परदेशियों का लौटना मुश्किल नहीं मिल रहा ट्रेनों में आरक्षण
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Jun 2016 8:04 AM (IST)
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रेलवे. लंबी दूरी की सभी गाड़ियोंे में आरक्षित िटकट का संकट दरभंगा : पंचायत चुनाव और गरमी छुट्टी में घर आये परदेशियों के लिए वापस लौटना मुश्किल हो गया है. लंबी दूरी की सभी ट्रेनें फुल चल रही हैं. आरक्षण नहीं मिल रहा. कई गाड़ियों की स्थिति तो इतनी खराब है कि अगस्त में जाकर […]
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रेलवे. लंबी दूरी की सभी गाड़ियोंे में आरक्षित िटकट का संकट
दरभंगा : पंचायत चुनाव और गरमी छुट्टी में घर आये परदेशियों के लिए वापस लौटना मुश्किल हो गया है. लंबी दूरी की सभी ट्रेनें फुल चल रही हैं. आरक्षण नहीं मिल रहा. कई गाड़ियों की स्थिति तो इतनी खराब है कि अगस्त में जाकर आरक्षण उपलब्ध हो रहा है. अब तो द्वितीय श्रेणी स्लीपर क्लास में भी इतनी भीड़ होती है कि परिवार के साथ सहजता से सफर कर पाना मुश्किल होता है.
आरक्षण नहीं मिलने के कारण यात्रियों के लिए तत्काल टिकट ही विकल्प बचा है, परंतु यह भी नहीं मिल पा रहा. महज एक से डेढ़ मिनट में तत्काल कोटे का बर्थ खत्म हो जाता है. दूसरे-तीसरे नंबर पर खड़े यात्री अपने किस्मत को रोते हुए वापस लौट जाते हैं. आलम यह है कि जरूरतमंद यात्री तत्काल टिकट के लिए कई-कई दिन रतजगा कर रहे हैं. यात्रा से 48 घंटे पहले कतार में खड़े हो जाते हैं. पूरे दिन, पूरी रात कतार में लगने के बाद जब काउंटर पर पहुंचते हैं तो वेटिंग आ जाने की सूचना मिलती है. लगातार 24 घंटे धूप,शीत में वक्त गुजारने वाले की परेशानी का अनुमान सहजता से लगाया जा सकता है.
एसी व स्लीपर श्रेणी के तत्काल बुकिंग का अलग-अलग समय
रेलवे ने यात्रियों की इस समस्या को कम करने के लिए एसी व स्लीपर श्रेणी के लिए तत्काल बुकिंग का समय अलग-अलग निर्धारित कर दिया है लेकिन भीड़ के कारण दबाव इतना अधिक है कि पहला टिकट उसी शर्त्त पर बनता है जब आरक्षण लेने वाले यात्री एक से दो होते हैं.
अगर चार यात्रियों का नाम दर्ज कर मांग पत्र पर दिया जाता है तो प्राय: बुकिंग क्लर्क द्वारा नाम भरते-भरते सारे सीट फुल हो जाते हैं. निराश होकर यात्री को लौट जाना पड़ता है. रेलवे ने यात्रियों केा लाभ देने के लिए एक सुविधा दी कि अब तत्काल टिकट में पहचान पत्र की डिटेल नहीं भरनी पड़ती लेकिन दूसरी ओर यात्रियों का पूरा नाम भरने का निर्देश देकर इससे बचने वाले समय को समाप्त कर दिया गया. लिहाजा लाभ के बदले हानिही हो रही है.
स्पेशल ट्रेनों में भी भीड़
रेलवे ने भीड़ को देखते हुए कई स्पेशल ट्रेन दिये हैं. लेकिन इसका भी भीड़ पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा. सुविधा स्पेशल में सफर करना आम यात्रियों की औकात से बाहर है. वहीं दूसरी ट्रेनों में पहले से ही बर्थ फुल चल रहा है. यह समस्या किसी एक रूट की नहीं है, कोलकाता को छोड़ सभी रूट में आरक्षण के लिए मारामारी है.
जेनरल बोगी में भी नहीं मिल रही जगह : दरभंगा से खुलने वाली लंबी दूरी की विभिन्न ट्रेनों में जेनरल बोगी में जगह नहीं मिल रही है. स्थिति यह है कि सैकड़ों यात्रियों को स्टेशन से बैरंग लौट जाना पड़ता है. खासकर दिल्ली, कोलकाता, अमृतसर, चेन्नई एवं मुंबई के साथ साथ अहमदाबाद जाने वाली ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ चल रही है. भीड़ का आलम यह रहता है कि यात्री जेनरल बोगी में शौचालय के पास बैठकर यात्रा करने को मजबूर हैं.
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