सत्ता पोषित नहीं समाज पोषित शिक्षा को स्थापित करना जरूरी

Updated at : 19 Jul 2024 10:44 PM (IST)
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सत्ता पोषित नहीं समाज पोषित शिक्षा को स्थापित करना जरूरी

राष्ट्र स्तरीय शोधपत्र लेखन प्रतियोगिता ''विजन फाॅर विकसित भारत'' कार्यशाला जुबली हाॅल में हुई.

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दरभंगा. भारतीय शिक्षण मंडल-युवा आयाम एवं लनामिवि की ओर से राष्ट्र स्तरीय शोधपत्र लेखन प्रतियोगिता ””””विजन फाॅर विकसित भारत”””” कार्यशाला जुबली हाॅल में हुई. अध्यक्षता करते हुए मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि शोध का प्रविधि से मुक्त होकर स्वच्छंद चिंतन- दृष्टि, समर्थ व प्रबुद्ध भारत का निर्माण कर सकता है. मुख्य वक्ता भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने आजादी के बाद से अद्यतन शिक्षा जगत में उथल- पुथल के ऐतिहासिक क्रम पर प्रकाश डाला. कहा कि सरकार अथवा सत्ता पोषित नहीं बल्कि समाज पोषित शिक्षा को स्थापित करना जरूरी है. उन्होंने भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा शिक्षण कार्य में शिक्षा की गुणवत्ता, नीति, पाठ्यक्रम, परिवर्तन, गुरुकुल पद्धति, चरित्र निर्माण आदि कारकों की विवेचना की. साथ ही युवाओं से बौद्धिक योद्धा की तरह तैयार होने का आह्वान किया. भारतीय ज्ञान व चिंतन- परंपरा की पुनः स्थापना पर बल दिया. अतिथि वक्ता राजकुमार ने भारतीय मूल्यों व चरित्र निर्माण पर आधारित शिक्षा के लिए किये जाने वाले कार्य की जानकारी दी. डॉ अनिल कुमार ने शोध लेखन एवं सार तत्व की जानकारी दी. कुलसचिव डॉ अजय कुमार पंडित ने 2047 तक विकसित भारत के स्वरूप निर्माण में भारतीय शिक्षण मंडल के युवा आयाम के महत्व पर प्रकाश डाला. वाणिज्य विभाग के प्राध्यापक प्रो. हरे कृष्ण सिंह ने कहा कि अध्ययन की अंतरंग गहराइयों में डूबे बिना ज्ञान रूपी मोती को प्राप्त करना असंभव है. भारतीय ज्ञान परंपरा में शोधगंगा को अविरल गतिमान बनाए रखना हम सभी भरतवंशी का दायित्व है. तकनीकी सत्र की अध्यक्षता भारतीय शिक्षण मंडल उत्तर बिहार के प्रांत अध्यक्ष अजीत कुमार ने की. उन्होंने शोध, शोध के स्वरूप, शोध की प्रकृति, शोध के समकालीन महत्व, शोध विषय व शोध प्रश्न, शोध की परिकल्पना आदि के तकनीकी पक्षों पर चिंतन प्रस्तुत किया. विषय प्रवेश करते हुए डॉ अंबालिका आर्यन ने कहा कि शोध संबंधित आनंदशाला का उद्देश्य मैकॉली शिक्षण पद्धति को नकार कर भारतीय इतिहास और गौरवशाली शिक्षा को पाठ्यक्रमों में पुनः स्थापित करना है. डॉ साकेत रमन ने भी विचार रखा. दो सत्रों में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं कुलगीत से हुआ. अतिथियों का पाग, अंग- वस्त्र और तुलसी का पौधा देकर स्वागत किया गया. परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनोद कुमार ओझा ने स्वागत किया. प्रथम सत्र में भारतीय शिक्षण मंडल, युवा आयाम का पोस्टर विमोचन के साथ संघ गीत का गायन हुआ. कार्यशाला में स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, प्रधानाचार्य, शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र- छात्रा मौजूद थे.

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