तीन महीने से रोज लेट आ-जा रही है दून एक्सप्रेस
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Jul 2018 4:38 AM
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गया : एक तरफ रेलवे देश में बुलेट व हाइस्पीड ट्रेनें चलाने की योजना पर काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर दून एक्सप्रेस व गंगा-सतलज एक्सप्रेस ट्रेन अपने निर्धारित समय से हर दिन पांच से छह घंटे लेट रही हैं. यह नजारा गया रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन देखने को मिल रहा है. अाखिर कब […]
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गया : एक तरफ रेलवे देश में बुलेट व हाइस्पीड ट्रेनें चलाने की योजना पर काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर दून एक्सप्रेस व गंगा-सतलज एक्सप्रेस ट्रेन अपने निर्धारित समय से हर दिन पांच से छह घंटे लेट रही हैं. यह नजारा गया रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन देखने को मिल रहा है. अाखिर कब तक ट्रेनों की लेटलतीफी खत्म होगी. आये दिन संरक्षा अधिकारी, मंडल रेल प्रबंधक व मुख्य परिचालन प्रबंधक द्वारा कहा जाता है कि ट्रेनों का परिचालन समय से हो.
लेकिन, ऐसा कुछ होता नहीं है. रेलवे रिपोर्ट के अनुसार, तीन महीनों से दून एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर गया रेलवे स्टेशन से नहीं खुली है. इस कारण रेलयात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. पिछले तीन महीनों से ट्रेनों की लेटलतीफी का आलम यह है कि यात्री तो अब ट्रेन से सफर करना ही नहीं चाहते हैं. यही कारण है कि रेलवे के राजस्व में कमी आयी है. अब रेलयात्री पटना, दिल्ली व कोलकाता जाने के लिए शहर से खुलनेवाली बसों का सहारा ले रहे हैं और उन्हें ही ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
दून से सफर करना है, टाइम जरूर जानें अगर आप लोगों को दून एक्सप्रेस से सफर करना है, तो एक बार टाइम को जरूर जानें. दून पिछले तीन महीनों से टाइम पर नहीं आयी है. रेलयात्री दून एक्सप्रेस का इंतजार करते-करते प्लेटफॉर्म व प्रतीक्षालय में जाकर सो जाते हैं. रेलवे के अधिकारियों की ओर से कहा जाता है कि दो-तीन घंटे लेट आयेगी. लेकिन, दो-तीन घंटे इंतजार करने के बाद भी दून एक्सप्रेस नहीं आती है.
ट्रेनों के लेट के कारण राजस्व में आयी है कमी ट्रेनों के लेट के कारण रेलवे के राजस्व में कमी आयी है.राजधानी से लेकर एक्सप्रेस ट्रेन लेट चल रही हैं. राजधानी तो कभी-कभी लेट आती है. लेकिन, एक्सप्रेस, मेल व पैसेंजर ट्रेनों की बात करें तो ये समय पर आती ही नहीं हैं. कुछ ट्रेनों को छोड़ कर अधिकतर ट्रेनें अपने निर्धारित समय से लेट आती हैं.
इस कारण रेलवे के राजस्व में कमी आयी है. रेलवे अधिकारियों के रिपोर्ट के अनुसार, 2016 -17 में सवारी- 81 लाख 29 हजार 557 व आय 54 करोड़ 28 लाख 30 हजार 346 है. वहीं 2017-18 में सवारी- 78 लाख 93 हजार 970 व आय 53 करोड़ 74 लाख 75 हजार 207 है.
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