संस्कारों को बचा कर ही अक्षुण्ण रखी जा सकती पहचान: यादव
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Nov 2015 8:48 PM
संस्कारों को बचा कर ही अक्षुण्ण रखी जा सकती पहचान: यादव मिथिला विभूति पर्व में हुआ पुस्तकों का विमोचनदरभंगा . मिथिला संघर्ष समिति, मिथिलांचल विकास परिषद व साक्षर दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे तीन दिवसीस मिथिला विभूति पर्व समारोह के अंतिम दिन बुधवार को मैथिली में रचित दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया. […]
संस्कारों को बचा कर ही अक्षुण्ण रखी जा सकती पहचान: यादव मिथिला विभूति पर्व में हुआ पुस्तकों का विमोचनदरभंगा . मिथिला संघर्ष समिति, मिथिलांचल विकास परिषद व साक्षर दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे तीन दिवसीस मिथिला विभूति पर्व समारोह के अंतिम दिन बुधवार को मैथिली में रचित दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया. दिग्घी पश्चिम स्थित मैथिली साहित्य परिषद कार्यालय परिसर में संपन्न इस कार्यक्रम में भौतिकी शास्त्र के शिक्षक डा सुदिष्ट मिश्र विरचित अतीत दर्शन व जगदीश प्रसाद मंडल की खसैत गाछ का विमोचन किया गया. इसमें साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित प्रो भीमनाथ झा ने कहा श्री मंडल ने अपनी इस पुस्तक में लघु कथाओं का समावेश किया है. शब्दों की बहुलता इनकी रचनाओं की मुख्य विशेषता है. मौके पर समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व कुलपति डा. रामवदन यादव ने कहा कि अपनी मातृभाषा व संस्कारों के बल पर ही हमारी अलग पहचान है. इसे बचाकर ही देश-दुनिया में हम बचा सकते हैं. इस अवसर पर डा. इंदिरा झा, शिव कुमार मिश्र, रमेश, मनोज, मिहिर कुमार, कपिलेश्वर रावत आदि ने भी विचार रखे. कमलेश झा के संयोजन में संपन्न इस तीन दिनी समारोह में सुरेंद्र नाथ, चंदन कुमार झा, उमेश मंडल, अशोक कुमार चौधरी, जय शंकर मंडल, नारायणजी चौधरी, डा. विद्यानाथ झा आदि प्रमुख थे. धन्यवाद ज्ञापन डा. मंजर सुलेमान ने किया.
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