131 साल बाद मिथिला से विदा हुई मीटर गेज की ट्रेन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 May 2017 8:28 AM (IST)
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आज से शुरू होगा आमान परिवर्तन का काम दरभंगा : रेलवे के इतिहास में 26 मई 2017 की तिथि अविस्मरणीय हो गयी. उत्तर बिहार (मिथिला क्षेत्र) से मीटर गेज की ट्रेन 131 साल बाद हमेशा के लिए विदा हो गयी. जिस तरह नई पीढ़ी के लिए कोयला इंजन इतिहास की बात बन गयी है, उसी […]
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आज से शुरू होगा आमान परिवर्तन का काम
दरभंगा : रेलवे के इतिहास में 26 मई 2017 की तिथि अविस्मरणीय हो गयी. उत्तर बिहार (मिथिला क्षेत्र) से मीटर गेज की ट्रेन 131 साल बाद हमेशा के लिए विदा हो गयी. जिस तरह नई पीढ़ी के लिए कोयला इंजन इतिहास की बात बन गयी है, उसी तरह अब छोटी लाइन यानी मीटर गेज (एमजी) की ट्रेन भी कहानी में ही सिमट कर रह जायेगी. शुक्रवार को आधी रात अपने साथ इतिहास को समेटे यह ट्रेन रवाना हो गयी. अब इसकी सिर्फ यादें ही रह जायेंगी.
आनेवाले समय में इस पटरी पर बड़ी रेल लाइन यानी ब्रॉड गेज की ट्रेन दौड़ेगी, जिसकी रफ्तार तो तेज होगी ही, सुविधा की दृष्टि से भी बेहतर होगा. एक तरफ नई ट्रेन के स्वागत को लेकर क्षेत्रवासी जहां उत्साहित हैं, वहीं एमजी ट्रेन के सफर का आनंद फिर से नहीं ले सकने का मलाल भी है.
अब नहीं मिलेगा धीमी रफ्तार का मजा
कम चौड़े रेल पटरी पर छोटी बोगियों वाली इस ट्रेन का सफर एक अलग मजा देता है. धीमी रफ्तार में खुलनेवाली इस गाड़ी को गति पकड़ने में काफी वक्त लगता है. धीमी रफ्तार के बीच प्राकृतिक छटा का पूरा आनंद मिलता है. दूर तक सपाट फैली जमीन की हरियाली आंखों को सुकून देती है.
नीचे जमीन में धंस रही रेल के साथ दायें-बांयें हिलती-डुलती ट्रेन की यात्रा एक अलग मजा देती है. ऐसा लगता मानो किसी झूले पर बैठकर सफर कर रहे हों. बिना पंखा व बिजली की परेशानी इस यात्रा के आनंद को कम नहीं कर पाती. लेकिन अब यह मजा यात्रियों को कभी नहीं मिल सकेगी. पटरी पर सरपट दौड़नेवाली बड़ी रेल लाइन की ट्रेन में यात्रा की अवधि तो जरूर कम हो जायेगी, लेकिन यह आनंद नहीं मिल सकेगा.
आखिरी ट्रेन के रूप में चली सवारी गाड़ी
शुक्रवार को 52521 अप सवारी गाड़ी जहां यात्रियों को अपनी आखिरी यात्रा का गवाह बनाया, 5522 डाउन पैसेंजर ट्रेन अपने अंतिम सफर को यादगार बनाने के लिए खुशी-खुशी यात्रियों को अपने साथ लेकर रवाना हुई. इसमें सवार यात्री इस पल के गवाह बने. अपनी आंखों से इतिहास बनते देखा.
इतिहास पर एक नजर
गोरखपुर से भाया दरभंगा निर्मली होते हुए कनवा घाट तक मीटर गेज का ट्रंक रूट हुआ करता था. दरभंगा से 1883 से 1886 के बीच निर्मली होते हुए कोसी नदी के समीप कनवा घाट तक पहली छोटी लाइन बिछायी गयी थी. बाद में कोसी नदी के मार्ग बदलने के कारण पुरान ट्रंक रूट ही समाप्त हो गया.
निर्धारित किया आमान परिवर्तन का लक्ष्य
एकमुश्त इतनी बड़ी रकम दिए जाने से ही इस खंड के प्रति रेलवे की संजीदगी के संकेत मिल गये थे.काम को गति देने तथा यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को विभिन्न हिस्से में बांटकर काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है. गत अप्रैल माह में दिये गये टारगेट के अनुसार सकरी से झंझारपुर के बीच 20 किमी लंबे खंड पर आमान परिवर्त्तन का कार्य मार्च 2018 तक पूरा कर लेना है. वहीं निर्मली से सरायगढ़ 22 किमी लंबे खंड का बीजी कन्वर्सन फरवरी 2018 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य तय किया है. झंझारपुर-लौकहाबाजार खंड के लिए फिलहाल कोई अवधि निर्धारित नहीं किया गया है. इसीके तहत इन दो खंडों पर एक साथ ब्लॉक लिया गया है. झंझारपुर से निर्मली के बीच पहले ही ब्लॉक लिया जा चुका है.
बोर्ड ने दिया फाइनल टच
दरभंगा सेक्शन से जुड़े सकरी से झंझारपुर, झंझारपुर से निर्मली तथा लौकहा बाजार तीन खंडों पर अभी भी एमजी की ट्रेन चल रही थी. रेलवे बोर्ड ने सकरी-लौकहाबाजार-निर्मली-सहरसा-फारबिसगंज रेल परियोजना के तहत इन खंडों को इसमें शामिल किया है. 206.6 किमी लंबे खंडवाली यह परियोजना 355.81 करोड़ की है. इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष के रेल बजट में 125 करोड़ का प्रावधान किया गया है.
आज से मिटने लगेगा एमजी पटरी का वजूद
रेलवे ने रेल यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सकरी से झंझारपुर-निर्मली-लौकहा बाजार तक मीटर गेज पर चल रही ट्रेन सेवा को समाप्त करते हुए ब्रॉड गेज की पटरी बिछाने का निर्णय ले रखा है.
इसके तहत आमान परिवर्त्तन का काम होना है. यह काम विधिवत 27 मई से आरंभ हो रहा है. इसीलिए शनिवार से इस खंड पर मेगा ब्लॉक लिया जा रहा है. ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया है. अब जब आमान परिवर्त्तन का कार्य पूरा होने के बाद गाड़ी का परिचालन फिर से शुरू होगा तो छोटी लाइन की ट्रेन की जगह बड़ी लाइन की गाड़ी दौड़ लगायेगी.
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