विद्यालय में बच्चों को नहीं मिलीं किताबें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

Published at :07 Jun 2017 4:56 AM (IST)
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विद्यालय में बच्चों को नहीं मिलीं किताबें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

पर लगा प्रश्नचिह्न दो माह बाद भी लाखों बच्चे पुस्तक विहीन दरभंगा : शिक्षा का अधिकार एवं सर्व शिक्षा अभियान के तहत जब से प्रारंभिक विद्यालयों में नि:शुल्क पुस्तक उपलब्ध कराया जाने लगा है तब से छात्रों को कभी भी शैक्षिक सत्र के प्रारंभ में पुस्तकें हाथ में नहीं आयी. किसी-किसी कक्षा का पूरा सेट […]

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पर लगा प्रश्नचिह्न

दो माह बाद भी लाखों बच्चे पुस्तक विहीन
दरभंगा : शिक्षा का अधिकार एवं सर्व शिक्षा अभियान के तहत जब से प्रारंभिक विद्यालयों में नि:शुल्क पुस्तक उपलब्ध कराया जाने लगा है तब से छात्रों को कभी भी शैक्षिक सत्र के प्रारंभ में पुस्तकें हाथ में नहीं आयी. किसी-किसी कक्षा का पूरा सेट भी नहीं मिलता रहा. किसी-किसी सत्र में तो ऐसी स्थिति रही कि पूरा सत्र बीतने पर भी सभी विषयों की पुस्तकें छात्रों को नहीं मिल सकी. बिना पुस्तक की पढ़ाई, किस प्रकार हुई होगी, इसका अनुमान लगाना कठिन नहीं होगा.
इस बार की स्थिति तो और चिंताजनक है. अभी तक छात्रों को पुस्तकें मिलेगी या फिर इस एवज में राशि, यह विचाराधीन है. जिले के छह लाख छात्रों को कब तक पुस्तकें मिलेगी कहा नहीं जा सकता. ऐसे में इन बच्चों को किस प्रकार गुणवत्ता शिक्षा दी जा सकती है, यह गंभीर का विषय है.
बाजार में उपलब्ध नहीं हैं पुस्तकें: जब से कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक देने का प्रावधान हुआ है, तब से इन कक्षाओं की पुस्तकें बाजार में उपलब्ध नहीं रहती है. किसी भी बुक स्टॉल पर इन कक्षाओं की पुस्तकें नहीं मिलती है. कोई भी प्रकाशन की किताबें इन कक्षाओं का नहीं मिलता है. जब पुस्तक के खरीददार ही नहीं होंगे तो कौन इन पुस्तकों को बाजार में उतारने को तैयार होगा. यह स्थिति इस बार की भी है.
पुरानी पुस्तकों से सत्र शुरू करने का आदेश जारी : विभाग ने पुरानी पाठ्य पुस्तकों से इस शैक्षिक सत्र का पठन-पाठन शुरू करने का निर्देश दिया. विद्यालय में जब इन पुस्तकों का परीक्षा के समय लेने का सिलसिला शुरू हुआ तब पता चला कि 10-20 फीसदी पुस्तकें ही जमा हुई. वह भी फटेहाल स्थिति में. किसी पुस्तक में प्रारंभ के पन्ने फटे हैं तो किसी में अंत के कई पाठ गायब मिले. इन पुस्तकों से किस प्रकार से नई ऊर्जा के साथ बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है. समझना सहज होगा. विशेषज्ञों की माने तो नई कक्षा में बच्चों को नई पुस्तकें उनमें पढ़ने की ललक पैदा करता है.
पुस्तक वितरण में लोचा : पुस्तकों का वितरण स्कूल प्रबंधन के लिए चुनौती है. ये पुस्तकें किन-किन बच्चों को दिया जाये यह बड़ी समस्या बनी हुई है. किसी भी विवाद से बचने के लिए अधिकांश विद्यालयों में शैक्षिक सत्र के दो माह बीतने के बावजूद जस की तस स्थिति बनी है. पुस्तकें कार्यालय की शोभा बढ़ा रही है. कई प्रधानाध्यापकों का कहना है कि इस मामले को लेकर कब किताब से वंचित छात्र के अभिभावक अनावश्यक हंगामा कर दें कहा नहीं जा सकता. इस भय से वे इसका वितरण नहीं कर पा रहे हैं.
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