बाबा नागार्जुन ने समतामूलक समाज निर्माण में होम किया जीवन

ब्राह्मणवाद, सामंतवाद और पूंजीवाद के खिलाफ आजीवन लड़ी लड़ाई कबीरचक में नागाजुर्न नगरका लगाया गया बोर्ड दरभंगा : जनकवि बाबा नागार्जुन की पुण्य तिथि पर मंगलवार को कबीरचक में नागार्जुन नगर के बोर्ड का उद्घाटन किया गया. मौके पर जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि बाबा नागार्जुन […]
ब्राह्मणवाद, सामंतवाद और पूंजीवाद के खिलाफ आजीवन लड़ी लड़ाई
कबीरचक में नागाजुर्न नगरका लगाया गया बोर्ड
दरभंगा : जनकवि बाबा नागार्जुन की पुण्य तिथि पर मंगलवार को कबीरचक में नागार्जुन नगर के बोर्ड का उद्घाटन किया गया. मौके पर जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि बाबा नागार्जुन ने आजीवन क्रांति, समता, प्रगति और जनवाद जैसे शब्दों से काम लिया और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए भारतीय क्रांति की खोज में अपना सब कुछ होम कर दिया. इसलिए उनके नाम पर मुहल्ला का नामकरण करना गौरव की बात है.
पूसा कृषि विश्वविद्यालय के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर डॉ राम नारायण यादव ने कहा कि अंधविश्वास, अंधराष्ट्रवाद और ब्राह्मणवादी कर्मकांड से मुक्ति पाने के लिए बाबा के साहित्य को पढ़ना और उनके विचारों को आत्मसात करना जरुरी है. डॉ मिथिलेश कुमार यादव ने कहा कि बाबा का जन्म ब्राह्मण परिवार में ही हुआ था, किन्तु उन्होंने ब्राह्मणवाद, सामंतवाद और पूंजीवाद के खिलाफ आजीवन जान को जोखिम में डाल कर संघर्ष किया.
जसम के जिला सचिव डॉ रामबाबू आर्य ने कहा कि बाबा नागार्जुन शोषण और दमन पर आधारित सत्ता संस्कृति से सीधा मुठभेड़ करते थे. कार्यक्रम में पवन कुमार यादव, इंद्रदेव कुमार, डॉ शिव नारायण यादव, शंभू शरण राकेश, ललन कुमार सिंह, प्रवीण कुमार, जयंत जगदीश, डॉ बिंदॆश्वर यादव, सुरेंद्र कुमार सुमन, संदीप देवगण, मो. राजा, लक्ष्मी यादव और नरेश शर्मा आदि ने भी विचार रखा. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ राम अवतार यादव और प्रधानाचार्य डॉ शिव नारायण यादव ने की.
नागार्जुन ने अपनी रचनाओं में मानव जीवन के सच को निर्भीकतापूर्वक किया चित्रण: दरभंगा. मिथिला विकास संघ की ओर से वैद्यनाथ मिश्र यात्री (नागार्जुन) की पुण्यतिथि पर विश्वविद्यालय परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर संकल्प सभा का आयोजन किया गया. सरफराज अनवर के अध्यक्षता में आयोजित संकल्प सभा में संघ के पूर्व महासचिव सुजीत कुमार आचार्य ने कहा कि बाबा नागार्जुन अपनी रचनाओं में मानव जीवन के सच को निर्भीकतापूर्वक चित्रण करते थे.
इस क्रम में वे सत्ता और विपक्ष की परवाह नहीं करते थे. मृत्युंजय मृणाल ने उन्हें प्रतिरोध की संस्कृति का कवि बताया. कहा कि उनकी रचनाएं हमेशा शोषित, पीड़ित मानवता का मार्गदर्शन करती रही. आनंद ठाकुर ने कहा कि बाबा का नाम अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर है. उनकी रचना जन-जन से जुड़ाव रखने वाली है. अन्य वक्ताओं में विकास, आनंद मोनू ,चंद्रशेखर झा, अजय कुमार झा, दीपक मंडल आदि प्रमुख थे.
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