धाना का न्यूनतम समर्थन नहीं मिलना बना चुनावी मुद्दा

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धाना का न्यूनतम समर्थन नहीं मिलना बना चुनावी मुद्दा लक्ष्य के अनुसार नहीं हुई खरीदारी, किसानों को नहीं मिला लाभबहेड़ी. किसानों को धान का सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त नहीं होना चुनावी मुद्दा साबित हो सकता है. वित्तीय वर्ष 2014- 15 में इस प्रखंड के लिए विभिन्न पैक्स एवं व्यपार मंडल के धान […]

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धाना का न्यूनतम समर्थन नहीं मिलना बना चुनावी मुद्दा लक्ष्य के अनुसार नहीं हुई खरीदारी, किसानों को नहीं मिला लाभबहेड़ी. किसानों को धान का सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त नहीं होना चुनावी मुद्दा साबित हो सकता है. वित्तीय वर्ष 2014- 15 में इस प्रखंड के लिए विभिन्न पैक्स एवं व्यपार मंडल के धान अधिप्राप्ति केंद्रों के माध्यम से 63 हजार क्विंटल धान की खरीदारी का लक्ष्य निर्धारित था. इस लक्ष्य के विरुद्ध मात्र 51310़83 क्विंटल की खरीदारी हुई. जिसमें मात्र 17834़03 क्विंटल धान नोडल एजेंसी एसएफसी ने लिया. जबकि 33476़80 क्विंटल धान विभिन्न अधिप्राप्ति केन्द्रों में छोड़ दिया गया. अवशेष धान का उठाव करने की मांग को लेकर मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान, पैक्स अध्यक्ष एवं किसानों ने प्रतिष्ठान के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुमार चौधरी के नेतृत्व में विभिन्न चरणों में बीडीओ कार्यालय से जिला एसएफसी कार्यालय एवं समाहरणालय पर धरना प्रदर्शन तथा धान जलाओ कार्यक्रम का आयोजन कर इस समस्या की ओर सरकार एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट करा गया. इन कार्यक्रमों के आलोक में डीएम के निर्देश पर वरीय उपसमार्हता के नेतृत्व में गठित प्रशासनिक पदाधिकारियों की एक टीम ने धान अधिप्राप्ति केन्द्रों का भौतिक सत्यापन कर 51310़83 क्विंटल के विरुद्ध मात्र 32187़ 03 क्विंटल की खरीदारी का जांच प्रतिवेदन जमा किया. इस प्रतिवेदन के अनुसार मात्र 14352 क्विंटल धान का अधिप्राप्ति केन्द्रों में अवशेष रहने की बात स्वीकारी गयी. जिसे राईस मिल से टैग कर दिया गया. जबकि 19123़80 क्विंटल धान विभिन्न अधिप्राप्ति केन्द्रों पर असुरक्षित स्थिति में सड़ने के लिए छोड़ दिया गया. कुछ पैक्सों ने संबंधित कृषकों को लिया गया धान वापस कर दिया. जिसे किसानों ने औने पौने दाम पर बेचा. जिसके कारण किसानों को लागत से भी कम मूल्य पर बेचने से भारी आर्थिक परेशानी उठानी पड़ी. पघारी के प्रभावित किसान सरोज यादव, सनखेरहा के रामनंदन ठाकुर, ठाठोपुर के सुशील कुमार सिंह, रुपोलिया के बैघनाथ मंडल, बिठौली के कर्मचन्द्र राय सहित अन्य ने अपने साथ हुई नाइंसाफी का जबाव इस विधान सभा चुनाव में खड़े विभिन्न दलों के उम्मीदवारों से मांग रहे हैं.

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