ChildHood Cancer Day : बच्चों में हो रहे चार तरह के कैंसर, पढ़ें कैंसर से जंग लड़ रहे मासूमों की कहानी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 15 Feb 2024 9:50 PM
बच्चों में होने वाली कैंसर से बचाव व जागरूकता के लिए हर साल 15 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है.
आनंद तिवारी, पटना. खेलने-कूदने की उम्र में बच्चों को अब कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से जंग लड़नी पड़ रही है. शहर के पीएमसीएच, आइजीआइएमएस, एनएमसीएच और पटना एम्स के कैंसर रोग विभाग में करीब करीब 700 से अधिक बच्चों का इलाज चल रहा है. इसके अलाव इसके अलावा इनमें महावीर कैंसर संस्थान, बुद्धा कैंसर सेंटर के अलावा अन्य निजी अस्पतालों में 250 बच्चे इलाजरत हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि कैंसर लाइलाज बीमारी है लेकिन इससे जिदंगी खत्म नहीं हो सकती है. जज्बा, आत्मविश्वास, जागरूकता और अपनों के सपोर्ट से जंग-ए-जिंदगी में कैंसर को मात दी जा सकती है. बच्चों में होने वाली कैंसर से बचाव व जागरूकता के लिए हर साल 15 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस है.
बच्चों में हो रहे चार तरह के कैंसर, पटना में लिम्फोमा कैंसर अधिक
डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों में चार प्रकार का कैंसर फैल रहा है. इसमें एक्यूट ल्यूकेमिया, ब्रेन ट्यूमर, न्यूरोब्लास्टोमा और लिम्फोमा का कैंसर शामिल है. विशेषज्ञ बताते हैं कि बड़ों के मुकाबले बच्चों में कैंसर के मामले कम होते हैं. बच्चों में होने वाला ज्यादातर कैंसर ठीक हो सकता है. बशर्ते उसकी समय पर पहचान हो जाए. यहां पर इलाज कराने वाले ज्यादातर बच्चों में लिम्फोमा और ल्यूकीमिया के पंजीकृत हैं. यहां तक कि पटना के संबंधित अस्पतालों में तीन साल से कम उम्र के बच्चों में न्यूरोब्लास्टोमा का कैंसर भी मिला है.
नहीं हारी हिम्मत, दो साल की कीमोथैरपी के बाद स्वस्थ
पटना की रहने वाली 13 वर्षीय अनीशा को सारकोमा कैंसर था. वर्तमान में अनिशा का इलाज आइजीआइएमएस के कैंसर रोग विभाग के एडिशनल प्रो. डॉ शशि पवार की देख रेख में चल रहा है. कैंसर बीमारी सुनने के बाद परिवार के सदस्यों ने हिम्मत नहीं हारी. जिसके बाद डॉ पवार ने सर्जरी कर कैंसर के सभी पार्ट को हटाया. इसके बाद दो साल तक की कीमोथैरेपी से अब वह पूरी तरह से ठीक है.

माता-पिता व डॉक्टर के सपोर्ट से हारा ब्लड कैंसर
मुंगेर जिले के रहने 12 वर्षीय दिव्यांश को ब्लड कैंसर था. पिता सुनील कुमार राय ने बताया कि जब पहली बार पता चला कि उनके बेटे को ब्लड कैंसर है तो वह घबरा गये. एक बार लगा सब कुछ खत्म हो गया. लेकिन इन हालात में भी हार नहीं मानी. मुंगेर के डॉक्टर ने सीधे पटना रेफर कर दिया. जहां बुद्धा कैंसर सेंटर के डॉ अरविंद कुमार की देखरेख में इलाज किया गया. कैंसर के इलाज के दौरान दिव्यांश को पीड़ा देख मुझे व मेरी पत्नी के आंखों में आंशू आ जाते थे. लेकिन दृढ़ इच्छा शक्ति, मजबूत हौसले और डॉक्टरों की मदद से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को मात दे दी.

