अस्ताचलगामी सूर्य को किया अर्घ अर्पित

Published at :03 Apr 2017 6:42 AM (IST)
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अस्ताचलगामी सूर्य को किया अर्घ अर्पित

लोकआस्था का पर्व . भगवान भास्कर की आराधना को छठ घाटों पर उमड़ी व्रतियों की भीड़ दरभंगा : लोक आस्था का महापर्व छठ का पहला अर्घ्य रविवार को अर्पित किया गया. अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ अर्पण कर व्रतियों ने पूरे परिवार की मंगल कामना भगवान सूर्यदेव से की. सोमवार को उगते हुए भगवान भाष्कर को […]

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लोकआस्था का पर्व . भगवान भास्कर की आराधना को छठ घाटों पर उमड़ी व्रतियों की भीड़

दरभंगा : लोक आस्था का महापर्व छठ का पहला अर्घ्य रविवार को अर्पित किया गया. अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ अर्पण कर व्रतियों ने पूरे परिवार की मंगल कामना भगवान सूर्यदेव से की. सोमवार को उगते हुए भगवान भाष्कर को अर्घ्य अर्पण के साथ सूयोपासना का यह महापर्व संपन्न होगा.
मालूम हो कि गत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ लोक आस्था का महापर्व चैती छठ आरंभ हुआ. इसके अगले दिन शनिवार को व्रतियों ने खरना किया. रविवार को पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर संध्याकाल नये परिधान धारण कर छठ घाट की ओर रवाना हुई.
इधर सुबह से ही व्रतियों के घर में प्रसाद तैयार करने में महिलाएं जुटी रहीं. प्रसाद तैयार करने के पश्चात सूप में अर्घ सजाया.
ठेकुआ, पिरकिया, फल, नारियल, केला, मिठाई आदि डालकर छठ घाट पर पहुंची. वहां सूर्याभिमुख अर्घ को सजाया. दीप जलाये. अगरबत्ती व धूप भी जलाये. इससे शहर के माधवेश्वर परिसर स्थित सरोबर से लेकर बागमती नदी घाट, हराही, गंगासागर समेत अन्य घाटों का वातावरण सुवासित हो उठा. दूर-दराज के लोग रिक्शा तथा ठेला से भी अर्घ्य लेकर घाट तक पहुंचे. कई व्रती पूर्व मन्नत के अनुरूप घर से ही दंड प्रणाम देते हुए घाट तक पहुंची. निर्धारित समय पर जल में प्रवेश किया. इसके बाद सूर्योपासना में जुट गयी
. इधर परंपरागत छठ गीतों का गायन श्रद्धालु महिलाओं की टोली करती रही. उल्लेखनीय है कि मिथिला में दो बार छठ पर्व मनाया जाता है. कार्तिक मास में मनाये जाने वाले इस त्योहार में पूरा समाज नजर आता है. इसके अपेक्षा चैती छठ में भीड़ कम दिखती है. लेकिन परंपरा में कोई फर्क नहीं रहता.
गाजे-बाजे संग बेलन्योति के लिए निकले श्रद्धालु
दरभंगा . शक्ति की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा की आराधना में श्रद्धालु डूबे हुए हैं. भक्तों का उत्साह रविवार को बेलन्योति के अवसर पर छलक पड़ा. परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना के पश्चात पूजन स्थल से बिल्व निमंत्रण के लिए श्रद्धालुओं की टोली निकली. गाजे-बाजे के साथ निकली टोली माता का जयकारा लगा रहे थे.
निर्धारित बेल के वृक्ष के समीप पहुंचकर विधि-विधान पूर्वक पूजन के पश्चात बिल्व निमंत्रण की परंपरा संपन्न की गयी. इसके पश्चात पुन: टोली वापस पूजा पंडाल लौट गयी. इससे पूर्व भगवती के छठे स्वरूप कात्यायिनी का विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. इस मौके पर सार्वजनिक पूजा पंडालों से कलश शोभा यात्रा निकाली गयी. चूनाभट्ठी समेत शहर के विभिन्न पूजन स्थलों से शोभा यात्रा निकली.
सिर पर मंगल कलश लेकर कुंवारी कन्याएं निकली जो पवित्र जल भरकर वापस पूजन स्थल पर उसे स्थापित किया. मालूम हो कि सोमवार को बेलतोड़ी के पश्चात माता का पट भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिया जायेगा. इधर इसे लेकर हसनचक, बालूघाट, शुभंकरपुर, सैदनगर, बेला, चूनाभट्ठी, कोतवाली चौक, चट्टीचौक, ओझौल समेत सभी पूजन स्थल पर भक्तों की भीड़ लगी रही.
चैती छठ को ले रहा उत्साह का माहौल : केवटी . आस्था का महापर्व चैती छठ के तीसरे दिन रविवार को समैला गांव के तालाब के किनारे घाटों पर वर्तियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को निर्जला वर्त रखते हुए अर्घ दिया. वहीं गांव के ही चन्द्रदेव लाल के आंगन में बने कृत्रिम तालाबों में भी वर्तियों ने अर्घ अर्पित किया.
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