चैती छठ : देवघाट में नहीं मिला 12 फुट में पानी

Published at :21 Mar 2018 3:40 AM (IST)
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चैती छठ : देवघाट में नहीं मिला 12 फुट में पानी

हर दिन घाटों पर साफ सफाई के लिए 120 मजदूर 24 मार्च को डूबते सूर्य को दिया जायेगा अर्घ गया : फल्गु में पानी नहीं है. चैती छठ में अर्घ देने के लिए नगर निगम की ओर से विभिन्न घाटों पर कुंड खुदाई व साफ-सफाई का काम नहीं शुरू किया जा सका है. मंगलवार को […]

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हर दिन घाटों पर साफ सफाई के लिए 120 मजदूर

24 मार्च को डूबते सूर्य को दिया जायेगा अर्घ
गया : फल्गु में पानी नहीं है. चैती छठ में अर्घ देने के लिए नगर निगम की ओर से विभिन्न घाटों पर कुंड खुदाई व साफ-सफाई का काम नहीं शुरू किया जा सका है. मंगलवार को देवघाट में कुंड खुदाई के लिए 12 फुट तक गड्ढा खोदा गया, लेकिन यहां पानी नहीं मिल सका. शनिवार को बोर्ड की बैठक में छठ घाटों की तैयारी के लिए विस्तार से चर्चा की गयी. सफाई प्रभारी ने छठ की तैयारी का खाका प्रस्तुत किया था, लेकिन अब तक सिर्फ एक जगह कुंड खुदाई के अलावा कुछ नहीं किया गया है.
निगम कार्यालय सूत्रों के अनुसार, हर दिन घाटों पर साफ-सफाई के लिए 120 मजदूर लगाये गये हैं. घाटों पर तैयारी को देखकर साफ लगता है कि कागज पर ही मजदूर लगाये जा रहे हैं. 24 मार्च को डूबते सूर्य को अर्घ दिया जाना है. शाम व सुबह का अर्घ व्रतियों द्वारा विभिन्न घाटों पर दिया जाता है. अधिकारी स्तर पर घाटों का निरीक्षण एक बार भी नहीं किया गया है. इधर इस संबंध में मेयर वीरेंद्र कुमार ने बताया कि छठ घाटों पर तैयारी का आदेश पिछली बैठक में ही दे दिया गया है. तैयारी का जायजा लेने बुधवार को घाटों पर जायेंगे. थोड़ी भी तैयारी में कमी पायी गयी, तो तुरंत दूर किया जायेगा.
छठी मइया के साथ सूर्य की उपासना
ती छठ व्रत का नहाय-खाय 21 मार्च बुधवार काे, लाेहंडा (खरना) 22 मार्च काे, छठ व्रत का उपवास व सायंकालीन पहला अर्घ 23 मार्च काे, शनिवार की सुबह यानी 24 मार्च काे उगते हुए सूर्य काे अर्घदान व पारण के साथ चैती छठ व्रत का समापन हाे जायेगा.
भविष्याेत्तर पुराण के अनुसार इस सूर्याेपासना महापर्व की शुरुआत मगध क्षेत्र में ही च्यवनाश्रम देवकुंड के सराेवर पर हुई थी. यह सराेवर आैरंगाबाद के देवकुंड स्थित च्यवन ऋषि के आश्रम परिसर में है. च्यवन ऋषि की पत्नी सुकन्या ने नागकन्या के उपदेश से छठ व्रत द्वारा नेत्रहीन पति काे नेत्रवान बना दिया था.
वृद्ध च्यवन ऋषि युवक हाे गये थे. देवी भागवत महापुराण के अनुसार सूर्य भगवान के साथ षष्ठी माता (छठी मइया) की भी उपासना की जाती है. शंकर भगवान के पुत्र कार्तिकेय की पत्नी देवसेना काे छठी मइया कहा जाता है.
यह स्वरूप दुर्गा के नाै स्वरूपाें में छठा है. अत: सूर्याेदयकालीन षष्ठी तिथि काे सायंकालीन पहला अर्घ प्रदान किया जाता है. सूर्याेदय कालीन सप्तमी तिथि सूर्य की प्रिय तिथि है. इस तिथि काे सूर्य का प्रात:कालीन दूसरा अर्घ प्रदान किया जाता है. दाेनाें अर्घ सूर्य किरण की लालिमा में षष्ठी माता की भावना करके दिया जाता है.
यह उपासना सूर्य व षष्ठी की संयुक्त उपासना है. शिशु काे दीर्घायु करनेवाली माता षष्ठी देवी है व धन-आरोग्य देनेवाले सूर्य भगवान हैं. देवी भागवत में वर्णन है कि
राजा प्रियव्रत के मृत पुत्र काे छठी मइया ने जीवित कर दिया था.
मगध नरेश जरासंघ के पूर्वज
छठ व्रत द्वारा कुष्ठ राेग से मुक्त
हाे गये थे.
आचार्य लालभूषण मिश्र ‘याज्ञिक’
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