कैंसर के इलाज में बिक गया ऑटो, छूट गयी बच्चे की पढ़ाई
बेगूसराय जिले के रहने वाला 13 साल के प्रिंस कुमार क्लास नौवीं का छात्र है और आज वह ब्लड कैंसर से पीड़ित है. पिता सुबोध महतो ने बताया वह पेशे से ऑटो चलाक हैं और अपने बेटे का बीते तीन साल से कैंसर का इलाज करा रहे हैं, बेगूसराय से लेकर कई अस्पतालों में इलाज कराया अब तक सात लाख रुपये खर्च हुए. हालत यह है कि ऑटो बेचना पड़ा और कर्ज भी हो गया है. वहीं मां मुन्नी देवी ने बताया कि कैंसर केयर एंड क्योर पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की मदद से डॉक्टरों ने बच्चे को गोद लिया और अब नि:शुल्क इलाज चल रहा है. अब तक छह कीमोथेरपी हो चुकी है. 50 प्रतिशत तक बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार आया है. इस दु:ख की घड़ी में भी पूरा परिवार हिम्मत नहीं हारा और अपने बेटे का इलाज करा रहे हैं.

हिम्मत से हार गया बर्किट लिम्फोमा का कैंसर
बिहटा का रहने वाला नौ वर्षीय विशाल कुमार को बर्किट लिम्फोमा का कैंसर था. आंत के कुछ हिस्से में भी कैंसर फैल गया था. छह परिजनों बताया कि कैंसर सुनकर ही डर गये लेकिन हम लोगों ने हिम्मत नहीं हारी. भाई, पत्नी और मेरे माता पिता ने भी विशाल को हिम्मत दी. छह बार कीमोथेरेपी चला और अब वह पूरी तरह से ठीक है. इलाज के बाद अब बच्चा स्कूल में पढ़ाई क रहा है.

पटना में कहां क्या इलाज की है सुविधा
शहर के आइजीआइएमएस, पटना एम्स, पीएमसीएच और एनएमसीएच के कैंसर रोग विभाग में इलाज की सुविधा उपलब्ध है. आइजीआइएमएस को क्षेत्रीय कैंसर सेंटर के रूप में विकसित किया गया है. जहां सभी तरह के जांच व इलाज की सुविधा है. वहीं पीएमसीएच को छोड़ इन तीनों अस्पतालों में कोबाल्ट मशीन से कैंसर की सेकाई हो रही है. जबकि पीएमीसएच में मशीन खराब है. इसके अलावा महावीर कैंसर संस्थान में इलाज की सुविधा उपलब्ध है.
बच्चों में कैंसर के प्रकार
ल्यूकीमिया- इसे ब्लड कैंसर भी कहा जाता है. इसमें बच्चों की त्वचा पीली पड़ने लगती है.
लिम्फोमा- शरीर में गिल्टी या गांठ बन जाती है. लिम्फोमा में बच्चों को तेज बुखार व थकान जैसे समस्या होने लगती है.
न्यूरोब्लास्टोमा – यह कैंसर नवजातों को होता है. किडनी के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है.
ब्रेन ट्यूमर – बच्चों के मस्तिष्क में ट्यूमर का निर्माण होने लगता है.
बचाव के लिए यह करना जरूरी
स्वच्छता पर ध्यान दें
स्वच्छ व पौष्टिक भोजन कराएं
हड्डी में दर्द या सूजन हो तो डॉक्टर से संपर्क करें
बुद्धा कैंसर सेंटर के डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि बड़ों के मुकाबले बच्चों में कैंसर के मामले कम होते हैं. समय पर इलाज हो तो बच्चों में होने वाला अधिकांश कैंसर ठीक हो जाता है. बच्चों के आंतरिक शारीरिक क्षमता व्यस्कों की तुलना में मजबूत होती है. सही से इलाज हो तो तीसरे व चौथे स्टेज के कैंसर में भी अच्छी रिकवरी हो जाती है.

आइजीआइएमएस कैंसर रोग विभाग के एडिशनल प्रो. डॉ शशि पवार ने बताया कि दिमाग की कोशिकाओं की संख्या तेजी से बढ़ने पर बच्चों में ब्रेन ट्यूमर हो जाता है. इसके अलावा ऑस्टियोकोरमा और साकोंमा भी मिलता है. कई ऐसे बच्चे हैं जिन्हें आइजीआइएमएस में ठीक किया जा रहा है.

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