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नहाय-खाय के संग लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ आज से

Updated at : 24 Oct 2025 6:22 PM (IST)
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नहाय-खाय के संग लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ आज से

नहाय-खाय के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ शनिवार से आरंभ हो जायेगा.

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दरभंगा. नहाय-खाय के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ शनिवार से आरंभ हो जायेगा. इसे लेकर एक दिन पूर्व से ही श्रद्धालु के परिवार में उत्सवी वातावरण नजर आने लगा है. नहाय-खाय के अगले दिन रविवार को पूरे दिन निर्जला उपवास रख व्रती संध्या काल खरना करेंगे. वहीं अगले दिन 27 नवंबर सोमवार को महापर्व छठ का पहला अर्घ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्पित किया जायेगा. मंगलवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ अर्पण के संग सूर्योपासना का यह महापर्व संपन्न होगा. इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास व्रती खंडित करेंगे. इसकी तैयारी लोगों ने लगभग पूरी कर ली है.

नहाय-खाय के दिन सुबह व्रती पवित्र जल से स्नान करेंगे. भगवान सूर्य को अर्घ देने के पश्चात पूजा-अर्चना करेंगे. नये परिधान धारण कर व्रती नहाय-खाय करेंगे. महिलाएं नाक से सिंदूर कर पूजन करेंगी. नहाय-खाय के लिए व्रती के संग घर की अन्य महिलाएं मिट्टी के नये चूल्हे पर अरवा भोजन पकायेंगी. इसमें अरवा चावल का भात, मूंग की दाल, कद्दू की सब्जी, अन्य सब्जी, तरूआ आदि पकाया जायेगा. इस भोजन में हल्दी का प्रयोग निषिद्ध होता है. वहीं सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करने का विधान है. संध्या काल मिट्टी के चूल्हे पर ही खुद धो-कूटकर तैयार गेहूं के आंटा की रोटी और सब्जी बनायी जायेगी, जिसे व्रती ग्रहण करेंगे. इस अवसर पर कद्दू की सब्जी ग्रहण करने की परंपरा है. लिहाजा एक दिन पूर्व से ही बाजार में कद्दू की मांग बढ़ गयी. दुकानदारों ने भी पर्याप्त मात्रा में कद्दू सजा रखे थे. मांग बढ़ने एवं इसकी प्रधानता को देखते हुए इसकी कीमत बढ़ा रखी थी. आमतौर पर 30 से 50 रुपये में मिलने वाले कद्दू की आज कोई निर्धारित कीमत नहीं थी. मनमाने दाम पर इसे बेचा जा रहा था. कोई 90 तो कोई 125 रुपये दाम बता रहा था. मजबूरन किलो में भी लोग कद्दू खरीदते दिखे.

इधर महज दो दिन शेष रहने के कारण छठ घाटों की सफाई में श्रद्धालु खुद जुट गये हैं. अपने अर्घ को घाट पर सजाने एवं भगवान सूर्य को अर्पित करने के लिए घाट तैयार कर रहे हैं. शहर में नगर निगम प्रशासन की ओर से की गयी सफाई के बाद खुद कुदाल, खुरपी आदि लेकर युवाओं की टोली घाटों पर पहुंच गयी और सफाई में जुट गयी. वहीं घाटों की साज-सज्जा भी शुरू हो गयी है. वातावरण पारंपरिक छठ गीतों के बोल से गूंजायमान होने लगा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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