बिहार में धान खरीद में सामने आया करोड़ों का फर्जीवाड़ा, अब होगी हाइ लेबल जांच
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 06 Aug 2021 11:45 AM
जिले में धान खरीद में करोड़ों का घोटाला उजागर हुआ है. अकेले विजयीपुर व्यापार मंडल में करोड़ों की हेराफेरी सामने आयी है. किसानों से कागज में धान खरीदा गया, कागज में ही मिलरों ने चावल तैयार किया और एसएफसी को उपलब्ध करा दिया गया.
संजय कुमार अभय, गोपालगंज. जिले में धान खरीद में करोड़ों का घोटाला उजागर हुआ है. अकेले विजयीपुर व्यापार मंडल में करोड़ों की हेराफेरी सामने आयी है. किसानों से कागज में धान खरीदा गया, कागज में ही मिलरों ने चावल तैयार किया और एसएफसी को उपलब्ध करा दिया गया.
विजयीपुर व्यापार मंडल में किसानों को धान का भुगतान भेजने के साथ ही उसे अध्यक्ष के बेटे और करीबियों के खाते में वापस करा लेने और राइस मिलों के खाते में राशि ट्रांसफर करने का साक्ष्य मिला है.
मामला सामने आने के बाद डीएम डॉ नवल किशोर चौधरी ने जांच का आदेश दिया है. कई धान क्रय केंद्रों में बड़े पैमाने पर इसी तरह का खेल किया गया है. जांच हुई तो करोड़ों का घोटाला सामने आने के साथ ही क्रय केंद्रों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं.
विजयीपुर व्यापार मंडल ने ऐसे किसानों के नाम पर धान खरीदा है, जो आसानी से उनको राशि लौटा सके. व्यापार मंडल ने विजयीपुर दी सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के नाम पर भुगतान के लिए 14 जनवरी को बेलवा के अनिल तिवारी के नाम पर 401316 रुपये व मुसहरी के सिंटू साह के नाम पर उसी दिन 361563 रुपये भेजे गये हैं. बैंक से उसी दिन ज्योति कुमार के खाते में राशि जमा करा ली गयी है.
उसी तरह पांच फरवरी को अहियापुर की कुसमावती देवी के नाम पर 185514 रुपये, उपेंद्र राय के नाम पर 185514 रुपये, श्रीकांत मिश्र के नाम पर 183621 रुपये, उत्तम यादव के नाम पर 185514 रुपये, उपेंद्र सिंह के नाम पर-331275 रुपये की एडवाइज व्यापार मंडल से भेजी गयी. उसी दिन यह राशि ज्योति कुमार के खाते में वापस आ गयी. ऐसे सैकड़ों किसानों से राशि को वापस कराया गया है.
ज्योति कुमार ने श्रीराम राइस मिल को 29 दिसंबर, 2020 को 9.35 लाख व 31 दिसंबर को 4.97 लाख, वहीं 29 दिसंबर को शिवम भंडार को 10 लाख की राशि भेजी है. जय बजरंग ट्रेडर्स के खाते में दो जनवरी को पांच लाख, पांच जनवरी को पांच लाख, 11 जनवरी को सात लाख, 15 जनवरी को 15-15 लाख दो बार में 30 लाख की राशि ट्रांसफर की गयी है. पशुपतिनाथ को 15 लाख का ट्रांसफर किया गया है. नियमानुसार राइस मिलों को महज 54 रुपये प्रति क्विंटल कुटाई व पोलेदारी मिलाकर भुगतान करना है.
व्यापार मंडल ने किसानों के नाम पर कागज में धान खरीदा. राइस मिलों से सेटिंग कर उनसे चावल मंगाकर सीधे राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध करा दिया. मिले साक्ष्य में स्पष्ट है कि ज्योति कुमार के खाते में किसानों को भेजी गयी भुगतान राशि वापस मंगाने और उसी में से राशि को राइस मिलों को भेजकर उनके चावल का भुगतान किये जाने का प्रमाण है, जबकि नियम कहता है कि धान क्रय केंद्र किसानों से धान सरकार के समर्थन मूल्य पर खरीदेंगे. उसे राइस मिल को भेजकर चावल तैयार करायेंगे. वहीं चावल (सीएमआर) एसएफसी को देंगे. उससे आने वाली राशि से किसानों को भुगतान करना है.
डीएम, गोपालगंज डॉ नवल किशोर चौधरी ने कहा कि विजयीपुर व्यापार मंडल की ओर से किये गये फर्जीवाड़े का साक्ष्य सामने आया है. इसकी प्रारंभिक जांच के लिए डीसीओ को निर्देश दिया गया है. वैसे इसकी हाइ लेबल जांच करायी जायेगी. इसमें कई बड़े लोगों के शामिल होने की आशंका है.
Posted by Ashish Jha
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