Darbhanga News: दर्शन केवल ग्रंथों का विषय नहीं, यह जीवन की सार्थकता का विज्ञान- कुलपति

Updated at : 09 Oct 2025 10:18 PM (IST)
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Darbhanga News: दर्शन केवल ग्रंथों का विषय नहीं, यह जीवन की सार्थकता का विज्ञान- कुलपति

Darbhanga News:कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि दर्शन केवल ग्रंथों का विषय नहीं, यह जीवन की सार्थकता का विज्ञान है.

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Darbhanga News: दरभंगा. कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में पीजी दर्शन विभाग एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन की ओर से “भारतीय दर्शनों में मोक्ष की अवधारणा” विषय पर संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि दर्शन केवल ग्रंथों का विषय नहीं, यह जीवन की सार्थकता का विज्ञान है. उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों के नियमित आयोजन पर बल दिया. कहा कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक विभाग में मासिक अथवा पाक्षिक संगोष्ठियां आयोजित की जानी चाहिए.

मोक्ष का अर्थ है अज्ञान का नाश एवं आत्मा की स्वरूप-प्राप्ति- प्रो. देवनारायण

पूर्व कुलपति प्रो. देवनारायण झा ने कहा कि मोक्ष का अर्थ है अज्ञान का नाश एवं आत्मा का स्वरूप-प्राप्ति. कहा कि भारतीय दर्शन में मोक्ष की अवधारणा मानव अस्तित्व के अंतिम लक्ष्य को संदर्भित करती है, जो जन्म-मृत्यु के चक्र से परम मुक्ति और दुखों के अंत से परे सुख और आनंद की एक अवस्था है. इसमें व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानता है और अज्ञान (अविद्या) तथा माया से मुक्त होता है. मोक्ष की प्राप्ति विभिन्न मार्गों जैसे ज्ञान, कर्म, भक्ति, और ध्यान के माध्यम से हो सकती है और यह जीवनकाल में (जीवनमुक्ति) या मृत्यु के बाद (विदेहमुक्ति) प्राप्त हो सकती है. सत्य को जानने के लिए आत्म-ज्ञान और विवेक प्राप्त करना ही मोक्ष्य का अर्थ है. कहा कि निष्काम भाव से कर्म करना और कर्मों के बंधन से मुक्त होना कर्म योग है. भक्तियोग को विस्तार से समझाते हुए कहा कि ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करना ही भक्ति योग है.

आसक्ति से मुक्त होकर कर्म करते हुए जीवन जीने की कला है मोक्ष- प्रो. ब्रजेशपति

कुलसचिव प्रो. ब्रजेशपति त्रिपाठी ने कहा कि मोक्ष केवल सांसारिक त्याग नहीं, बल्कि मोह, लोभ और आसक्ति से मुक्त होकर कर्म करते हुए जीवन जीने की कला है. विषय प्रवर्तन हुए आयोजक डॉ धीरज कुमार पांडेय ने कहा कि दर्शन का मूल उद्देश्य मानव जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के संतुलन को स्थापित करना है. इससे पहले कार्यक्रम का प्रारंभ विश्वमोहन झा एवं अंकित मिश्र के मंगलाचरण से हुआ. धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ प्रभात दास फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने ज्ञान-विस्तार के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया. संगोष्ठी का संयोजन दर्शन संकायाध्यक्ष डॉ शंभू शरण तिवारी तथा सह संयोजन डॉ माया कुमारी ने किया. कुलगीत डॉ माया कुमारी, डॉ साधना शर्मा एवं छात्रा अंजलि ने प्रस्तुत की. संगोष्ठी में डॉ बौआनन्द झा, धर्मशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार झा, प्रो. दयानाथ झा, डॉ उमेश झा, डॉ रितेश कुमार चतुर्वेदी, डॉ साधना शर्मा, डॉ पवन कुमार झा आदि मौजूद थे. प्रतिवेदन डॉ साधना शर्मा ने प्रस्तुत किया. कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति से सम्मानित एवं मैथिली के विद्वान रामजी ठाकुर के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई.

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