बिहार में इस फसल की खेती कर किसान महज 5 माह में कमा रहे ढ़ाई लाख रुपये, सरकार खेती के लिए दे रही अनुदान
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 20 Sep 2022 6:04 AM
Bihar news: भागलपुर उद्यान विभाग की मानें तो जिले में लगातार प्रगतिशील किसान नया प्रयोग कर रहे हैं और विभाग भी उन्हें प्रोत्साहित कर रहा है. उद्यान विभाग के सहायक निदेशक विकास कुमार ने बताया कि पपीता, स्ट्राबेरी, मशरूम समेत अन्य महंगी सब्जी व फल की खेती के लिए किसानों को बढ़ावा दिया जा रहा है.
भागलपुर, दीपक राव: पपीता, जुकनी, स्ट्राबेरी के बाद अब जिले के नाथनगर अंतर्गत कजरैली के प्रगतिशील किसान गुंजेश गुंजन ने बड़े पैमाने पर कंटोला-ककोरी की खेती को व्यावसायिक बनाने का सफल प्रयोग किया. ऐसे में पहली बार भागलपुर ककोरी की खेती के लिए उपयुक्त साबित हुआ. कंटोला-ककोरी की खेती को व्यावसायिक खेती में बदलने का काम शुरू हो गया. कंटोला की खेती किसानों को कम बारिश में आर्थिक रूप से समृद्ध करने में संजीवनी साबित होगी.
उद्यान विभाग की मानें तो जिले में लगातार प्रगतिशील किसान नया प्रयोग कर रहे हैं और विभाग भी उन्हें प्रोत्साहित कर रहा है. उद्यान विभाग के सहायक निदेशक विकास कुमार ने बताया कि पपीता, स्ट्राबेरी, मशरूम समेत अन्य महंगी सब्जी व फल की खेती के लिए किसानों को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी क्रम में ककोरी की खेती की जानकारी मिली है. विभाग की ओर से किसानों की आय बढ़ाने वाली खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास जारी है.
आयुर्वेद चिकित्सक डाॅ राधेश्याम अग्रहरि ने बताया कि ककोरी-कंटोला इम्युनिटी बढ़ाने वाला फल है. इसमें सभी तरह के पोषक तत्व होते हैं. ककोरी को स्थानीय भाषा में कंटोला भी कहते हैं. इसमें पाये जाने वाले पोषक तत्वों में कई स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने की क्षमता होती है. कंटोला में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, फाइबर, बहुत से खनिज पाए जाते हैं. इसके अलावा ककोरी में एस्कॉर्बिक एसिड, कैरोटीन, थियामिन, रिबोफ्लेविन और नियासिन जैसे आवश्यक विटामिनों की कम मात्रा उपस्थित रहती है. इन सभी पोषक तत्वों की मौजूदगी के कारण यह हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. विटामिन ए, बी, सी, इ, के के अलावा मिनरल में पोटाशियम, कैल्सियम, मैग्निज पाया जाता है. साथ ही एंटी कैंसर, पाचन तंत्र को मजबूत करता है. उन्होंने बताया कि इसके सेवन से डायबिटीज कंट्रोल किया जा सकता है. साथ खून प्रवाह, बवासीर, पथरी की समस्या को दूर करता है एवं आंखों को स्वस्थ रखता है.
एक एकड़ में 8000 पौधे लगा सकते हैं. कंटोला की खेती में 75000 से 80000 तक खर्च आते हैं. इसमें 8000 पौधा खरीदने पर 16000 खर्च आता है, जबकि 4000 रुपये प्रति किलो बीज में खर्च आता है. एक किलो बीज में 2000 पोधे तैयार हो सकते हैं. ये बीज झारखंड, बंगाल समेत अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में मिलते हैं. एक एकड़ खेती में पांच माह में ढाई लाख रुपये तक खर्च काट कर आमदनी हो जाती है. एक किलो ककोरी थोक में 60 से 70 किलो में खेत से बिक्री हो जाती है, जबकि यह खुदरा में 100 से 120 रुपये किलो तक बिक्री होती है.
लगातार कई वर्षों से उत्कृष्ट किसान गुंजेश गुंजन कृषि विभाग की ओर से पपीता की खेती में प्रथम पुरस्कार जीत रहे हैं. यहां तक खुद पूर्व कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने भी अपने हाथों पुरस्कृत किया है. वे अपने खेतों में इंडोनेशिया, ताइवान, थाइलैंड व आस्ट्रेलिया के पपीता को लगा चुके हैं. इसी क्रम में जुकनी, स्ट्राबेरी की भी सफल खेती कर चुके हैं.
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