चार महीने बाद भी डेढ़ लाख छात्रों को नहीं मिली पाठ्यपुस्तकें, किताबों के बिना पढ़ाई

प्रतीकात्मक तस्वीर
दरभंगा के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र शुरू हुए चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन करीब डेढ़ लाख छात्र-छात्राएं अभी भी पाठ्यपुस्तकों के बिना पढ़ाई करने को मजबूर हैं. किताबों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है. अभिभावकों और शिक्षकों ने तत्काल समाधान की मांग की है.
Darbhanga News: जिले के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने के करीब चार महीने बाद भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं बिना पाठ्यपुस्तकों के पढ़ाई करने को मजबूर हैं. जिला शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा एक से आठवीं तक 5,96,701 विद्यार्थियों का नामांकन था. इसके मुकाबले बिहार टेक्स्ट बुक पब्लिक कॉरपोरेशन ने इस सत्र के लिए केवल 4,47,631 पुस्तक सेट उपलब्ध कराए हैं. इससे करीब 1,49,070 विद्यार्थियों को अब तक पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकी हैं.
सभी उपलब्ध पुस्तक सेट विद्यालयों में वितरित
जिला स्तर पर प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध सभी 4,47,631 पुस्तक सेट विभिन्न प्रखंडों के विद्यालयों में वितरित कर दिए गए हैं. सबसे अधिक 35,073 पुस्तक सेट केवटी प्रखंड में, 32,562 नगर क्षेत्र में, 31,807 गौड़ाबौराम में, 31,776 कुशेश्वरस्थान पूर्वी में तथा 31,141 तारडीह प्रखंड में वितरित किए गए हैं. इसके अलावा बिरौल में 25,883, बहादुरपुर में 21,866, अलीनगर में 21,222 तथा सिंहवाड़ा में 19,310 पुस्तक सेट विद्यार्थियों के बीच पहुंचाए गए हैं.
राज्य मुख्यालय से नहीं मांगी गई अतिरिक्त पुस्तकें
प्राथमिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा संभाग के समन्वयक नीरज कुमार ने बताया कि इस वर्ष राज्य मुख्यालय की ओर से नामांकित बच्चों की संख्या के अनुरूप पुस्तक सेट की मांग नहीं की गई है. इसी कारण जिले से अतिरिक्त पुस्तकों की मांग भी नहीं भेजी जा रही है. प्राथमिक एवं समग्र शिक्षा संभाग के डीपीओ संजय कुमार ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य मुख्यालय से जितने पुस्तक सेट उपलब्ध कराए गए थे, उनका वितरण करा दिया गया है और अतिरिक्त मांग भेजने का प्रावधान इस बार नहीं रखा गया है.
किताबों के अभाव में प्रभावित हो रही पढ़ाई
पुस्तकों की कमी का असर सीधे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. बड़ी संख्या में बच्चे बिना किताबों के कक्षाओं में पहुंच रहे हैं, जबकि शिक्षक भी सीमित पुस्तकों के आधार पर पढ़ाई कराने को विवश हैं. अभिभावकों और शिक्षकों ने सभी नामांकित विद्यार्थियों को जल्द पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों.
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लेखक के बारे में
By राज कुमार रंजन
राज कुमार रंजन दो दशक से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राष्ट्रीय समाचार पत्रों में काम कर चुके रंजन प्रशासनिक गतिविधियों के साथ-साथ राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्रों में गहरी पैठ रखते हैं.
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