Darbhanga News: कहीं आदेशपाल के सहारे भविष्य गढ़ने की कोशिश कर रहे नौनिहाल, तो कहीं वह भी नदारद

Edited by PRABHAT KUMAR
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Darbhanga News:बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मनोनयन के बाद बोर्ड की पहली बैठक में संस्कृत शिक्षा को व्यवसायिक शिक्षा से जोड़ने के निर्णय से प्राच्य भाषा संस्कृत से जुड़े लोगों में हर्ष है.

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Darbhanga News: सुबोध नारायण पाठक, बेनीपुर. बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मनोनयन के बाद बोर्ड की पहली बैठक में संस्कृत शिक्षा को व्यवसायिक शिक्षा से जोड़ने के निर्णय से प्राच्य भाषा संस्कृत से जुड़े लोगों में हर्ष है. हालांकि लोगों का कहना है कि पूरी तरह बेपटरी हुई संस्कृत शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर वापस लाने में नई कमेटी को काफी मशक्कत करनी होगी. कारण प्राय: सभी विद्यालय भूमिहीन, छात्रहीन व शिक्षकविहीन हो गये हैं. इस कारण कभी संस्कृत शिक्षा के माध्यम से वेद की ऋचा व श्लोक गूंजने व संस्कृत के विद्वान एवं पंडितों का गढ़ माने जाने वाले मिथिला से संस्कृत शिक्षा विलुप्त सी होती जा रही है. वैसे प्रखंड स्तर पर बात करें तो प्रखंड में 10 संस्कृत प्राथमिक व मध्य विद्यालय हैं, परंतु प्राय: सभी कागज पर संचालित हो रहे हैं. किसी विद्यालय में आदेशपाल बच्चों के भविष्य गढ़ने में लगे हुए हैं, तो कहीं ये भी नहीं हैं.

ऐसी है विद्यालयों की स्थिति

दामोदर संस्कृत विद्यालय नवादा में नामांकित 50 बच्चों के लिए मात्र तीन शिक्षक हैं. वहीं दुर्गा भवन संस्कृत विद्यालय बहेड़ा में नामांकित 270 बच्चों के लिए एक भी शिक्षक नहीं हैं. यहां एक आदेशपाल इन सभी बच्चों का वर्षों से भविष्य गढ़ रहे हैं. इसी प्रकार जनता संस्कृत विद्यालय डखराम में बच्चों की संख्या 248 व शिक्षक चार हैं. इनमें से दो अन्य विद्यालय में प्रतिनियोजन पर हैं. यानी ढाई सौ बच्चों का भविष्य दो शिक्षकों के भरोसे है. कीर्तिनाथ संस्कृत विद्यालय लवाणी में बच्चों की संख्या 55 है, परंतु शिक्षक नदारद हैं. संस्कृत विद्यालय तरौनी में नामांकित 250 बच्चों के लिए मात्र एक शिक्षक पदस्थापित हैं. लोगों का कहना है कि इस विद्यालय का कभी ताला नहीं खुलता है. संस्कृत विद्यालय बाथो में छात्र 25 व शिक्षक चार, संस्कृत विद्यालय महिनाम में छात्र 165 व शिक्षक दो, संस्कृत विद्यालय देवराम में छात्रों की संख्या 206 में एक भी शिक्षक नहीं हैं. प्रखंड का एकमात्र शिवजी संस्कृत उच्च विद्यालय बैगनी है, जहां छात्रों के अनुपात में शिक्षक भी हैं. ऐसे में संस्कृत विद्यालय में नामांकित बच्चों का भविष्य अधर में लटका है. ऐसे में लोगों की नजर नई कमेटी पर टिकी है.

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