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Diwali 2022: मिठाइयों में मिलावट की आशंका अधिक, यहां देखें कलाकंद से लेकर बरफी तक का एक्सपायरी डेट

Updated at : 23 Oct 2022 1:00 PM (IST)
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Diwali 2022: मिठाइयों में मिलावट की आशंका अधिक, यहां देखें कलाकंद से लेकर बरफी तक का एक्सपायरी डेट

Diwali 2022: अभी त्योहार का सीजन चल रहा है. इसको लेकर बाजार में मिठाइयों मांग बढ़ गई है. वहीं, मिठाइयों की बढ़ती मांग को देखते हुए मिठाइयों में मिलावट की आशंका अधिक है. इसलिए जांच के बाद ही मिठाइयों की खरीदारी करें.

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पटना. त्योहार के मौसम में मिठाई की मांग बढ़ जाती है. ऐसे में मिलावट की आशंका अधिक रहती है. खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी कहते हैं कि नियम के तहत हर खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी कहते हैं कि उत्पाद पर एक्सपायरी तिथि होनी चाहिए. पटना में दीवाली पर मांग बढ़ने के साथ नकली मिठाइयों की आमद शुरू हो चुकी है. दुकानों के काउंटरों में चांदी-सी चमकती मिठाइयों की वैरायटी है. लेकिन कुछ दुकानदार इस आड़ में पुरानी मिठाई तो कुछ नकली मिठाई बेच रहे हैं. शहर के अधिकांश दुकानों पर छापेमारी भी नहीं हुई है.

दो साल पहले ही भारतीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने जारी किया था नियम

दुकानों पर मिठाइयों की एक्सपायरी डेट को लिखने का नियम दो साल पहले भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने जारी किया था. खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम लोगों के स्वास्थ्य के खतरों को देखते हुए दिशा निर्देश जारी किया. अगर उसमें जरा भी खट्टापन या बदबू आ रही है, तो उसे न खरीदें. खासकर रंग लगी हुई मिठाई को खरीदने से बचें.

विभाग ने बताया, कितने दिन चलती हैं मिठाइयां

एक दिन : कलाकंद, बटरस्कॉच, चॉकलेट कलाकंद, रोस कलाकंद

दो दिन : बादाम दूध, रसगुल्ला, रस मलाई, रबड़ी, रस्कदम, गुड़ की मिठाई, रस माधुरी

चार दिन : मलाई वाला घेवर, मेवा लड्डू, मिल्क केक, पिस्ता बर्फी, कोकोनट बर्फी, सफेद पेड़ा, बूंदी लड्डू, कोकोनट लड्डू, बेसन का मगदल, मोतीचूर मोदक, खोया बादाम, मोवा बट्टी, फ्रूट केक, खोया फ्रूट केक, पिंक बरफी, केसर बादाम रोल

सात दिन : ड्राइ फ्रूट्स लड्डू, काजू कतली, घेवर, शक्करपारा, मूंग बफ्री, आटा लड्डू, गुजिया, मोटी बूंदी लडू, काजू केसर बरफी, चंद्रकला, मैदा गुजिया, पेठा, केसर का घेवर आदि.

चांदी की चमक देखकर हर दिन 50 किलो जस्तावर्क खा रहा पटना

असली व सही चांदी वर्क बनाने वाले कारोबारियोंं के मुताबिक वर्तमान में दुकानों पर बिक रही सस्ती मिठाइयों पर चमकता वर्क चांदी नहीं, जस्ता है. पटना में रोजाना करीब 50 किलो जस्ता वर्क खाया जा रहा है, जो त्योहार में कई गुना बढ़ चुकी है. असली चांदी के 100 वर्क का पैकेट करीब 350 रुपये का आता है, जबकि पटना सिटी में बनने वाला जस्ता वर्क का पैकेट 50 से 60 रुपये में ही मिल जाता है. सस्ता और दिखने वाला असली की तरह दिखने वाला यह आइटम खोया, बरफी, काजू कतली में इस्तेमाल होता है. जबकि डॉक्टरों का कहना है कि नकली या जस्ता वर्क के सेवन से किडनी, लिवर व पाचन तंत्र खराब हो जाता है.

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