उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बिहारकी बेटियों ने ऊंची लगायी छलांग, जानिये मंत्री संजय झा ने क्या बताया कारण

Updated at : 12 Jun 2021 12:09 PM (IST)
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राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क सह जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने शुक्रवार को कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कुशल नेतृत्व में बिहार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शानदार प्रगति की है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी रिपोर्ट ‘ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन 2019-20‘ (एआइएसएचइ) ने बिहार की प्रगति पर अपनी मुहर लगायी है.

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पटना. राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क सह जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने शुक्रवार को कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कुशल नेतृत्व में बिहार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शानदार प्रगति की है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी रिपोर्ट ‘ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन 2019-20‘ (एआइएसएचइ) ने बिहार की प्रगति पर अपनी मुहर लगायी है.

मंत्री संजय कुमार झा ने कहा कि 2005 से पहले बिहार के कॉलेजों में लड़कियों की संख्या बेहद कम होती थी. उस दौर को जानने वाले लोगों को यह नया तथ्य हैरान कर सकता है कि अब स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी छात्रों और छात्राओं की संख्या के बीच बहुत कम अंतर रह गया है.

एआइएसएचइ के मुताबिक, सत्र 2019-20 में बिहार में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में कुल एक लाख 20 हजार 941 विद्यार्थी नामांकित थे, जिनमें 61 हजार 287 छात्र, जबकि 59 हजार 654 छात्राएं थीं. पिछले पांच वर्षों के दौरान स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी छात्रों और छात्राओं की संख्या के बीच अंतर लगातार कम हुआ है.

राज्य का उच्च शिक्षा में शानदार प्रदर्शन : संजय झा

मंत्री संजय झा ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब सत्ता संभाली थी, तो राज्य में ज्यादातर लड़कियां हाइस्कूल पहुंचने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देती थीं. नीतीश कुमार ने साइकिल और पोशाक जैसी क्रांतिकारी योजना की शुरुआत की, जिससे मैट्रिक परीक्षा में लड़कों और लड़कियों की संख्या का फासला लगातार कम होने लगा. फिर उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत इंटर और ग्रेजुएशन पास करने वाली छात्राओं को नकद प्रोत्साहन राशि देने की शुरुआत की.

इससे कॉलेजों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में भी लड़कियां अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने लगीं. अब स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में लड़कों और लड़कियों की संख्या के बीच अंतर काफी कम रह जाना बिहार में पिछले 15 वर्षों के दौरान महिला सशक्तीकरण के लिए हुए ऐतिहासिक प्रयासों का अकाट्य प्रमाण है. एआइएसएचइ के मुताबिक, बिहार में सत्र 2015-16 में सरकारी एवं प्राइवेट विश्वविद्यालयों की कुल संख्या 22 थी, जो 2019-20 में बढ़ कर 35 हो गयी है.

पांच वर्षों में राज्य में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या छह हो गयी

राज्य में सत्र 2015-16 में 2 सेंट्रल यूनिवर्सिटी और राष्ट्रीय महत्व के 3 संस्थान (आइआइटी, एनआइटी आदि) थे, जिनकी संख्या बढ़ कर क्रमश: 4 और 5 हो गयी, जबकि 15 साल पहले बिहार में राष्ट्रीय महत्व का एक भी संस्थान नहीं था.पिछले पांच वर्षों में राज्य में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या भी शून्य से बढ़ कर छह हो गयी है.

राज्य में सत्र 2019-20 के दौरान मान्यताप्राप्त कॉलेजों की कुल संख्या 863 थी, जिनमें से 55 कॉलेजों में इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, 15 कॉलेजों में चिकित्सा की विभिन्न शाखाओं और 5 कॉलेजों में नर्सिंग की पढ़ाई हो रही थी. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच सत्रों के दौरान उच्च शिक्षा के विभिन्न पाठ्यक्रमों में समाज के सभी वर्गों और अल्पसंख्यक छात्रों की संख्या लगातार बढ़ी है.

Posted by Ashish Jha

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