आयुक्त कार्यालय पर फैसला करने का लोक शिकायत में प्रावधान नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Mar 2018 3:41 AM (IST)
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तालाब पर अतिक्रमण कर आयुक्त कार्यालय बनाने की की गयी थी शिकायत गया : मगध प्रमंडल आयुक्त कार्यालय के सभागार में मंगलवार को लोक शिकायतों की सुनवाई की गयी. तालाब पर अतिक्रमण कर बनाये गये आयुक्त कार्यालय के मामले में आयुक्त जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि संवैधानिक स्तर पर इसके लिए लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी […]
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तालाब पर अतिक्रमण कर आयुक्त कार्यालय बनाने की की गयी थी शिकायत
गया : मगध प्रमंडल आयुक्त कार्यालय के सभागार में मंगलवार को लोक शिकायतों की सुनवाई की गयी. तालाब पर अतिक्रमण कर बनाये गये आयुक्त कार्यालय के मामले में आयुक्त जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि संवैधानिक स्तर पर इसके लिए लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी फैसला लेने में सक्षम नहीं हैं. इस तरह के मामले न्यायालय के स्तर पर सुलझाये जा सकते हैं. तालाब अतिक्रमण कर आयुक्त कार्यालय बनाने के मामले को लेकर समाजसेवी बृजनंदन पाठक ने चार जनवरी 2018 को लोक शिकायत निवारण केंद्र में अपील की थी. इस मामले की सुनवाई करते हुए आयुक्त ने सदर अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार जायसवाल से पक्ष रखने को कहा.
श्री जायसवाल ने नियमों व संविधान का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह के मामले लोक शिकायत परिवाद की श्रेणी में शामिल नहीं हैं. इस मामले में न्यायालय स्तर पर ही निर्णय लिया जा सकता है. इस पर आयुक्त ने श्री पाठक से अपना पक्ष रखने को कहा. श्री पाठक ने अपना पक्ष रखते हुए हवाला दिया कि लोक शिकायत निवारण केंद्र में अतिक्रमण के मामले को भी लाये जाने का प्रावधान है. इससे पूर्व भी अतिक्रमण हटाने का फैसला लोक शिकायत निवारण केंद्र द्वारा किया जा चुका है.
इस पर आयुक्त श्री श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह के मामले में नगर आयुक्त को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था, न कि फैसला लिया गया. इस पर श्री पाठक ने कहा कि अनुमंडल पदाधिकारी को अतिक्रमण हटाने व नगर आयुक्त को पुनः तालाब निर्माण कराने का निर्देश दिया जाये. इस पर आयुक्त श्री श्रीवास्तव ने अपना अंतिम फैसला सुरक्षित रखते हुए इस कार्यवाही को बंद कर दिया.
12 मामलों में हुई सुनवाई
गया. लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत आयुक्त जितेंद्र श्रीवास्तव ने कुल 12 वादों में सुनवाई की. इनमें 11 अपील के व एक अनुपालन के मामले शामिल थे. अपीलकर्ता कुंदन कुमार के मामले में गया के जिला खनन पदाधिकारी, खिजरसराय के सीआे व थानाध्यक्ष की काफी खिंचाई हुई. कुंदन कुमार ने खिजरसराय में संचालित सत्यम ईंट भट्ठा के विरुद्ध सरकारी जमीन का उपयोग करने की शिकायत की थी. सीआे ने रिपाेर्ट की कि सत्यम द्वारा पांच एकड़ 20 डिसमिल जमीन का उपयोग ईंट बनाने के लिए किया जा रहा था,
जिसे बंद करा दिया गया है. सत्यम कुमार, कुंदन कुमार ने बताया कि सत्यम ईंट भट्ठा जो पूर्व में तमन्ना ब्रिक्स के नाम से चलता था, दोनों एक ही मालिक गणेश कुमार का है. जब तमन्ना ब्रिक्स पर अवैध ईंट भट्ठा संचालित करने के लिए कार्यवाही हुई तो वह नाम बदल कर सत्यम ईट भट्ठा के नाम से फिर से संचालित किया गया. आवेदक ने कई गंभीर आरोप लगाये, जिस पर आयुक्त ने सुनवाई करते हुए तीनों
पदाधिकारियों की खिंचाई की. उन्होंने खनन विभाग के सहायक निदेशक से जवाब-तलब किया है कि खान निरीक्षक द्वारा जब आठ फरवरी 2018 को यह सत्यापित किया गया था कि भट्ठा अवैध रूप से चल रहा है तो किन परिस्थितियों में कोई कार्रवाई नहीं की गयी.
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