कई मायने में यादगार बनेगा चुनाव
कई मायने में यादगार बनेगा चुनाव हुक्मरानों की कार्यशैली रही चर्चा मेंदरभंगा. इस बार के विधानसभा चुनाव की एक अलग खासियत है. इस खास बात के कारण यह चुनाव एक अलग तरह का दिख रहा है. यूं तो चुनावी रणभेरी बजने के साथ ही विभिन्न स्थापित दलों में टिकट को ले रस्सा कसी शुरू हो […]
कई मायने में यादगार बनेगा चुनाव हुक्मरानों की कार्यशैली रही चर्चा मेंदरभंगा. इस बार के विधानसभा चुनाव की एक अलग खासियत है. इस खास बात के कारण यह चुनाव एक अलग तरह का दिख रहा है. यूं तो चुनावी रणभेरी बजने के साथ ही विभिन्न स्थापित दलों में टिकट को ले रस्सा कसी शुरू हो गयी थी. अंतत: कई ऐसे दल थे, जिन्होंने अपने प्रत्याशी के नाम उजागर नहीं किये. सीधा नामांकन करने के लिए प्रत्याशी को भेज दिया. यह किसी खास वजह से शायद पार्टी हुक्मरानों ने किया है. लेकिन दलीदय प्रतिबद्धता से बंधे कार्यकर्त्ता इस वजह को खूब भांप रहे हैं. उनकी माने तो पार्टी के आलाकमान को कार्यकर्त्ताओं में वो खास वजह नहीं दिखी है. इस मामले में तरह तरह की बातें आम लोगों के बीच फैल रही है.उपेक्षा का दिखेगा असर!चुनावी थर्मामीटर का पारा अभी चढ़ ही रहा है. चर्चा है कि पारा चढ़ने के साथ साथ पार्टी कार्यकर्त्ताओं की उपेक्षा का दंश भी बढ़ेगा. राजनीतिक पंडितों की नजर मेें कार्यकर्त्ताओं की उपेक्षा में प्राय: हर दल की भूमिका है. कोई भी दल इसस अछूता नहीं रहा. जबरन थोपे गये प्रत्याशियों पर जनता कितना भरोसा जताया है, यह तो परिणाम बताएगा. लेकिन इसकी बानगी नामांकन के क्रम में दृष्टिगोचर हुई. तकरीबन हर विधानसभा क्षेत्र में विक्षुब्धों या बागी उम्मीदवारों ने नामांकन कर दस्तक दे दी है. चाहे वह हायाघाट विधानसभा क्षेत्र हो या दरभंगा विधानसभा क्षेत्र. कमोबेश ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र या फिर अन्य विधानसभा क्षेत्र कई अन्य प्रदेश के क्षेत्रीय दलोंं कि दिखी धमकअबकी विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय दल और प्रदेश के स्थापित दलों के अतिरिक्त दूसरे प्रदेशों के क्षेत्रीय दलों की धमक भी दिखी. पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), भारतीय जनहित दल, राष्ट्रीय जनक्रांति पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अंबेदकर), नेशनल रोड मैप पार्टी ऑफ इंडिया, लोकप्रिय समाज पार्टी, शिवसेना, आरक्षण विरोधी पार्टी, राष्ट्रीय बंधुत्व पार्टी, जनवादी पार्टी(सोसलिस्ट), नेशनल जनता पार्टी (आइ) के झंडे व चिह्न के साथ नामांकन किया गया है. हालांकि विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाची पदाधिकारी का कहना है कि उन्हें चिह्नित किये गये राष्ट्रीय दल और क्षेत्रीय दलों को आवंटित चुनाव चिह्न के आधार पर चुनाव चिह्न निर्गत करना है. शेष को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मेेें चुनाव चिह्न आवंटित किया जायेगा.
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