 करोड़) का एक बड़ा हिस्सा जिलों को चुनौती पद्धति पर प्रदान किया जायेगा, जो जिला वृद्धिशील प्रगति के आधार पर गणना की गयी महीने में एक रैंक हासिल करता है, उसे 10 करोड़ रुपये का एक बार आवंटन प्राप्त होगा.
इसी तरह, दूसरी रैंक हासिल करने वाले जिले को पांच करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त होगा और विभिन्न क्षेत्रों में पहली रैंक हासिल करने वाले जिले को कुल पांच क्षेत्रों में तीन-तीन करोड़ रुपये प्राप्त होंगे.
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