गया : सामुदायिक भवन के बाहर ही निगम के कर्मचारी करते हैं कचरा डंप

Updated at : 08 Feb 2019 8:05 AM (IST)
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गया  : सामुदायिक भवन के बाहर ही निगम के कर्मचारी करते हैं कचरा डंप

गया : शहर के वार्ड नंबर 27 के धनिया बगीचा मुहल्ले में लाखों रुपये की लागत से बने सामुदायिक भवन का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है. सामुदायिक भवन के आगे कचरे का अंबार व बजबजाती नालियां यहां की शोभा को कलंकित कर रही हैं. इसके लिए जनप्रतिनिधि व स्थानीय लोग एक-दूसरे को […]

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गया : शहर के वार्ड नंबर 27 के धनिया बगीचा मुहल्ले में लाखों रुपये की लागत से बने सामुदायिक भवन का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है. सामुदायिक भवन के आगे कचरे का अंबार व बजबजाती नालियां यहां की शोभा को कलंकित कर रही हैं. इसके लिए जनप्रतिनिधि व स्थानीय लोग एक-दूसरे को जिम्मेदार बताते हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि 2016 से 52 लाख रुपये की लागत से बनने वाले सामुदायिक भवन में लाइट, पेयजल व शौचालय की व्यवस्था अब तक नहीं हो पायी है. इतना ही नहीं अंदर का काम भी अब तक पूरा नहीं किया जा सका है. सामुदायिक भवन के एक दरवाजे पर बजबजाती नाली व दूसरे पर कूड़े का अंबार लगा हुआ है.

लोगों ने बताया कि वार्डों से कचरा उठा कर नगर निगम के सफाई कर्मचारी सामुदायिक भवन के सामने डाल देते हैं. सरकार ने धनिया बगीचा मुहल्ले को विकसित श्रेणी में लाने के लिए एक प्राइवेट एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी थी. लेकिन, यहां हर काम में सिर्फ खानापूर्ति ही की गयी है. अधिकारी भी शिकायत करने पर सिर्फ अब तक जांच की ही बात करते रहे हैं.

लोग व जनप्रतिनिधि एक-दूसरे को ठहरा रहे हैं जिम्मेदार
वार्ड का क्षेत्रफल बहुत बड़ा है, इसके बाद भी यहां पर महज नौ सफाई कर्मचारी ही दिये गये हैं. सफाई कर्मचारियों की मॉनीटरिंग करने में वार्ड जमादार सहयोग नहीं करते हैं.
कभी भी वार्ड में वह सफाई कर्मचारियों के साथ मौजूद नहीं रहते हैं. ऐसे जहां तक सामुदायिक भवन के कचरा फेंकने का मामला है, इसके लिए स्थानीय लोग ही जिम्मेदार हैं. घरों से कचरा निकाल कर सामुदायिक भवन के सामने ही फेंक देते हैं. वार्डों का कचरा जमा करने के लिए थाने के बगल में डंपिंग प्वाइंट बनाया गया है. ऐसे, निगम से मिल रहे संसाधनों के अनुसार वार्ड में काम कराया जा रहा है
आशा देवी, पार्षद, वार्ड 27
अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक ने विकास के नाम यहां सिर्फ लूट की है. सरकार से मिली योजनाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गयी है. यहां के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं
आशा देवी
सामुदायिक भवन बना पर बगल व सामने नाला बहता है. साथ ही नगर निगम के कर्मचारी कचरा कलेक्शन करके सामुदायिक भवन के सामने ही फेंक देते हैं. लोगों का जीना मुहाल हो रहा है
शारदा देवी
कचरा व नाले का दुर्गंध वाला पानी से घर के बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. थोड़ी बारिश में भी गंदा पानी घर के अंदर पहुंच जाता है. कई पार्षद बदले पर यहां की हालत नहीं सुधर सकी
रेणु देवी
सफाई कर्मचारी निगम से बहुत कम ही इस मुहल्ले में आते हैं. कभी-कभी पार्षद प्रतिनिधि यहां पहुंचते हैं. उनसे शिकायत करने पर सिर्फ आश्वासन मिलता है. कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी है
अनीता देवी
लोग नारकीय जीवन व्यतीत कर रहे हैं, इसकी चिंता प्रतिनिधि को नहीं है. अधिकारी से नाला बनाने व कचरा डंप करने के लिए दूसरी जगह चयनित करने को लेकर आग्रह किया. लेकिन, सुनवाई नहीं हुई
अशोक साव
हर जगह गंदगी व बजबजाती नाली ही मुहल्ले की पहचान बन गयी है. कई बार लोगों ने इस स्थिति को लेकर नगर आयुक्त व वार्ड पार्षद को आवेदन दिया. लेकिन, अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है
पंकज कुमार
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