नाटक मंचन के एकल अभिनय में प्रकाश ने छोड़ी छाप

Published at :28 Aug 2016 1:39 AM (IST)
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नाटक मंचन के एकल अभिनय में प्रकाश ने छोड़ी छाप

नाट्य मंचन में जुटे कलाप्रेमी बादशाहत के अंत को किया जीवंत दरभंगा : चर्चित नाट्य संस्था थियेटर यूनिट व कलर व्हील के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार की शाम आचार्य सुमन चौक के समीप गीत एवं नाट्य प्रभाग परिसर में नाटक का मंचन किया गया. मशहूर कथाकार सआदत हसन मंटो की कहानी बादशाहत का खात्मा पर […]

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नाट्य मंचन में जुटे कलाप्रेमी

बादशाहत के अंत को किया जीवंत
दरभंगा : चर्चित नाट्य संस्था थियेटर यूनिट व कलर व्हील के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार की शाम आचार्य सुमन चौक के समीप गीत एवं नाट्य प्रभाग परिसर में नाटक का मंचन किया गया. मशहूर कथाकार सआदत हसन मंटो की कहानी बादशाहत का खात्मा पर आधारित इस नाटक में युवा रंग निर्देशक प्रकाश बंधु ने अपने अभिनय की छाप दर्शकों पर जोरदार तरीके से छोड़ी. संसाधन विहीन इस क्षेत्र में एकल अभिनय पर आधारित नाटक का मंचन कर न केवल अपने अंदर कूट-कूटकर भड़ी अभिनय क्षमता की छाप छोड़ी, बल्कि कम संसाधन में भी नाट्य मंचन की एक राह भी कलाकारों को दिखायी.
शाम ढलने के बाद नाटक आरंभ हुआ. जैसे-जैसे नाटक आगे बढ़ता गया, दर्शकों के जेहन में पुराने दिनों की याद ताजा होती चली गयी. वह जमाना आखों के सामने आ खड़ा हुआ, जब मोबाइल का युग नहीं था. महज टेलीफोन के सहारे लोग एक-दूसरे से बात किया करते थे. किस तरह बातचीत से ही दिल में प्रेम की नींव पड़ती है, किस तरह दिल के अरमान हिलारें लेने लगते हैं, किस तरह सपने के संसार में युवा दिल विचरण करने लगता है,
इन सभी भाव को प्रकाश बंधु ने बखूबी मंच पर उतार दिया. जिस दफ्तर का फोन आवाज की मोहब्बत को जन्म देता है, उसका वजूद समाप्त होते ही आरमानों का किला ध्वस्त हो जाता है. पात्र मंटो अपनी महबूब आवाज से बिछड़ने के गम में घुट-घुटकर अपने जिंदगी की बादशाहत का खात्मा कर देता है. इस पूरे भाव को मंच पर साकार कर प्रकाश ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी. निकिता गुप्ता ने दर्शकों की आखं से ओझल रहते हुए भी अपनी प्रभावशाली आवाज से उनके दिल में जगह बना लिया. वैसे श्याम कुमार सहनी की प्रकाश परिकल्पना,
भास्कर झा एवं रोहित वर्मा का पार्श्व ध्वनि संयोजन अभियन को प्रभावशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. प्रस्तुति में सुमित झा, दिवाकर झाश् प्रशांत कुमार झा, राजू कुमार रंजनश् उज्ज्वल राज, विक्रम कुमार ठाकुर, ओम प्रकाश सहनी आदि का अवदान भी उल्लेखनीय रहा. संचालन कम्लेंद्र चक्रपाणि ने किया. यहां बता दें कि 28 अगस्त की शाम इसी मंच पर प्रायश्चित नाटक का मंचन होगा.
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