Darbhanga News: मिथिला के लोगों में धन- संपत्ति के प्रति माेह नहीं, मुक्ति को बनाते रहे हैं परम लक्ष्य

Updated at : 05 May 2025 10:40 PM (IST)
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Darbhanga News: मिथिला के लोगों में धन- संपत्ति के प्रति माेह नहीं, मुक्ति को बनाते रहे हैं परम लक्ष्य

Darbhanga News:कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. देवनारायण झा ने कहा कि सीता की कर्तव्य निष्ठा जगत विख्यात है.

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Darbhanga News: दरभंगा. कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. देवनारायण झा ने कहा कि सीता की कर्तव्य निष्ठा जगत विख्यात है. हम सभी सीता की तरह ही कर्तव्य निष्ठ नागरिक बनें. सीएम कॉलेज में मैथिली एवं संस्कृत विभाग की ओर से ””””भारतीय वाङ्मयमे सीता”””” विषय पर वे व्याख्यान दे रहे थे. कहा कि मिथिला के लोग आत्मचिंतक होते रहे हैं. यहां धन-संपत्ति के प्रति लोगों में मोह नहीं रहा है. लोग मुक्ति को ही अपना परम लक्ष्य बनाते रहे हैं. प्रो. झा ने सीतातत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीता पुरुषार्थ चतुष्टय की देवी हैं. धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष सभी इनके माध्यम से प्राप्त करना संभव है. सीता आचार, विचार, विद्या और त्याग की प्रतिमूर्ति हैं. मनुष्य इनका अनुकरण करे, तो सब कुछ प्राप्त करना संभव है.

मिथिला की हर माता-बहनें सीता का स्वरूप

प्रो. झा ने ऋग्वेद, अथर्ववेद, वेदांत, सांख्य दर्शन, पतंजलि योग दर्शन, सीतोपनिषद, भागवत आदि से उदाहरण देते हुए मिथिला शब्द के निर्माण और उससे मैथिली शब्द की निष्पत्ति के बारे में बताया. कहा कि यहां की हर माता-बहनें सीता का ही स्वरूप हैं, चाहे वह किसी भी पंथ से आती हों. सीता के अनेक अर्थ है. उमा, इंद्र की पत्नी, गंगा की एक धारा, कृषि यंत्र, हल, सीमंत ये सभी जानकी शब्द के ही अर्थ हैं. जनक पुत्री सीता भी एक अर्थ है, जो जगत विख्यात है.

सीता के अनुरूप करें अपने चरित्र का विकास- प्रो. मुश्ताक

प्रधानाचार्य डॉ मुश्ताक अहमद ने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं, कि उस क्षेत्र में जन्मे हैं, जो मां सीता की जन्मस्थली है. कहा कि हम जिस किसी भी चरित्र का सम्मान करें या उनके प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित करें, उनके अनुरूप अपने चरित्र को भी विकसित करें. सीता का मात्र गुणगान नहीं करें.

सीता मिथिला की परिचय- डॉ संदीप

डॉ संदीप कुमार झा ने कहा कि सीता ने मिथिला को अकाल सरीखी समस्या से उबारा. सीता मिथिला की परिचय हैं. यह मुक्तिदायनी शक्ति भी हैं. उनका स्वयं का जीवन कष्ट में रहा, लेकिन सदा लोगों के कल्याण की आकांक्षी रही. अध्यक्षता करते हुए डॉ रागिनी रंजन ने कहा कि हम सीता को स्मरण कर अपने जीवन को धन्य कर सकते हैं. डॉ अमलेन्दु शेखर पाठक के संचालन में संपन्न व्याख्यान में डॉ सुरेंद्र भारद्वाज ने धन्यवाद ज्ञापन किया. अंत में पहलगाम में मृत लोगों को श्रद्धांजलि दी गई. आयोजन का आरंभ रुणा कुमारी, रिचा कुमारी और प्रिया रानी के ””””मिथिला के धिया सिया जगत जननी भेली”””” गीत से हुआ. अभिजीत कुमार ने स्वागत गान और मैथिली पुत्र प्रदीप की रचना का संस्कृत अनुवाद प्रस्तुत किया. मौके पर देवानंद यादव, सुनील कुमार, देवनारायण यादव आदि मौजूद थे.

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