दरभंगा ऑडिटोरियम में सम्मान कार्यक्रम आयोजित
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 28 Oct 2024 11:54 PM
एशियाई हॉकी चैंपियन ट्रॉफी (महिला) के विजेता को दी जाने वाली ट्रॉफी को प्रदेशभर में घुमाया जा रहा है.
दरभंगा.
खेल विभाग, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण एवं हॉकी इंडिया की ओर से 11 से 20 नवंबर तक राजगीर में आयोजित एशियाई हॉकी चैंपियन ट्रॉफी (महिला) के विजेता को दी जाने वाली ट्रॉफी को प्रदेशभर में घुमाया जा रहा है. इसी क्रम में यहां आयी ट्रॉफी गौरव यात्रा का डीएम राजीव रौशन, एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी, डीडीसी चित्रगुप्त कुमार, उपनिदेशक जनसंपर्क सत्येंद्र प्रसाद, जिला खेल पदाधिकारी परिमल, आलोक कुमार आदि ने स्वागत किया. टॉफी लेकर आये लोगों का अधिकारियों ने पाग और चादर से सम्मान किया. दरभंगा ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में कहा गया कि राज्य खेल प्राधिकरण इसके माध्यम से बिहारवासियों को खेलों के प्रति जागरुक कर रहा है.ट्रॉफी को देखना जिले के लिए गर्व की बात- डीएम
डीएम ने कहा कि ट्रॉफी को देखना जिला के लिए गर्व की बात है. खेल से जुड़ी प्रतिभा इससे प्रेरित होंगे. कहा कि खेल में जो हुनर दिखाएंगे, वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम अंकित करेंगे. सरकार से लगातार युवाओं को प्रोत्साहन मिल रहा है. निश्चित रूप से इसका परिणाम सामने आएगा. एसएसपी ने कहा कि बिहार के लिए गौरव की बात है कि यहां एशियाई चैंपियन ट्रॉफी हो रहा है. इसमें 06 देश भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया एवं थाइलैंड की टीम भाग ले रही है.जिले में नहीं हैं हॉकी के एक भी खिलाड़ी और न हॉकी संघ
दरभंगा. जिले में न तो हॉकी के एक भी खिलाड़ी हैं और न ही इस खेल को यहां जिंदा किये जाने को लेकर प्रशासन ही संवेदनशील है. स्कूली खेल प्रतियोगिता में भी इसे जगह नहीं है. कभी यह खेल यहां काफी मजबूत स्थिति में था. अधिक खर्चीला खेल होने तथा संघ एवं प्रशासन के स्तर से सहयोग नहीं मिलने से तीन दशक पूर्व इसका अस्तित्व यहां समाप्त हो गया. नये जमाने में भी हॉकी के विकास के लिए न तो संघ ही आगे आ रहा है और न प्रशासन. लगभग तीन दशक पूर्व मेडिकल खेल मैदान में कुछ खिलाड़ी हॉकी खेलते दिख जाते थे. समय के साथ वह भी समाप्त हो गया. जिले के किसी मैदान में एक भी खिलाड़ी अभ्यास करते भी नहीं दिखते हैं. पूर्व में रवि कोहली हॉकी संघ के सचिव हुआ करते थे. वैसे उस दौरान भी हॉकी के खिलाड़ी यहां नहीं होते थे. मैदान में कहीं कोई गतिविधि नहीं थी. कोई प्रतियोगिता नहीं होती थी. हालात बदले नहीं हैं. आज भी वही स्थिति है. स्कूली स्तर पर भी इसे जिंदा किये जाने का कोई प्रयास नहीं दिख रहा.
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