सुरक्षा का यह कैसा इंतजाम बिना जांच ही आ-जा रहे लोग, पिछले साल मेले के दौरान पकड़े गये थे दो आतंकी

Updated at : 28 Sep 2018 5:56 AM (IST)
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सुरक्षा का यह कैसा इंतजाम बिना जांच ही आ-जा रहे लोग, पिछले साल मेले के दौरान पकड़े गये थे दो आतंकी

गया : सुरक्षा काे लेकर गया व बाेधगया हाई रिस्क जाेन है, पर हाई अलर्ट पर नहीं. गया व बाेधगया हिंदू व बाैद्ध धर्मावलंबियाें का विश्वविख्यात धार्मिक केंद्र हाेने की वजह से आतंकियाें के निशाने पर भी है. यह खुफिया रिपाेर्ट है. ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में हमेशा चूक यह जताता है कि इतने महत्वपूर्ण […]

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गया : सुरक्षा काे लेकर गया व बाेधगया हाई रिस्क जाेन है, पर हाई अलर्ट पर नहीं. गया व बाेधगया हिंदू व बाैद्ध धर्मावलंबियाें का विश्वविख्यात धार्मिक केंद्र हाेने की वजह से आतंकियाें के निशाने पर भी है. यह खुफिया रिपाेर्ट है. ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में हमेशा चूक यह जताता है कि इतने महत्वपूर्ण स्थान के बावजूद हम कितने संवेदनहीन हैं.
बाेधगया में आतंकियाें के बम प्लांट के बाद सीरियल बम विस्फाेट, फिर बम प्लांट आैर पितृपक्ष मेला महासंगम के दाैरान ही आतंकियाें के पकड़े जाने जैसी कई ऐसी घटनाएं इस बात के गवाह हैं कि गया व बाेधगया आतंकियाें के निशाने पर हैं. ताज्जुब ताे इस बात की है कि पिछले ही साल पितृपक्ष के दाैरान 14 सितंबर काे मेला क्षेत्र यानी राजेंद्र आश्रम मुहल्ले में सड़क पर स्थित एक साइबर कैफे तक पहुंच आतंकवादी ताैसीफ व सना खां गतिविधियाें में लगे थे.
यह ताे तीर्थयात्रियाें का भला था कि तब साइबर कैफे वाले ने ही उनकी गतिविधि भांप ली आैर उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया. आैर बाद में पुलिस अपनी पीठ थपथपवाती रही. इन सब के बावजूद हम रुख करते हैं गया रेलवे स्टेशन की तरफ जहां से हजाराें की संख्या में हर राेज पितृपक्ष के इस माैके पर तीर्थयात्रियाें का गया शहर में आने-जाने का सिलसिला जारी है.
कब-कब आतंकियों ने की सेंधमारी
अब हम बात करते हैं गया व बाेधगया में आतंकी गतिविधियों की. सात जुलाई 2013. शायद बाेधगया के लिए वह काला दिन रहा, जब आतंकियाें के बिछाये बारूदी जाल में उसकी सांसें अटक गयीं. बाेधगया महाबाेधि मंदिर से 80 फुट बुद्ध मूर्ति व कालचक्र मैदान तक कई जगहाें पर सीरियल बम प्लास्ट हुए. शुक्र था इसकी जद में काेई न आया? लेकिन, बम के धमाके पूरी दुनियां तक सुनाई पड़ी आैर सैलानियाें की संख्या घट गयी.
14 सितंबर 2018 जब पितृपक्ष के माैके पर पितृपक्ष मेला महासंगम क्षेत्र में राजेंद्र आश्रम मुहल्ले से दाे आतंकी पकड़े गये. उनकी निशानदेही पर डाेभी के करमाैनी से एक आैर व नाला राेड सहित अन्य जगहाें से दाे आैर आतंकी पकड़े गये. ये यहां पर स्लीपर सेल का काम कर रहे थे. ताैसीफ वर्षाें से यहां रह रहा था आैर अलग-अलग ठिकाने पर स्लीपर सेल के सदस्य बनाता रहा. यह बात उसने पुलिस के समक्ष स्वीकारी भी है.
ऐसे में इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि यहां आतंकी गतिविधियाें में शामिल आैर नहीं हाेंगे जाे गुपचुप तरीके से आतंकी संगठनाें के आलाकमान तक यहां की गतिविधि की जानकारी न दे रहे हाेंगे? इतने के बाद भी पुलिस नहीं जागी. बाेधगया में 19 जनवरी 2018 काे प्लांट किये बम 15 सितंबर काे तब मिला जब पकड़े गये आतंकी ने यह भेद पुलिस के समक्ष खाेला. यानी करीब नाै महीने तक यह बाेधगया की काेख में रहा. नाै महीने में शिशु का जन्म हाे जाता है.
कहीं नाै महीने का इंतजार ताे नहीं हाे रहा था, कि आतंकी इसे विस्फाेट कराते. नाै महीने के अंदर पुलिस काे इसकी भनक तक नहीं लगी. ये तमाम सबूत इस बात के गवाह हैं कि हाइ रिस्क जाेन हाेने के बाद भी पुलिस सतर्कता नाकाफी है. पितृपक्ष मेले में गयाजी में देश-दुनिया के लाेग आये हैं. ऐसे में पुलिस सतर्कता से ज्यादा खुफिया तंत्र का मजबूत हाेना ज्यादा जरूरी है.
स्टेशन कैंपस में कई दरवाजे, पर एक में ही लगा है मेटल डिटेक्टर
गया रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक पर बाहरी निकास व प्रवेश के लिए तीन दरवाजे बने हैं. बीच वाले दरवाजे में तो मेटल डिटेक्टर लगा है, लेकिन यह किस काम का. कारण बगल के दाे दरवाजे फ्री हैं. मेटल डिटेक्टर वाले रास्ते से काेई आता-जाता भी नहीं. स्टेशन की सुरक्षा में लगे पुलिस के जवान भी वहां तैनात नहीं रहते.
दाे रास्ते जाे फ्री हैं, उन्हीं से लाेग आते-जाते हैं. ऐसे में इस मेटल डिटेक्टर के हाेने का क्या मतलब? ऐसे में कभी भी काेई भी आतंकी रेलवे के माध्यम से शहर में प्रवेश पा जायेगा. वैसे आने के तमाम रास्ते हैं. पर जब सुरक्षा के दृष्टिकाेण से इस पर खर्च किया ही गया, ताे फिर इसे पुख्ता क्याें नहीं किया गया. रेलवे स्टेशन कैंपस में ही आने-जाने के कई रास्ते खुले हैं, जिससे लाेग आसानी से आ-जा सकते हैं.
कहीं काेई चेकिंग नहीं? इस संबंध में जब रेल डीएसपी सुनील कुमार से बातचीत की गयी, ताे उन्हाेंने कहा रेलवे प्रशासन ने कई दरवाजे खाेल रखे हैं. कहां-कहां पहरे लगाये जायें? एक मेटल डिटेक्टर हाेने का काेई लाभ ताे सही मायने में नहीं है. उसकी ताे मॉनीटरिंग भी नहीं हाे पाती. आैर शायद सुनील कुमार ने सच ही कहा कि रास्ते कई हैं.
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