साम-चक, साम-चक अबिहऽ हे, अबिहऽ हे

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Nov 2015 6:58 PM

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साम-चक, साम-चक अबिहऽ हे, अबिहऽ हे परंपरानुरूप दी गयी भगवती सामा को विदाईसमादउन के कारू णिक स्वर से गमगीन हुआ वातावरणफोटो. परिचय. दरभंगा . भाई-बहन के अनूठे प्रेम का प्रतीक लोकपर्व सामा-चकेबा भगवती सामा की विदाई के साथ संपन्न हो गया. बहनाें ने गीली पलकों से उन्हें विदा किया. भाई ने तैयार डोला पर रख […]

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साम-चक, साम-चक अबिहऽ हे, अबिहऽ हे परंपरानुरूप दी गयी भगवती सामा को विदाईसमादउन के कारू णिक स्वर से गमगीन हुआ वातावरणफोटो. परिचय. दरभंगा . भाई-बहन के अनूठे प्रेम का प्रतीक लोकपर्व सामा-चकेबा भगवती सामा की विदाई के साथ संपन्न हो गया. बहनाें ने गीली पलकों से उन्हें विदा किया. भाई ने तैयार डोला पर रख उनकी प्रतिमा को जल प्रवाहित किया. इसको लेकर घरों में चहल-पहल बनी रही. देर रात तक विदाई गीत के बोल वातावरण मेें घुलते रहे. कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भगवती सामा को विदा किया गया. सप्तमी तिथि को घर आयी सामा के साथ हंसी-खुशी समय गुजारने वाली बहनों का चेहरा विदाई के मौके पर उतर आया. बुधवार की सुबह से ही घरों में चहल-पहल बनी रही. सामा को विदा करने की तैयारी में बहनें जुटी रही. मिथिला की परंपरा के अनुरूप विदाई में दिये जानेवाले सामान का प्रबंध करती रही. तैयारी पूरी करने के बाद शाम ढलते ही विदाई की तैयारी आरंभ हो गयी. भगवती सामा की प्रतिमा को नई सारी अर्पित की गयी. सारी के आंचल में खोंइछा दिया गया. इसके बाद उन्हें चूरा-दही, मिठाई आदि का भोग लगाया गया. इसके बाद धन-धान्य से सदैव भंडार परिपूर्ण रखने की मंगलकामना के साथ भाइयों का फांर भरा. इधर सुबह से भाई भी बहन की प्रतीक भगवती सामा की विदाई की तैयारी में लगे नजर आये. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में इसको लेकर विशेष उत्साह नजर आया. केले थंब को मिलाकर डोला बनाया गया. इसे बांसा की कमची से महफा का स्वरूप दिया गया. रंग-बिरंगे कागज व कपड़ों से इसे सजाया गया. इसके बाद इसमें सामा की मूर्ति रखी गयी. मूर्ति के सामने दीये जलाये गये. इसके बाद सिर पर डोला उठाया. बहनों की टोली भी साथ हो गयी. विदाई गीत समादाउन गाना शुरू जैसे ही किया वातावरण में उदासी सी छा गयी. बहनों की पलकें नम हो गयी. गला भर्रा गया. इसके साथ ही परंपरागत गीत के बोल से भी वातावरण अनुगूंजित होते रहे. साम-चक, साम-चक अबिहऽ हे, अबिहऽ हे…गीत से पुन: आगमन का आशीष मांगा. प्रतिमा को जल प्रवाहित कि ये जाने के साथ ही लोकपर्व संपन्न हो गया.

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