Darbhanga News: महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए स्वयं लड़ना होगा, बर्दाश्त करने से शोषण का और होंगी शिकार

Updated at : 08 Mar 2025 10:42 PM (IST)
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Darbhanga News: महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए स्वयं लड़ना होगा, बर्दाश्त करने से शोषण का और होंगी शिकार

Darbhanga News:अंकिता आनंद रचित काव्यसंग्रह ‘अब मेरी बारी’ पर परिचर्चा का आयोजन मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. मंजू राय की अध्यक्षता में हुआ.

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Darbhanga News: दरभंगा. लनामिवि के पीजी हिंदी विभाग में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर युवा कवयित्री अंकिता आनंद रचित काव्यसंग्रह ‘अब मेरी बारी’ पर परिचर्चा का आयोजन मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. मंजू राय की अध्यक्षता में हुआ. प्रो. राय ने कहा कि आपको अपने अधिकारों के लिए स्वयं लड़ना होगा. बर्दाश्त करने से आप और शोषण के शिकार होते हैं. अपना कद्र स्वयं कीजिए और यह सुनिश्चित कीजिए कि समाज निर्माण में आपकी भी भूमिका हो. महिला दिवस किसी एक विशेष दिन पर ही नहीं बल्कि हर रोज होना चाहिए.

पितृसत्ता पुरुषों के लिए भी सही नहीं- अंकिता

काव्य संग्रह पर चर्चा करते हुए कवयित्री अंकिता आनंद ने कहा कि कविताओं के माध्यम से समाज की उन समस्याओं को प्रकाश में लाने का काम कर रही हूं, जिससे स्त्री-पुरुष में एकता स्थापित हो सके. कहा कि कविताओं के माध्यम से समाज के हर पहलू को सामने रखने का प्रयास किया है. कहा कि पितृसत्ता पुरुषों के लिए भी सही नहीं है. सभी को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए. स्वरचित कविता ””””जमाना बदल गया””””, ””””सेवा में आजाद औरतें””””, ””””मकाम””””, ””””गौ राशि की कन्या””””, ””””भले घर की लड़की””””, ””””मैं और वे”””” और ””””जवाबतलवी”””” का पाठ भी की.

अंकिता की कविताओं को आज के संदर्भ में समझने की जरूरत- प्रो. उमेश

विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि नारी की अमूर्त भावनाओं को समझ पाने की कसक और उसकी सच्ची छवि की तलाश में अंकिता की कविताएं कई प्रश्न छोड़ जाती है, जिन्हें आज के संदर्भ में गहराई से समझने की आवश्यकता है. डॉ सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि आज का दिन आधी आबादी की मुक्ति के लिए संकल्प लेने का दिन है. अंकिता ने भोगे हुए यथार्थ को अपने काव्य संग्रह में लिपिबद्ध की है, जिसमें प्रगतिशीलता का स्वर विद्यमान है. डॉ आनंद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि कवियत्री अंकिता की कविता समसामयिक है.

सृष्टि हमेशा स्त्री-पुरुष के संतुलन से संचालित- प्रो. पुनीता

अंग्रेजी विभाग की प्रो. पुनीता झा ने कहा कि सृष्टि हमेशा स्त्री-पुरुष के संतुलन से ही चला है. अगर पारिवारिक स्तर पर ही महिलाओं को पुरुषों के समान माना जाय, तो सामाजिक स्तर पर उनके साथ भेदभाव नहीं होगा. कार्यक्रम में मंजरी खरे, प्रो. अमरेंद्र कुमार शर्मा आदि ने भी विचार रखा. मौके पर विभाग के नेट, जेआरएफ उत्तीर्ण छात्र छात्राओं को प्रशस्ति पत्र दिया गया. इसमें शिवानी कुमारी, अपर्णा कुमारी, दीपक कुमार, दर्शन सुधाकर, भावना कुमारी, अमरेंद्र कुमार, कंचन कुमारी, सुभद्रा कुमारी, निशा कुमारी, पुष्पा कुमारी, बबीता कुमारी, अंशु कुमारी, संध्या रॉय आदि शामिल थे. मौके पर प्रो. मुनेश्वर यादव, मानस बिहारी वर्मा, डॉ अखिलेश्वर कुमार सिंह, डॉ नीतू कुमार, डॉ रघुवीर कुमार, डॉ मनोज कुमार, सियाराम मुखिया, दुर्गानंद ठाकुर, रोहित कुमार, जयप्रकाश कुमार, मलय नीरव आदि मौजूद रहे.

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