बिहार में बच्चों पर कहर बरपा रही ठंड, तीन स्कूली छात्रों की मौत, केके पाठक ने स्कूल खोलने के दिए थे आदेश

Updated at : 24 Jan 2024 8:56 PM (IST)
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बिहार में बच्चों पर कहर बरपा रही ठंड, तीन स्कूली छात्रों की मौत, केके पाठक ने स्कूल खोलने के दिए थे आदेश

बुधवार को बिहार के विभिन्न जिलों में तीन स्कूलों में ठंड की वजह से तीन बच्चों की जान चली गई है. मुजफ्फरपुर, औरंगाबाद और लखीसराय में बच्चों की मौत हुई है.

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बिहार में पिछले दस दिनों से कोल्ड डे की स्थिति बनी हुई है. बर्फीली ठंडी पछुआ और उत्तर-पश्चिमी हवाओं के चलने से लोगों को कंपकंपी महसूस हो रही है. सर्दी की वजह से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. घने कोहरे के बीच हाथ मलते जब बच्चे स्कूल की ओर जा रहें है तो अभिभावकों की सांसे फुल रही है. उन्हें चिंता सता रही है कि कहीं उनके बच्चे बीमार न पड़ जाये और स्कूल से बुलावा आ जाए. बुधवार को मुजफ्फरपुर जिले के मझौली स्थित एक स्कूल में छठी कक्षा के छात्र मो. कुर्बान और लखीसराय जिले के कजरा थाना क्षेत्र के श्रीघना स्थित एक स्कूल में सात वर्षीय बच्चे रणवीर कुमार की मौत ठंड लगने से हो गयी. वहीं, औरंगाबाद में भी केंद्रीय विद्यालय के छठी कक्षा के राजवीर नामक एक छात्र की ठंड लगने से मौत हो गयी है.

मुजफ्फरपुर में बच्चे की मौत

जानकारी के अनुसार मुजफ्फरपुर में बुधवार की सुबह मो. क़ुर्बान अपने समय पर मध्य विद्यालय राघो मझौली स्कूल गया. जहां क्लास में पढ़ाई के दौरान उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई. जिस पर शिक्षक ने उसे घर भेज दिया, वह कांपता हुआ घर लौटा जहां उसकी हालत और बिगड़ गई. इसके बाद उसे तुरंत बोचहां पीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई. इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि परिजनों के मुताबिक बच्चे की मौत ठंड के कारण हुई है लेकिन मुआवजे के लिए पोस्टमार्टम जरूरी है. वहीं छात्र के परिवार ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया है.

औरंगाबाद में एक बच्चे की मौत

औरंगाबाद में केंद्रीय विद्यालय के एक बच्चे की मौत ठंड से होने की जानकारी है. हालांकि, इस मामले में विद्यालय प्रबंधन द्वारा कोई सूचना जारी नहीं की गयी है, लेकिन विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि छठी कक्षा के राजवीर नामक एक छात्र की ठंड लगने से मौत हो गयी है. वैसे यह घटना स्कूल बंद होने के दौरान बतायी जा रही है. 

लखीसराय में भी एक बच्चे की मौत

इधर, लखीसराय में हुई बच्चे की मौत को लेकर बताया जा रहा है कि रणवीर बुधवार की सुबह अपने स्कूल पढ़ाई करने के लिए गया हुआ था. जहां तबीयत बिगड़ने व उल्टी करने पर विद्यालय में अध्ययनरत उसकी बहन के माध्यम से रणवीर की मां को बुलाकर उनके साथ रणवीर को भेज दिया गया. मां बच्चे को स्कूल से लेकर आयी, तो उसे उल्टी हो रही थी. यह देख वे उसे तुरंत पास के ही ग्रामीण चिकित्सक के पास ले गयीं.

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मां का रो-रोकर बुरा हाल

ग्रामीण चिकित्सक ने बताया कि इसकी तबीयत अत्यधिक बिगड़ गयी है. उन्होंने तुरंत सूर्यगढ़ा या लखीसराय बड़े अस्पताल में जाने का सलाह दी, लेकिन चिकित्सक के यहां से निकलते ही बच्चे की मौत हो गयी. बच्चे की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं घटना की सूचना दिये जाने पर कजरा थाना के अपर थानाध्यक्ष ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए लखीसराय भिजवा दिया.

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कह सकते

कजरा शिक्षा अंचल की बीईओ डॉ रंजना ने बताया कि बच्चा प्रतिदिन विद्यालय आता था. बुधवार को अचानक उसे उल्टी होने लगी. बाद में उसकी बहन व मां के साथ उसे घर भेज दिया गया. परिजनों ने स्थानीय निजी चिकित्सक के पास बच्चे का इलाज कराया, जहां उसकी मौत होने की सूचना है. वहीं सीओ सूर्यगढ़ा सुमित कुमार आनंद ने कहा कि बच्चे की मौत की जानकारी मुखिया से मिली है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कह सकते हैं.

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केके पाठक ने दिया था स्कूल खोलने का आदेश

बता दें कि ठंड की वजह से स्कूल बंद किए जाने को लेकर शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने कड़ी नाराजगी जताई थी. उन्होंने 20 जनवरी को सभी प्रमंडलीय आयुक्त को एक पत्र लिखकर कहा था कि स्कूल बंद करने के लिए जब शीतलहर में जिला प्रशासन की ओर से कोई आदेश निकाला जाता है, तो वह पूरे जिले पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए.

उन्होंने शीतलहर के कारण स्कूल बंद किए जाने के आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया था. उन्होंने कहा था कि सरकारी विद्यालयों की समयावधि नौ बजे से पांच बजे तक तय की है. इस समय को बदलने के संबंध में कोई भी आदेश निकालने से पहले शिक्षा विभाग की अनुमति अवश्य ली जाए. बात-बात पर विद्यालयों को बंद रखने की परंपरा पर रोक लगनी चाहिए.

केके पाठक ने यह भी कहा था कि ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन से यह पूछा जा सकता है कि ये कैसी सर्दी, शीतलहर है, जो केवल विद्यालयों में ही गिरती है और कोचिंग संस्थानों में नहीं गिरती है. इन कोचिंग में हमारे ही विद्यालयों के बच्चे कक्षा चार से लेकर 12 तक के पढ़ने जाते है.

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