Darbhanga News: अधिकांश पैथोलॉजी जांच घर का अवैध तरीके से संचालन, मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़

Updated at : 29 Jun 2025 5:53 PM (IST)
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Darbhanga News: अधिकांश पैथोलॉजी जांच घर का अवैध तरीके से संचालन, मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़

Darbhanga News:जिले में बड़ी संख्या में अवैध तरीके से पैथोलॉजी लैब संचालित हो रहे हैं. मरीजों की जांच के नाम पर लूट मची हुई है.

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Darbhanga News: दरभंगा. जिले में बड़ी संख्या में अवैध तरीके से पैथोलॉजी लैब संचालित हो रहे हैं. मरीजों की जांच के नाम पर लूट मची हुई है. शहर से लेकर गांव तक बिना लाइसेंस के ही अमानक तरीके से जांच घर संचालित किए जा रहे हैं, बावजूद स्थानीय स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के बदले तमाशबीन बना बैठा है. इस तरह के जांच घर की रिपोर्ट भी संदेह के घेरे में रहती है. जानकार बताते हैं कि रजिस्टर्ड जांच घर से ज्यादा संख्या में अवैध जांच घर संचालित हो रहे हैं. सूत्रों की मानें तो इसके लिए संचालकों ने सरकारी अस्पतालों के अलावा सिविल सर्जन कार्यालय के कतिपय कर्मियों को मैनेज कर रखा है. बताया जाता है कि जून 2025 में अपंजीकृत पैथोलॉजी लैबों पर कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है, लेकिन अब तक किसी तरह की ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं है. उल्लेखनीय है कि अवैध जांच घर व नर्सिंग होम पर नकेल कसने के लिए ग्रामीण इलाकों में कई बार छापेमारी भी की गयी, लेकिन शहरी क्षेत्र में इस तरह का धरातल पर कुछ नहीं नजर आता है.

बगैर लाइसेंस के सेंटर खुलने की लोगों ने की शिकायत

जानकारी के अनुसार लहेरियासराय के बेता में अवैध रूप से एक पैथोलॉजी सेंटर खोलने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है. इसे लेकर सीएस कार्यालय को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गयी है. बताया गया कि पत्र सीएस कार्यालय को भेज दिया गया है. स्थानीय लोग अब कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

स्वास्थ्य विभाग के नियमों का अनुपालन अनिवार्य

बिहार में पैथोलॉजी सेंटर खोलने के लिए क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट-2010 और बिहार राज्य के स्वास्थ्य विभाग के नियमों का पालन करना अनिवार्य है. इसके तहत पैथोलॉजी लैब संचालित करने के लिए एमडी (पैथोलॉजी) या मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त समकक्ष डिग्री आवश्यक है. केंद्र सरकार के हाल के बदलावों के अनुसार, एमबीबीएस या मेडिकल-एमएससी स्नातक बुनियादी लैब संचालित कर सकते हैं, लेकिन संबंधित प्रशिक्षण होना अनिवार्य है. वहीं जांच रिपोर्ट पर केवल एमडी पैथोलॉजिस्ट या योग्य एमबीबीएस डॉक्टर के हस्ताक्षर ही मान्य हैं. लैब टेक्नीशियन हस्ताक्षर नहीं कर सकते. वहीं सभी पैथोलॉजी लैब के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर लेना अनिवार्य है. इसके अलावा बायोमेडिकल वेस्ट (मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग) नियम-2016 के तहत बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेनी होगी.

सेंटर के लिए अन्य लाइसेंस भी जरूरी

विभागीय जानकारी के अनुसार पैथोलॉजी सेंटर के लिए स्थानीय नगर निगम या पंचायत से ट्रेड लाइसेंस भी लेना होता है. साथ ही अग्निशमन विभाग से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट की जरूरत होती है. इसके अलावा लैब में रक्त संग्रह कक्ष, जांच क्षेत्र और भंडारण क्षेत्र जैसे अलग-अलग सेक्शन होने चाहिए. एक कमरे में लैब संचालित नहीं किया जा सकता. विदित हो कि गलत रिपोर्टिंग व मानकों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है. साथ ही तीन वर्ष तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है. यहां बता दें कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक इक्का-दुक्का को छोड़ अधिकांश जांच घर पूरी तरह मानक का अनुपालन नहीं कर रहे. कारोबार की तरह जांच घर का संचालन कर रहे हैं.

कहते हैं सिविल सर्जन

रविवारीय अवकाश के कारण जानकारी नहीं दे सकते. सोमवार को संपर्क करने पर बता पाएंगे.

– डॉ अरुण कुमार, सिविल सर्जन

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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