जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा आइंस्टाइन छात्रावास

Updated at :05 Dec 2015 6:45 PM
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जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा आइंस्टाइन छात्रावास

जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा आइंस्टाइन छात्रावास प्रशासनिक उपेक्षा का दंश क्षेल रहे छात्रफोटो- 17, 18 व 19परिचय- जर्जर आइंस्टाइन होस्टल भवन18- हॉस्टल में अव्यवस्थित विद्युत वॉयरिंग एवं लटका, फूटा पानी का पाइप दरभंगा . शहर का सीएम साइंस कॉलेज का ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय क्षेत्रान्तर्गत विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों के शीर्षस्थ प्राप्तांक वाले छात्रोंषसे बंद […]

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जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा आइंस्टाइन छात्रावास प्रशासनिक उपेक्षा का दंश क्षेल रहे छात्रफोटो- 17, 18 व 19परिचय- जर्जर आइंस्टाइन होस्टल भवन18- हॉस्टल में अव्यवस्थित विद्युत वॉयरिंग एवं लटका, फूटा पानी का पाइप दरभंगा . शहर का सीएम साइंस कॉलेज का ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय क्षेत्रान्तर्गत विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों के शीर्षस्थ प्राप्तांक वाले छात्रोंषसे बंद है. इसकी चिन्ता न छात्रावास अधीक्षक को है और न ही महाविद्यालय के प्रधानाचार्य को. यहां तक अधीक्षक का निरीक्षण भी नियमित रुप से नहीं होता है.इसके कारण छात्रावास में स्टडीपीरियड का कोई महत्व नहीं बनकर रह गया है. वहीं पूर्व में इस छात्रावास के छात्रों के लिए साप्ताहिक रुप से प्रधानाचार्य, शिक्षक एवं अधीक्षक की उपस्थिति में संडे स्पेशल करके क्लास चलाया जाता था. जो छात्रों के लिए काफी लाभकारी होता था. जो वर्षों से बंद है. इसमे क्लास के दौरान प्रधानाचार्यों, अधीक्षकों या शिक्षकों में से किसी एक की ओर से हिंदी या अंग्रेजी में बोलने के लिए विषय निर्धारित कर दिया जाता था. उस पर छात्रावास में रहनेवाले सभी छात्रों को बोलना होता था. इन छात्रों को कर्मियों की कमी के कारण भी कई समस्याएं झेलनी पड़ रही है. चार वार्ड सर्वेंट में तीन पद पर कोई नहीं हैं. इसके कारण छात्रों के रूमों कमी साफ सफाई प्रभावित हो रही है. वहीं दो गार्ड में से एक केवल नाइट गार्ड है जो अपनी उम्र का रोना रोकर निश्चिंत रहते हैं. नतीजा यह होता है कि न ही बाहरी लोगों को छात्रावास में आने जाने पंजी तैयार हो पाती है और न ही अपने छात्रावास के छात्रो की उपस्थिति पंजी ही विधिवत चल पाती है कि कौन छात्र कब और कहां गया. ऐसा नहीं होने से कभी भी महाविद्यालय और विश्वविद्यालय प्रशासन को होनेवाली परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यहां के स्वीपर को दोनों पद रिक्त हैं. इसके कारण शौचालय की स्थिति सफाई के अभाव में काफी बदत्तर है. जब छात्र अधीक्षक व प्रधानाचार्य से काफी शिकायत करते हैं, तो कभी माह में तो कभी 15 दिनों पर कॉलेज के स्वीपर से काम चलाया जा रहा है. इसमें भी समस्या को छात्रावास के दक्षिण निर्माणाधीन ऑडिटोरियम परिसर के कारण है. जहां अधिकांश समय स्थानीय असमाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है जो यहां खुलेआम तरीके से तरह तरह के नशीले पदार्थों का सेवन करते मारपीट करते रहते हैं. जिन्हें कई बार मना करने पर उन छात्रों को ही स्थानीय लोगों के साथ मिलकर मारने लगते हैं.

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