लोक संस्कृति से मिलती भारत की एकता की झलक
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Nov 2015 8:31 PM
दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीजी संगीत विभाग में रविवार से आगामी 1 दिसंबर तक चलने वाले तीन दिवसीय भारत लोकरंग महोत्सव का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो साकेत कुशवाहा ने किया. उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम के माध्यम से भारत की एकता की झलक दिखती […]
दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीजी संगीत विभाग में रविवार से आगामी 1 दिसंबर तक चलने वाले तीन दिवसीय भारत लोकरंग महोत्सव का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो साकेत कुशवाहा ने किया. उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम के माध्यम से भारत की एकता की झलक दिखती है.
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन में अन्य विभागों के छात्रों को भी शामिल करना चाहिए था ताकि इसके उद्देश्य का लाभ उन्हें भी मिल पाता. डॉ कुशवाहा ने कहा कि इस तरह के आयोजन की जानकारी अगर मुझे पूर्व से होती तो विश्वविद्यालय की ओर से सफल प्रतिभागियों को गोल्ड मेडल एवं स्कॉलरशिप का सहयोग पहुंचाता.
पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो प्रभाकर पाठक ने भारत की लुप्त हो रही लोक कला, लोक संगीत, लोक नाट्य आदि की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों को एक सूत्र में बांधने का ये सभी काफी हद तक सहायक होती है. इसमें आयी कमी से राज्यों की एकता पर खतरा उत्पन्न हो सकता है.
इजेडसीसी के प्रतिनिधि ई राजर्षि चंद्रा ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीजी संगीत विभाग में इसके साथ मिलकर भारत लोकरंग कार्यक्रम आयोजित करने का मौका दिये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त किया. कार्यक्रम को महाविद्यालय निरीक्षक डॉ श्याम चंद्र गुप्ता ने भी संबोधित किया.
वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संगीत विभागाध्यक्ष डॉ पुष्पम नारायण ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत करते हुए महोत्सव के उद्देश्य पर प्रकाश डाला. तीन दिवसीय कार्यक्रम विश्वविद्यालय की पीजी संगीत विभाग भारत सरकार की संस्कृति मंत्रालय के पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता व दक्षिणी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर ने संयुक्त रूप से किया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ पुष्पम नारायण ने किया.
उद्घाटन सत्र के उपरांत बिहार की लोक कला एवं धनौतिया विषय से संबंधित तकनीकी सत्र आयोजित किया गया. इसमें डॉ अशोक कुमार मेहता ने लोक कलाओं में खिस्सा-पिठानी को केंद्रित करते हुए लोक कथा एवं ग्रामीण संस्कृति पर प्रकाश डाला. डॉ लावण्या कीर्ति सिंह काव्या ने बिहार की संस्कृति में लोक संगीत एवं चुनौतियां विषय पर अपना पक्ष रखा.
वहीं कृष्ण कुमार कश्यप ने मिथिला चित्रकला एक सशक्त कला एवं चुनौतियां तथा प्रो रामचंद्र ठाकुर ने बिहार की सभी लोककलाओं पर चर्चा करते हुए अपना पक्ष रखा. मंच संचालन सागर कुमार सिंह ने किया. खबर लिखे जाने तक झारखंड की ओर से खरसावां छऊ नृत्य की प्रस्तुति हो रही थी इसके उपरांत राजस्थान की लोक नाट्य तोरा कलंगी का मंचन बांकी था.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










