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काम की खबर : बिहार में जल्द ही पांच साल से कम उम्र के बच्चे का बनवा सकेंगे ब्लू आधार कार्ड

Updated at : 08 Mar 2022 6:42 PM (IST)
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काम की खबर : बिहार में जल्द ही पांच साल से कम उम्र के बच्चे का बनवा सकेंगे ब्लू आधार कार्ड

धार कार्ड जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) बच्चों के आधार बनवाने की सुविधा भी देती है. यूआइडीएआइ बच्‍चों के लिए जारी आधार कार्ड का रंग नीला रखता है.

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पटना. आधार कार्ड की अहमियता पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ी है. अब तो स्कूल में दाखिले के दौरान बच्चों का भी आधार मांगा जा रहा है. ऐसे में बच्चों का भी आधार कार्ड बनवाना जरूरी हो गया है. अगर आपके बच्चे का आधार नहीं बना है तो कई कामों में रुकावट आ सकती है. आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआइडीएआइ) बच्चों के आधार बनवाने की सुविधा भी देती है. यूआइडीएआइ बच्‍चों के लिए जारी आधार कार्ड का रंग नीला रखता है.

पटना डिविजन के वरीय अधीक्षक राजदेव प्रसाद ने बताया कि जल्द ही बच्चों के आधार कार्ड का रंग बदला हुआ मिलेगा. कोई भी अभिभावक अपने पांच साल से कम आयु के बच्चे का ब्लू आधार कार्ड बनवा सकते हैं. वैसे तो यह अन्‍य आधार की तरह ही रहता है, लेकिन इसका रंग ब्लू कर दिया जाता है.

उन्होंने बताया कि कोई भी अभिभावक प्रमाणित डॉक्‍यूमेंट देकर अपने बच्‍चों का आधार कार्ड बनवा सकते हैं. अगर आप भी अपने बच्‍चों के लिए आधार कार्ड बनवाना चाहते हैं तो यूआइडीएआइ के वैलिड सेंटर्स पर इन दस्‍तावेजों के साथ आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए कोई चार्ज नहीं वसूला जायेगा.

प्रसाद ने बताया कि बच्‍चे की आयु पांच साल पूरी होते ही यह आधार कार्ड अमान्य हो जायेगा. आधार बनवाने के लिए बच्‍चे की स्‍कूल आइडी का भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है. साथ ही बच्‍चे उम्र पांच साल पूरी होने पर उसका बाॅयोमेट्रिक आधार डेटा अपडेट कराये, 15 साल की उम्र पर फिर इसे अपडेट कराना अनिवार्य है.

बच्‍चे का आधार बनवाने के लिए बर्थ सर्टिफिकेट या हॉस्पिटल से मिलने वाली डिस्‍चार्ज स्लिप ही काफी है. पांच साल की उम्र तक बनने वाले आधार में बच्‍चे के फिंगर प्रिंट और आंखों की स्‍कैनिंग नहीं की जाती है.

बच्चों के आधार बनवाने के फायदे

बालिग होने तक बच्चों का न तो ड्राइविंग लाइसेंस बन सकता है और न ही मतदाता पहचान पत्र. ऐसी परिस्थिति में बच्चों की पहचान का एक ही दस्तावेज होता है और वो है आधार कार्ड. निजी संस्थान भी बच्चे की पहचान के मामले में इसे मानने से इनकार नहीं कर सकते. इसके अलावा सरकारी योजना में इस कार्ड का उपयोग कर सकते हैं.

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