‘वेंटीलेटर’ पर मेडिकल कॉलेज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Jul 2015 8:03 AM (IST)
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बेतिया : जीएमसीएच सह सदर अस्पताल में दवा खत्म, नेबुलाइजर नहीं, ऑपरेशन ठप, ऑक्सीजन पर भी संकट. ऐसे में हर रोज आने वाले करीब 500 मरीजों को परेशानी हो रही है. सरकारी अस्पताल में इन्हें निजी खर्च पर इलाज करवाना पड़ रहा है. ओपीडी तो दूर अब इमरजेंसी में भी इलाज ठप होने की नौबत […]
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बेतिया : जीएमसीएच सह सदर अस्पताल में दवा खत्म, नेबुलाइजर नहीं, ऑपरेशन ठप, ऑक्सीजन पर भी संकट. ऐसे में हर रोज आने वाले करीब 500 मरीजों को परेशानी हो रही है. सरकारी अस्पताल में इन्हें निजी खर्च पर इलाज करवाना पड़ रहा है.
ओपीडी तो दूर अब इमरजेंसी में भी इलाज ठप होने की नौबत आ गयी है. अस्पताल की व्यवस्था के संग ही प्रबंधन भी अब हाफ रहा है. डॉक्टर शाम को राउंड पर नहीं आते. भरती मरीजों को इलाज के नाम पर सिर्फ ड्रिप चढ़ाया जाता है.
ओपीडी में इलाज नहीं मिलता है सिर्फ डॉक्टरी परामर्श
अस्पताल में ओपीडी अब सिर्फ परामर्श तक ही सिमट गयी है. दर्द की दवा भी अब ओपीडी में नहीं बची है. लिहाजा ओपीडी में आने वाले मरीजों के पुरजों पर सिर्फ दवाइयां लिखी जा रही हैं. लेने के लिए बाहर की ओर रूख करना पड़ रहा है.
सरकारी अस्पताल, निजी खर्च
ओपीडी तो दूर इमरजेंसी चिकित्सा भी बदहाल हो गयी है. यहां भी लाइफ सेविंग दवाओं का टोटा है. ऑपरेशन वाले मरीज रेफर किये जा रहे हैं. स्लाइन व पानी ही बची है
शो पीस बना है आइसीयू
एमजेके सदर अस्पताल में छह बेड का बना आइसीयू वार्ड महज शो पीस बना हुआ है. तीन साल से तैयार इस आइसीयू में अभी तक एक भी मरीज भरती नहीं हुए. लाखों के हाइटेक उपकरण अब जंग खा रहे हैं.
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