इलाज को भटकते रहे मरीज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Jun 2017 4:57 AM (IST)
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हड़ताल. शहर के निजी क्लिनिक व नर्सिंग होम रहे बंद आइएमए के आह्वान पर मंगलवार को बंद रहे निजी चिकित्सा संस्थान डीएमसीएच में उमड़ी मरीजों की भारी भीड़ दरभंगा : आइएमए के आह्वान पर मंगलवार को शहर के निजी क्लिनिक एवं नर्सिं होम बंद रहे. इससे मरीजों एवं परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना […]
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हड़ताल. शहर के निजी क्लिनिक व नर्सिंग होम रहे बंद
आइएमए के आह्वान पर मंगलवार को बंद रहे निजी चिकित्सा संस्थान
डीएमसीएच में उमड़ी मरीजों की भारी भीड़
दरभंगा : आइएमए के आह्वान पर मंगलवार को शहर के निजी क्लिनिक एवं नर्सिं होम बंद रहे. इससे मरीजों एवं परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. परिजन गंभीर मरीजों को लेकर दर-दर की ठोकर खाते रहे. उन्हें यह तक बताने वाला कोई नहीं था कि आखिर निजी चिकित्सा संस्थान बंद क्यों है. जैसे-जैसे लोगों को जानकारी मिलती गयी, लोग डीएमसीएच की ओर निकलते गये. वहीं कई तो निराश होकर वापस घर चले गये. अगले दिन आने की बात कहते हुए.
निजी नर्सिंग होम में मरीजों को नहीं किया गया भरती : सुबह से ही निजी नर्सिंग होम का दरवाजा मरीजों के लिए बंद कर दिया गया था. चिकित्सक चेंबर में ताला लटक रहा था. गंभीर मरीजों के पहुंचने पर भी उन्हें वापस किया जाता रहा. नगर स्थिति करीब दो सौ निजी नर्सिंग होम का यही हाल रहा. कई नर्सिंग होम पर बकायदा सूचना तक लगा दी गयी थी कि आज मरीजों का इलाज नहीं होगा. अधिकांश नर्सिग होम पर दोपहर तक मरीज कर्मियों से गुहार लगाते देखे गये.
डीएमसीएच में सुबह से लग गयी लंबी लाइन : डीएमसीएच में सुबह से ही मरीजों की लंबी लाइन देखी गयी़ अन्य दिनो की अपेक्षा अस्पताल का अलग ही माहौल था. अस्पताल का पूरा परिसर मरीज एवं परिजनों से भरा-भरा था. ओपीडी में चिकित्सक मरीजों को देखने में व्यस्त थे़ अन्य दिनों की अपेक्षा मरीजों का दवाब अधिक होने के कारण चिकित्सक तथा कर्मी लगातार कार्यरत देखे गये. बावजूद दर्जनों मरीजों को यहां से भी निराश लौट जाना पड़ा.
हड़ताल का बहाना बना कर मरीजों को किया वापस : कुछ चिकित्सकों एवं कर्मियों ने मरीजों को यह कहते हुए वापस कर दिया कि हड़ताल है. इसका विरोध करने पर भी बात नहीं बनी. वस्तुत: मरीजों की अधिक संख्या देख चिकित्सक परेशान थे. मरीजों का प्रेसर कम करने के लिए हड़ताल का बहाना बनाया गया. सबसे अधिक मेडीसीन विभाग में मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी़ हड़ताल के नाम पर चिकित्सक अपने चेम्बर में आराम फरमा रहे थे़ चेम्बर में पहुंचने पर परिजनों को डाक्टर ने डांटकर भगा रहे थे.
निजी क्षेत्र में पहले से प्रस्तावित हड़ताल की जानकारी होने के बाद भी संभावित भीड़ को देखते हुये डीएमसीएच प्रशासन द्वारा मरीजों की सुविधा के लिये कोई व्यवस्था नहीं की गयी थी़ यही कारण रहा कि काफी संख्या में मरीजों को डीएमसीएच से भी निराश होकर वापस लौट जाना पड़ा.
क्या है मामला : आइएमए का कहना है कि चिकित्सकों एवं चिकित्सा संस्थानों पर हिंसा एवं उपद्रव के खिलाफ कड़ा कानून बने. मेडिकल छात्रों पर नेशनल एक्जिट टेस्ट के प्रस्ताव को खारिज किया जाय. चिकित्सकों एवं प्रतिष्ठानों का रजिस्ट्रेशन एकल विन्डो सिस्टम से किया जाय. चिकित्सकों को पर्चा लिखने का अधिकार हो. एलोपैथिक दवाओं का पर्चा लिखने का अधिकार सिर्फ एलोपैथिक चिकित्सकों एमबीबीएस व बीडीएस को रहे. हेल्थ सेक्टर का बजट एक प्रतिशत से बढ़कर ढ़ाई प्रतिशत किया जाय.
निजी क्लिनिक के बाहर निराश बैठे मरीज और उनके परिजन व डीएमसीएच में लाइन लगा कर बैठे मरीज.
निजी क्लिनिक और नर्सिंग होम की बंदी पूर्णत: सफल रही. इसके लिये जिले के तमाम चिकित्सक एवं नर्सिंग होम संचालक धन्यवाद के पात्र हैं. सरकार अगर मांगें नहीं मानेगी तो आइएमए 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएगा.
डॉ कन्हैयाजी झा, सचिव, आईएमए
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