रोड एक्सीडेंट व मारपीट के दर्ज हुए 41% मामले
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Mar 2018 4:16 AM (IST)
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होली के त्योहार में मगध मेडिकल का आंकड़ा रोड एक्सीडेंट के 26 व मारपीट के 64 मामले गया : होली के दौरान मगध मेडिकल काॅलेज अस्पताल में 41 प्रतिशत मामले रोड एक्सीडेंट व मारपीट के दर्ज हुए हैं. दो व तीन मार्च को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कुल 219 मरीज पहुंचे. दो मार्च को […]
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होली के त्योहार में मगध मेडिकल का आंकड़ा
रोड एक्सीडेंट के 26 व मारपीट के 64 मामले
गया : होली के दौरान मगध मेडिकल काॅलेज अस्पताल में 41 प्रतिशत मामले रोड एक्सीडेंट व मारपीट के दर्ज हुए हैं. दो व तीन मार्च को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कुल 219 मरीज पहुंचे. दो मार्च को 102 व तीन मार्च को 117 मामले पहुंचे. इमरजेंसी वार्ड में दर्ज रिकाॅर्ड के मुताबिक कुल 219 मामले में 26 मामले रोड एक्सीडेंट अौर 64 मामले मारपीट के हैं. इनमें से कितने की मौत हुई है यह आंकड़ा फिलहाल स्पष्ट नहीं है. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा केवल मगध मेडिकल काॅलेज का है. सूत्रों की मानें तो मेडिकल काॅलेज में आये अधिकतर मामले शराब पीने की वजह से ही बताये गये हैं.
लेकिन, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गयी है. सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं के लिए काम कर रही संस्था युवा प्रयास के अध्यक्ष कौशलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि होली के दौरान रोड एक्सीडेंट और मारपीट की घटनाएं बढ़ी हैं तो यह गंभीर मसला है. इस पर सोचने की जरूरत है. सरकारी तंत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी ने शराब पीने और बेचने वालों पर पकड़ ढीली कर दी है. इससे पीने व बेचने वालों को राहत मिल गयी होगी. संस्था लंबे समय से इन विषयों पर काम कर रही है. होली त्योहार हर साल लगभग मार्च महीने में ही आता है. इस त्योहार के दौरान रोड एक्सीडेंट व मारपीट के मामले काफी आते हैं. कारण होता है शराब.
वैकल्पिक व्यवस्था पर चल रहा घायलों का इलाज
स्थिति यह है कि अस्पताल में मरीजों को रखने के लिए जगह कम पड़ गयी है. सर्जरी वार्ड के सभी बेड फुल होने की वजह से मरीजों को दूसरे विभाग के वार्डों में शिफ्ट किया जा रहा है. अस्पताल अधीक्षक डाॅ सुधीर कुमार सिन्हा के मुताबिक मेडिसिन, आॅर्थो व दूसरे विभाग के वार्ड में जहां भी बेड खाली है, वहां मरीजों को शिफ्ट किया जा रहा है. प्रबंधन के सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों को मरीजों के ट्रीटमेंट की माॅनीटरिंग करने को कहा गया है. मरीजों की संख्या अधिक होने की वजह से विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
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