बड़े-बच्चों की सेहत से हो रहा है खिलवाड़
बड़े-बच्चों की सेहत से हो रहा है खिलवाड़ फोटो संख्या:परिचय:शहर में पार्क की बेहद कमीकई पार्क प्रतिबंधित व अनुपयोगीविकसित करने में प्रशासनिक व राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमीजलजमाव वाले क्षेत्र को विकसित कर बनाया जा सकता है पार्कदरभंगा. स्कूलों के लम्बी छुट्टी का पूरा मजा बच्चे नहीं उठा पा रहें है. प्रत्येक दिन स्कूल के बोझिल […]
बड़े-बच्चों की सेहत से हो रहा है खिलवाड़ फोटो संख्या:परिचय:शहर में पार्क की बेहद कमीकई पार्क प्रतिबंधित व अनुपयोगीविकसित करने में प्रशासनिक व राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमीजलजमाव वाले क्षेत्र को विकसित कर बनाया जा सकता है पार्कदरभंगा. स्कूलों के लम्बी छुट्टी का पूरा मजा बच्चे नहीं उठा पा रहें है. प्रत्येक दिन स्कूल के बोझिल समय को झेलने के बाद ये मासूमों को सुकून का समय खेल-कूद एवं अन्य मनोरंजन के साधनों के साथ छुट्टी में बीताना चाहते हैं. किन्तु शहर के विभिन्न इलाकों में पार्क के अभाव के कारण इन स्कूली बच्चों का समय काटे नहीं कट रहा है. दूसरी ओर शहर के इन बच्चों को टीवी-कम्प्यूटर से चिपके रहने कि मजबूरी बनी हुई है. इस संबंध में विशेषज्ञों की स्पष्ट राय है कि ज्यादा देर तक इन चीजों के इस्तेमाल से बच्चों में अवसाद आता है, जो उनके मानसिक विकास के लिए अच्छा नहीं है. राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा की रूपरेखा 2005 एवं बिहार की पाठयचर्चा की रुपरेखा 2008 में भी स्पष्ट उल्लेख है कि पाठयचर्चा सहगामी प्रक्रिया बच्चों के मानसिक विकास के लिए आवश्यक है. स्कूलों में तो जगह के अनुसार कुछ न कुछ खेल-कूद गतिविधियां हो जाती है, किन्तु जैसे ही विद्यालय में लम्बी छुट्टी होती है इन गतिविधियों मेे शामिल नहीं हो पाते तथा इस अवधि में मनोरंजन के लिए उनकी निर्भरता कम्प्यूटर-टीवी तक सिमट जाती है. इस तरह कि स्थिति शहर में रहने वाले करीब 50 हजार बच्चों की है.बड़े-बूढ़ों की सेहत से भी हो रहा है खिलवाड़ऐसा नहीं कि खेल-कूद के लिए बच्चों को ही पार्क की जरूरत है, बल्कि बड़े-बढ़ों की सेहत के लिए मॉर्निंग वाॅक को आवश्यक बताया जाता है. किन्तु दरभंगा शहर का दुर्भाग्य है कि इस तरह के पार्क की सुविधा नहीं है. इस कारण चाहकर भी सड़कों पर मॉर्निंग वाॅक करना पड़ता है. इस कारण दुर्घटना की संभावना बनी रहती है.मधुमेह मरीजों के लिए बन रहा है मौत का कारणशहर की भाग दौड़ की जिन्दगी में तनाव होना लाजमी है. यह मधुमेह का एक कारण बनता है तथा इस की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही. चिकित्सक भी इस पर नियंत्रण के लिए सुबह टहलने को आवश्यक बताते हैं, किन्तु शहर में जो भी पार्क है उसे या तो सुरक्षित कर दिया गया है अथवा इसकी स्थिति दयनीय है, जिसका उपयोग नहीं किया जा सकता.शहर में पार्क कि स्थितिशहर के गली-मुहल्लों में पार्क की बेहद कमी है. किन्तु जो भी पार्क है वे या तो आमजनों के लिए नहीं है या फिर रखरखाव पर ध्यान नहीं देने की वजह से टहलने लायक नही है. डीएमसी का पार्क पहले आमजनों के लिए खुला था जिसके आसपास के करीब 500 व्यक्ति प्रतिदिन सुबह में टहलने आते थे, किन्तु कुछ दिन पूर्व इसे आमजन के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया. म्यूजियम, नगर निगम, रोटरी क्लब का चिल्ड्रेन पार्क बच्चों के लिए पर्याप्त नहीं है. ऐसा नहीं है कि शहर में ऐसे स्थान नहीं है, जिसे पार्क के रूप में डेवलप नहीं किया जा सकता, किन्तु प्रशासनिक एवं राजनीतिक स्तर पर इस पर अपेक्षित ध्यान नहीं देने के कारण ऐसी स्थिति बनी हुई है. जबकि शहर को विकसित करने के लिए इस मानक पर भी ध्यान देने की जरूरत है ताकि जिन्दगी का दो पल ही सही खुले मैदान में सुकून से कट सके.राज मैदान व विश्वविद्यालय मैदान ही एक सहाराशहरवासियों के लिए राज मैदान एवं विश्वविद्यालय मैदान ही एक मात्र सहारा है. इस मैदान में प्रत्येक दिन सैकड़ोें लोग सुबह-शाम टहलने आतें है. लेहरियासराय, अल्लपटटी, बलभद्रपुर, बेंता आदि स्थानों के बड़े-बच्चों के लिए इन स्थानों का उपयोग संभव नहीं हो पाया.
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