Darbhanga News: भारतीय दर्शन विचारों एवं तर्कों का शास्त्र जो दिखाता मुक्ति का मार्ग

Published by : PRABHAT KUMAR Updated At : 19 Aug 2025 10:50 PM

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Darbhanga News:डॉ धीरेंद्र कुमार पांडे ने कहा कि दर्शन, यज्ञ, ज्ञान-विज्ञान, स्त्री-शिक्षा के मामले में मिथिला बैकुंठ सदृश्य भूमि है.

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Darbhanga News: दरभंगा. लनामिवि के पीजी दर्शनशास्त्र विभाग के अयाची मिश्र चेयर तथा डॉ प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय दर्शन में पंडित अयाची मिश्र का योगदान ” विषय पर सिंपोजियम का आयोजन किया गया. विभागाध्यक्ष डॉ शिवानंद झा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सह कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के डॉ धीरेंद्र कुमार पांडे ने कहा कि दर्शन, यज्ञ, ज्ञान-विज्ञान, स्त्री-शिक्षा के मामले में मिथिला बैकुंठ सदृश्य भूमि है. चार आस्तिक दर्शनों के उद्भव के साथ ही छह दर्शन यहीं पल्लवित- पुष्पित हुई. इसे माया नगरी भी कहा जाता है. कहा कि भारतीय दर्शन विचारों एवं तर्कों का शास्त्र है, जो मुक्ति का मार्ग दिखाता है. डॉ पांडे ने कहा कि गुणों के कारण ही भवनाथ मिश्र का नाम अयाची मिश्र पड़ा. वे अपने शिष्यों से दक्षिणा नहीं लेते थे. उन्हें कहते थे कि अपने जैसे 10 शिष्यों को पढ़ाकर ज्ञान-परंपरा को आगे बढ़ाओ. अपने जीवन में किसी से याचना नहीं की. वे प्रकांड विद्वान एवं शैव थे. मूलतः न्याय के विद्वान थे. पर, मीमांसा एवं वेदांत के भी बड़े जानकार थे.

अयाची मिश्र का जीवन अनुकरणीय- डॉ शिवानंद

डॉ शिवानंद झा ने कहा कि आज के आर्थिक युग में अयाची मिश्र का जीवन अनुकरणीय है. वे किसी से भी दान, पुरस्कार या सम्मान आदि नहीं लिए. इसी कारण उनके नाम में अयाची जुड़ा. डॉ घनश्याम महतो, डॉ आरएन चौरसिया, फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने भी अयाची मिश्र का भारतीय दर्शन के विकास में योगदान को रेखांकित किया. स्वागत भाषण में डॉ राजीव कुमार ने कहा कि अयाची मिश्र सरिसव पाही के मूल निवासी थे. जीवन में कभी किसी से याचना न करने के कारण ही उनका नाम अयाची मिश्र पड़ा. धन्यवाद ज्ञापन में डॉ संजीव कुमार साह ने किया. इशान के संचालन में आयोजित सिंपोजियम में डॉ ममता स्नेही, डॉ मोना शर्मा, डॉ ज्योति कुमारी, सदानंद विश्वास, मणिपुष्पक घोष, राघव झा, बालकृष्ण कुमार सिंह, सुजाता प्रभाकर, हरिओम झा, अनिल कुमार सिंह, रानी कुमारी जिग्नेश कुमार, रवींद्र कुमार, मंजू अकेला, कृष्ण मोहन भगत आदि शामिल थे. प्रतिभागियों को फाउंडेशन की ओर से प्रमाण पत्र दिया गया. इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के दीप प्रज्वलन से हुआ. अतिथियों का स्वागत फूल के पौधों से किया गया.

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