सड़क बनी ही नहीं, तो वोट क्यों?

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सड़क बनी ही नहीं, तो वोट क्यों? चुनाव में बना मुद्दाफोटो-1परिचय- चौपाल में अपनी समस्या बताते लोग.सदर. सड़क नहीं तो वोट क्यों?. राशन केरोसिन के भी लाले पड़े हैं. मंगलवार को बिजली पंचायत में लगे चुनावी चौपाल में कई मुद्दे सामने आये. चौपाल में शामिल महादलित परिवार के लोगों ने अपनी-अपनी समस्याएं रखी. सभी का […]

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सड़क बनी ही नहीं, तो वोट क्यों? चुनाव में बना मुद्दाफोटो-1परिचय- चौपाल में अपनी समस्या बताते लोग.सदर. सड़क नहीं तो वोट क्यों?. राशन केरोसिन के भी लाले पड़े हैं. मंगलवार को बिजली पंचायत में लगे चुनावी चौपाल में कई मुद्दे सामने आये. चौपाल में शामिल महादलित परिवार के लोगों ने अपनी-अपनी समस्याएं रखी. सभी का एक ही स्वर में कहना था कि जो हमारी समस्या दूर करेगा उसी को वोट देंगे, वरना वोट नहीं करेंगे. करीब 14-15 हजार की आबादी वाले इस पंचायत में मात्र 7 हजार 500 वोटर हैं. वर्त्तमान में 320 परिवारों को अंत्योदय, 1267 बीपीएल को अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है. दर्जनों परिवार ऐसे हैं जिन्हें इससे पूर्व केराेसिन व अनाज मुहैया करया जा रहा था. इस वर्ष उन सभी का नाम सूची से हटा दिया गया है. हालांकि छूटे परिवारों का आवेदन भी सरकारी कार्यालय में जमा कराया गया है. कहते हैं ग्रामीण खरथुआ महादलित टोला निवासी सितिया देवी आक्रोशित हो नेताओं को कोसने लगी. उनका कहना था कि चापाकल नहीं है. पड़ोसी के यहां से पानी लाना पड़ता है. रहने के लिए घर नहीं है, तो वोट क्यों करेंगे. कबुतरी देवी ने कहा कि अंत्योदय का कूपन नहीं मिला है. जिसके कारण अनाज नहीं मिलता है. हम वोट नहीं करेंगे. अंजू देवी का कहना है कि घर नहीं तो वोट नहीं. वहीं रीता देवी ने राजनेता व जिला प्रशासन पदाधिकारी को कोसते हुए कहा कि पूर्व में परिवार के 7 सदस्यों को अनाज मिलता था. इस बार काटकर 5 कर दिया गया है.सिया देवी ने तो चापाकल नहीं रहने व शौचालय की कमी को लेकर नेताओं को सबक सिखाने की बात कही. चौपाल में बिंदेश्वर सदा ने कहा कि सर घर भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गया. प्रखंड कार्यालय में आवेदन दिया है. लेकिन अभीतक घर बनाने के लिए पैसा नहीं मिला है. बेघर होकर बाल बच्चों के साथ समय बिताना पड़ रहा है. रामवृक्ष सदा (65) वर्ष के वृद्ध का कहना था कि उन्हें अभीतक पेंशन नहीं मिल रहा है. वे दो वर्षों से प्रयास कर रहे हैं. उपेंद्र सदा को अपनी जमीन नहीं है. गंगाराम सदा का कहना है कि वर्ष 1987 मेंं प्रशासन द्वारा 15 से अधिक परिवारों को बसाया गया, लेकिन इतने दिनों बाद भी घर से निकलने का रास्ता नहीं दिया गया है. चारों ओर के जमीन मालिक आये दिन रास्ता बंद कर देते हैं. इधर उमेश सदा, राजेश सदा, किशुनदेव सदा, हुकुमदेव सदा व कुंती देवी सभी ने अपनी पीड़ा सुनायी. सभी की एक ही समस्या थी. उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान नहीं होगा तो वोट नहीं करेंगे. 1. सड़क के मुद्दे पर घेरेंगे खरथुआ के लोग2. महादलित टोले मेें सड़क व पानी नहीं3. राशन केराेसिन कूपन से सभी परिवार वंचित4. अधिकांश को अपना घर नहीं5. शौचालय नहीं होने की समस्या

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